Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2019
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

कछुआ और खरगोश

कछुआ और खरगोश  एक कछुए और खरगोश के दोस्ती हो गई दोनों एक साथ खेलते और घुमते फिरते - उनको मालूम था लड़ाई अच्छी बात नहीं लेकिन फिर भी उनमे कभी कभी लड़ाई हो जाती - होता यूँ की दोनों रस्ते में जा रहे होते तो खरगोश तेज चलने की वजह से आगे निकल जाता और कछुआ अपने भरी जिस्म की वजह से तेजी से न चल सकता था और पीछे रह जाता जिसपर खरगोश उसका मजाक उडाता आपको तो मालूम  है किसी का मजाक उड़ाना कितनी बुरी आदत है - आखिर एक दिन कछुए ने तंग आकर खरगोश से कहा  - देखो मुझे भी अल्लाह ने पैदा किया है और तुम्हे भी अल्लाह ने पैदा किया है इसलिए तुम अपने तेज चलने पर गुरुर मत करो अल्लाह गुरुर करने वालों को पसंद नहीं करते अगर तुमको अपने तेज चलने पर गुरुर है तो आओ हम दोनों मुक़ाबला करते हैं खरगोश भी मुक़ाबले के लिए तैयार हो गया - मुक़ाबला शुरू होते ही खरगोश तेजी से आगे की तरफ भागा काफी दूर निकल जाने  उसने सोचा की कछुआ तो बहुत देर के बाद यहां पहुंचेगा जब तक मै कुछ देर आराम कर लूँ ये सोचकर वो एक दरख्त के नीचे सो गया - इधर कछुआ आहिस्ता आहिस्ता चलता हुआ खरगोश के पास से गुजरा , खरगोश सो रहा थ...

CHALAAK NEWALA

चालाक नेवला  आपने बहुत से जानवरों के किस्से और मालूमात सुनी होंगी लेकिन आपको एक अजीब जानवर का हाल सुनाते हैं इससे पहले आपको इसके बाते में कुछ मालूमात भी हो तो बेहतर है - तो सुनिए ! ये चूहों , साँपों , और मगर मच्छो का दुश्मन है - मगर मच्छ अपना मुँह खुला रखता है और उसके मुँह में घुसकर उसके पेट में पहुंच जाता है और उसकी आंते काट देता है और फिर बहार निकल आता है - हां तो फिर आप इंतजार में होंगे आखिर ये कौनसा जानवर है  तो लीजिये ये जानवर नेवला है नेवला बहुत होशियार जानवर है - एक बार एक नेवल एक चूहे का शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़ा , चूहा अपनी जान बचाने के लिए एक दरख़्त पर चढ़ गया - जब उसको भागने का कोई रास्ता न मिला तो वो एक शाख का पत्ता अपने मुँह में दबाकर लटक गया नेवले ने चूहे जब ये चालाकी देखि तो उसने अपनी मादा को आवाज दी - मादा उसकी आवाज सुनकर दरख़्त के निचे आई तो नेवले ने उस शाख को जिस पर चूहा लटक रहा था काट दिया शाख के काटने से चूहा नीचे गिरा गिरते ही मादा ने उसका शिकार कर लिया -  नेवला चोर भी होता है जब उसको सोने चाँदी की कोई च...

