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Showing posts from December, 2020
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-14]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-14) अकबर सिंध में पैदा हुआ था इसलिए वो उसे अपनी सल्‍तनत में शामिल करना चाहता था ।इसलिए उसने 1590ई. में अब्‍दुर्रहीम खान खाना को मुल्‍तान का गर्वनर बनाकर भेजा और उसे हुक्‍म दिया कि वो सिंध को हर कीमत पर अकबर की सल्‍तनत में शामिल करे। ये हुक्‍म मिलने के बाद अब्‍दुर्रहीम खान खाना ने सिंध पर हमला कर दिया और मिर्जा जानी बेग को शिकस्‍त हुई । ठठ और सेहून के इलाकों पर अब्‍दुर्रहीम खान खाना का कब्‍जा हो गया उसके बाद जब मिर्जा जानी बेग को ये अंदाजा हो गया कि मुगल बहुत जल्‍द सिंध हमला करके उस पर कब्‍जा कर लेंगे । उसने अपनी भलाई इसी में समझी कि वो मुगलों के आगे झुक जाय । इसलिए 1593ई. में वो खुद अकबर के दरबार में हाजिर हुआ इस तरह अकबर का सिंध पर कब्‍जा हो गया मिर्जा जानी बेग को उसने अपने दरबार में ऊंचा ओहदा दे दिया फिर मिर्जा जानी बेग की खिदमत से खुश होकर मिर्जा जानी बेग को सिंध का हाकिम बना दिया था। अकबर ने राजपूतों का मश्‍हूर किला चित्‍तौड़ फतह कर लिया था जबकि चित्‍तौड़ का राजा उदय सिंह पहाड़ी इलाकों में भाग गया था। उदय सिंह 1572ई . में मर गया तो उसके बाद उ...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-13]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-13) वहां से फतहपुर सीकरी पहुंचा और फतहपुर सीकरी में उसने एक अजीमुस्‍शान शहर आबाद करने का फैसला किया। अकबर के दो बेटे सलीम और मुराद की पैदाईश फतहपुर सीकरी मे हुई थी वहां एक बुजुर्ग शेख सलीम भी थे जिनसे अकबर औलाद के लिए दुआ कराता रहता था। अकबर वहां एक खूबसूरत शहर बसाना चाहता था। इस मकसद के लिए अकबर ने इससे जुड़े हुए माहिरीन को शहर बसाने का काम सौंपा और हुक्‍म दिया कि शाही लोगों को रहने के लिए बड़ी बड़ी और खूबसूरत इमारतें बनवाई जायें। कहा जाता है कि फतहपुर सीकरी में अकबर के हुक्‍म पर चौदह साल तक इमारतें बनवाई जाती रहीं इसी बीच फतहपुर सीकरी के बुजुर्ग शेख सलीम का इंतिकाल हो गया और अकबर ने शेख सलीम का खूबसूरत मकबरा बनवाया । 1571ई. में अकबर ने यहां एक जामा मस्जिद भी बनवाई । पहले इस शहर का नाम फतहपुर रखा गया था लेकिन बाद में अकबर ने शहर को फतहबाद का नाम दिय था । इस शहर की सैकड़ों इमारतें अब तक दुनियाभर के लोगों के लिए अपनी ओर खींचती हैं। यहां की इमारतें , हम्‍माम , पानी के हौज और दीवान देखने लायक हैं। अकबर 1569ई. से 1585ई. तक लगभग 17 साल फतहपुर में रहा य...