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Showing posts from May, 2022
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...
                         जहांगीर और नूरजहां भाग- 3 इ सके अलावा जहांगीर ने बहुत से गैर जरूरी टेक्‍स खत्‍म कर दिये। लश्‍करियों को सरकारीय खर्चे पर फौजी छावनी में रहने की व्‍यवस्‍था की गई। गुलमों और बांदियों के खरीदने और बेचने पर पाबंदी लगा दी गई। और परगना अफसरों का हुक्‍म दिया गया कि वो अपने परगना की किसी लड़की से शादी न करें। जहांगीर ने तख्‍त पर बैठते ही अपने दुश्‍मनों को माफ कर दिया। बहुत से निचले स्‍तर के अफसरों को बड़े ओहदों   पर तैनात कर दिया क्‍योंकि बगावत के वक्‍त उन्‍होंने जहांगीर का साथ दिया था । शेख सलीम चिश्‍ती , जिन्‍हें वो अपना उस्‍ताद मानता था । उनके रिश्‍तेदारों को भी अच्‍छे ओहदे सौंपे गये ।कहने के लिये ये सब काम लोगों के लिए नए नहीं थे। लेकिन जब जहांगीर ने राजा भीरसिंह बुंदेला जिसने अबुल फजल को कत्‍ल किया को भी तरक्‍की दे दी तब लोगों में बेचैनी महसूस की गई। हलांकि उसके साथ ही जहांगीर ने अबुलफजल के बेटे अब्‍दुर्रहमान को भी दो हजारी मंसबदारी पर तरक्‍की दी थी इसके अलावा अजीज कोका को भी उस ओहदे ...
                                 जहांगीर और नूरजहां  भाग -2     दूसरी तरफ फरीद खान की गर्दन झुकी हुई थी जैसे ही उसका बेटा दरबार में दाखिल हुआ उसने चौंककर अपने बेटे को देखा और अपने बेटे को जंजीरों में जकड़ा हुआ देखा तो उसकी आंखों से आंसू बह निकले थे फिर तड़पकर उसने दोनों बाजू फैला दिये । इसपर जंजीरों में जकड़ा होने की वजह से उसका बेटा रूस्‍तम अपनी टांगे घसीटता हुआ आगे बढ़ा और अपने बाप से लिपट गया था । कुछ देर तक बाप बेटे की हिचकियां सुनाई दे रही थीं । जहांगीर ने चोबदार को हुक्‍म दिया कि जंजीरें खोल दो । चोबदार आगे बढ़ा और दोनों को जंजीरों से आजाद कर दिया।   आखिर जहांगीर की आवाज दरबार में गूंजी । फरीद खान तुम्‍हारे साथ न इंसाफी हुई है। मैं तुम्‍हें आजाद करता हूं और अपने लश्‍कर में शामि करता हूं । तुम हमारे लश्‍कर में एक इज्‍जतदार कमांडर की हैसियत से काम करोगे। इस मौके पर अंबर का राजा जगननाथ   अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और जहांगीर से कहने लगा । शहंशाह ए मुअज्...
                                        जहांगीर  और नूरजहां भाग-1   सन् 1607ई. का ए क दिन था और बादल छाए हुए थे आगरा के दरबार में जो कुर्सीयां लगी हुई थी वह लगभग सभी भरी हुई थीं कुछ खाली रह गईं थी सबसे आगे की कुर्सीयों पर शहंशाह जहागीर के बेटे खुर्रम परवेज और शहजादा शहरयार बैठे हुए थे और उनके आगे वजीर माल ग्‍यास जो नूरजहां का बाप था फिर महावत खां जो हकीकत में एक ईरानी था लेकिन एक कमाडंर की हैसियत से जहांगीर के लश्‍कर में शामिल था उससे आगे असफ खां और इब्राहीम बैठे हुए थे। ये दोनों नूरजहां के भाई थे। आसफ खान जहांगीर का वजीर था । फिर उसके बाद राजा मानसिंह , अजीज कोका , बीकानेर का राजा रायसिंह , अंबर का राजा जगननाथ , मेवाड़ का राजा अमर सिंह , तीन बड़े सालार पीर खान जो इतिहास में खान जहान के नाम से मश्‍हूर हुआ। अब्‍दुल्‍लाह खान जो उम्‍दा सालारों में से था । उसके बाद इस्‍लाम खान भी बैठा हुआ था । ये भी सालार था उससे आगे बुंदेलखण्‍ड का राजा बीरसिंह और मेव...