SCHOOL

स्कूल  आज अब्दुल्लाह बहुत खुश था की आज उसके बेटे हुजैफा का स्कूल में पहला दिन था अब्दुल्लाह दिन भर रिक्सा चलाता और जो कमाता उससे घरवाले अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए जिंदगी गुजारते - अब्दुल्लाह अनपढ़ था उसे पढ़ना लिखना बिल्कुल नहीं आता था इस वजह से वो चाहता था की उसका  बेटा तालीम हासिल करे और इल्म के जरिये पूरी दुनिया में  दीन जिन्दा करे अब्दुल्लाह ने सबसे पहले मस्जिद के इमाम साहब से (जो आलिम दीन थे ) मशवरा किया की अब्दुल्लाह की तालीम और तरबियत किस तरह की जाय - इमाम साहब ने अब्दुल्लाह को मश्वरा दिया की सबसे पहले हुजैफा बेटे को किसी अच्छे दिनी माहौल वाले स्कूल में दाखिला दिलवा दो जब कुछ अर्से बाद हुजैफा बेटा अच्छी तरह पढ़ना लिखना सीख ले तो उसे किसी अच्छे मदरसे में हिफ्ज (क़ुरआन याद ) करने के लिए उसका दाखिला करवा दिया जाय - अब्दुल्लाह को इमाम साहब की बातें बहुत अच्छी लगीं वो इमाम साहब से इजाजत लेकर अपने घर आया और हुजैफा की माँ को इमाम साहब की कही हुई बातें बताई -हुजैफा की माँ एक समझदार खातून थी वो भी इन बातों पर अमल करने के लिए फ़ौरन तैयार हो गईं -  अब्दुल्...

PYASA KAWWA

प्यासा कौवा  काएं - काएं करते हुए काले रंग के परिंदे को तो आप जानते हो होंगे ? जी हाँ  ! आप बिल्कुल ठीक समझे हम आपसे कौवे की बात कर रहे है - एक कौवा रोजाना अपने घर (घोंसले ) से निकलता और अपने दाना और खाने का सामान तलाश करता - एक दिन दाने की तलाश में अपने घर घोंसले से बहुत दूर निकल आया और रास्ता भी भूल गया - बहुत तलाश किया पर घर न मिला आख़िरकार थक गया और बहुत सख्त प्यास लगी पानी तलाश किया लेकिन पानी न मिला - अचानक कौवे की नजर मटके पर पड़ी - कौवा बहुत खुश हुआ जल्दी से मटके के पास पहुंचा लेकिन ये क्या देखकर परेशान हो गया की मटके में पानी बहुत काम है और उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंच रही जिसकी वजह से वो पानी नहीं पी  सकता - आखिर अल्लाह पाक ने उसको एक तदबीर सुझा दी -  जल्दी से वो उड़ा और बहुत सारे कंकर जमा किये और उनको मटके में डालना शुरू किया जैसे जैसे कंकर मटके में जाते पानी ऊपर आता चला गया कौवे ने अब अपनी चोंच पानी में डाली तो पानी तक पहुँच गया - कौवा बहुत खुश हुआ ,उसने जी भरके पानी पिया कौवे ने अल्लाह का शुक्र अदा किया और अपने घर की तलाश में चल दि...

JETOON KA MATKAA

जैतून के  तेल  का मटका  एक रात वो ताजिर जिसके पास अली बाबा ने जेतून का मटका बतौर अमानत रखा था अपनी बीवी के साथ चहल कदमी के लिए निकला दोनों मियां बीवी आपस में बातें करते जा रहे थे बीवी ने अपने खाविंद  शकील से फरमाइश करते हुए कहा आज जैतून खाने को मेरा जी बहुत चाहता है अर्से दराज से जैतून हमारे घर में ख़त्म है - खाविंद ने अपनी चहीती बीवी से कहा - हाँ हाँ तेरी बात से मुझे याद आ गया की मेरा दोस्त अली बाबा मक्का जाने से पहले जैतून का एक मटका हमारे गोदाम में रख गया था सात साल हो गए लेकिन वो अभी तक वापस न आया पता नहीं वो इतनी तवील मुद्दत से क्यों गायब है ? अभी तक वापस क्यों नहीं आया ?बीवी ने पुछा - शकील कहने लगा एक ताजिर की जिसने उसके साथ हज किया था उसने बताया की बाबा मिस्र चला गया था उसके बाद उसका कोई पता नहीं की उसके साथ क्या बीती ? अल्लाह न करे मेरा ख्याल है की वो मर चुका है !वो जैतून का मटका मै तुझे लाए देता हूँ जो हमारे गोदाम में बतौर अमानत के रखा हुआ है अगर जैतून अभी तक ख़राब नहीं हुआ तो हम उसे मजे से खाते हैं - वाह वाह क्या ही मजा आएगा जैतून खाने का - ...