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-12]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-12) चित्‍तौड़ फतह करने के बाद राजपूतों का एक बड़ा किला मुगलों के हाथों फतह हो गया था। अब उनके दो और किले रह गये थे । एक रणथम्‍बूर और दूसरा कालिंजर । अकबर ने इरादा कर लिया था कि हर हाल में वो राजपूत राजाओं को अपने सामने झुकाकर रखेगा इसलिए चित्‍तौड़ की फतह के बाद अपने लश्‍कर के साथ उसने रणथम्‍बूर का रूख किया। राणथम्‍बूर का हाकिम उन दिनों सूरजन था उसने अकबर का मुकाबला करने की ठान ली । अकबर ने सबसे पहले रणथम्‍बूर का इतनी सख्‍ती से मुहासरा किया कि किले के अंदर कोई चींज अंदर न जाने देता न किले से बाहर आने देता मुहासरे में सख्‍ती करने के बाद अकबर ने दूसरा कदम ये उठाया कि रणथम्‍बूर के पास ही पहा‍ड़ी इलाका था जिसे मदन पहाड़ भी कहा जाता था। उस पहा‍ड़ी इलाके पर अकबर ने तोपें लगाने का हुक्‍म दिया । उससे पहले जो कोई भी रणथम्‍बूर पर हमला करता था आज तक किसी ने पहाड़ों पर तोपें लगाकर उसे फतह नहीं किया इस तरह अकबर पहला बादशाह था जिसने ये हुक्‍म दिया था और उसका हुक्‍म मानते हुए उसके सिपाहियों ने बड़ी मेहनत के बाद तोपों को पहाड़ पर लगा दिया और जब तोप ने गोले दागते हुए र...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-11]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-11) अकबर अपने लश्‍कर के साथ 23 अक्‍टूबर 1567ई. चित्‍तौड़ पहुंच गया। चित्‍तौड़ का किला एक ऊंची पहाड़ी के ऊपर शहर से अलग था। उसक किले की लंबाई साढ़े तीन मील (3. 1/2मील) थी और ये किला बीच में लगभग (1200 गज )चौड़ा था समुद्री सतह से उस किले की ऊंचाई (1980 फिट) और जमीन से लगभग (1500 फिट) ऊंचा था । इस किले पर पहले भी दो बार मुसलमान हमला कर चुके थे और दोनों बार उसे फतह कर लिया था। एक बार 1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने उस पर हमला किया और उसे फतह कर लिया और दूसरी बार 1534 ई . में गुजरात के हाकिम बहादुर शाह ने उस किले पर हमला करके किले की ईंट से ईंट बजा दी थी । अब तीसरी बार अकबर चित्‍तौड़ पर हमला कर रहा था। चित्‍तौड़ पहुंचकर अकबर अपने लश्‍कर के साथ एक महीने तक वहां ठहरा और चित्‍तौड़ पर हमला करने की तैयारियां करता रहा उसके इरादे चित्‍तौड़ को फतह हासिल किये बगैर वापस जाने के नहीं थे। अकबर के इस तरह रूकने से उदय‍ सिहं घबरा गया और अपनी राजधानी छोड़कर पास के रावली नाम के पहाड़ों मे जाकर छुप गया और किला उसने अपने दो राजाओं   राजा जयमल और राजा पट्टा के सुपुर्द...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-10]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर   (भाग-10)   ये खबर सुनकर मिर्जा हाकिम के होश उड़ गये उसी वक्‍त अपने लश्‍कर के साथ वो लाहौर से निकला और बड़ी तेजी से काबुल की तरफ चला गया उसकी खुशकिस्‍मती कि उन दिनों सर्दियां बहुत तेज थी और बदख्‍शां का हाकिम सुलेमान काबुल से बदख्‍शां की तरफ चला गया था। हाकिम मिर्जा के लिए काबुल का मैदान खाली था। इसलिए तेजी से आगे बढ़ा और एक बार फिर काबुल पर कब्‍जा कर लिया और वहां का हुक्‍मरां बन गया। दूसरी तरफ अकबर लाहौर पहुंचा । शहर में अपने लश्‍कर के साथ रूका लाहौर में ठहरने के दौरान उसको दो बुरी खबरें मिलीं पहली ये कि मालवा में उसके रिश्‍तेदारों ने   उसके खिलाफ बगावत कर दी थी दूसरे अजबक सरदार खान जमान फिर एक बार बगावत पर उतर आया था और उसने खुले तौर पर अकबर की जगह मिर्जा हाकिम को अपना बादशाह तस्‍लीम कर लिया था। मालवा और उसके आसपास के इलाकों में अकबर के जिन रिश्‍तेदारों ने बगावत की थी उनके छ: भाई सबसे आगे थे 1 अलफा मिर्जा 2 शाह मिर्जा 3 इब्राहीम हुसैन मिर्जा 4   अकील हुसैन मिर्जा 5 मोहम्‍मद हुसैन मिर्जा 6 मसऊद हुसैन मिर्जा थे। अपने इन रिश्‍त...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-9]

 मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-9) उस शिकस्‍त की खबर जब इलाहाबाद पहुंची   तो अकबर बड़ा गुस्‍सा हुआ । साथ ही अकबर के मुखबिरों ने अकबर को ये खबर दी कि ये सारी गड़बड़ी मीर मआज उल मलिक   और टोडरमल की शाजिशों की वजह से हुई है और से ये खबर हुई थी कि दोनों किस मकसद के लिए ऐसा कर रहे थे । अकबर ने बड़ी अक्‍लमंदी से काम लिया अजबकों को जिन शर्तों पर माफी दी गई थी उन शर्तों को अकबर ने बरकरार रखा उसने कुछ वक्‍त के लिए मआज उल मलिक और राजा टोडरमल की शाही दरबार में हाजिरी पर पाबंदी लगा दी थी। दूसरी तरफ जब टोडरमल और मआज उल मलिक की वजह से लश्‍कर टकरा गये तब खान जमान अपने लश्‍कर के साथ घाघरा नदी पार कर गया हालांकि समझौते की शर्त में तय था कि वो घाघरा नदी को पार नहीं करेगा इस तरह अकबर को बड़ा अफसोस हुआ । अकबर इलाहाबाद से जोनपुर और वहां से बनारस रवाना हुआ। रास्‍ते में उसने चिनार नाम के किले में कयाम किया। उसे जब खबर हुई कि समझौते की शर्त के खिलाफ खान जमान ने घाघरा नदी को पार किया है तो उसने खान जमान को बागी करार दे दिया । दूसरी तरफ खान जमान घाघरा नदी पार करके एक जगह अपने लश्‍कर के साथ रूक...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-8]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-8) ये फैसला करने के बाद इब्राहीम और सिकंदर बड़ी तेजी से कन्‍नौज की तरफ बढ़े । रास्‍ते में उनका सामना अकबर के लश्‍कर से हुआ लेकिन इब्राहीम और सिकंदर ने हमला करके अकबर के लश्‍कर को शिकस्‍त दी और भागने पर मजबूर कर दिया। दूसरी तरफ खान जमान और बहादुर खान ने मानकपुर पर हमला कर दिया और मानकपुर का मुहासरा कर लिया मानकपुर में उन दिनों अकबर की तरफ से मजनून खान हाकिम था। जब अकबर को अजबकों की इस कार्यावाही की खबर मिली तो उसने अपने एक सालार मुनअम खान को एक बड़ा लश्‍कर देकर   24 मई 1565 ई. को आगरा से कन्‍नौज की तरफ रवाना किया । इस लश्‍कर की रफ्तार बहुत सुस्‍त थी इसलिए कि गर्मी की वजह से लश्‍कर सिर्फ रात के वक्‍त सफर कर   सकता था। अकबर को जब इस बात की खबर मिली कि गर्मी की वजह से मुनअम खान के आगे बढ़ने की रफ्तार बहुत सुस्‍त है और इब्राहीम और सिकंदर कन्‍नौज के रास्‍ते पर बड़ी तेजी से बढ़कर लखनऊ पर कब्‍जा करना चाहते हैं तब अकबर को बड़ा गुस्‍सा आया। एक लश्‍कर लेकर वो निकला और बड़ी तेजी से वो लखनऊ की तरफ बढ़ा था। अकबर ने इतनी तेजी से ये सफर किया कि गंगा नदी ...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-7]

  मुगल बादशाह जलालुुुुुद्दीन अकबर (भाग-7) दूसरी तरफ अब्‍दुल्‍लाह अजबक को जब खबर हुई कि अकबर को उसके खिलाफ कर दिया गया है और अकबर एक लश्‍कर लेकर उसकी तरफ आ रहा है तब भी अब्‍दुल्‍लाह अकबर से टकराना नहीं चाहता था । उसने इरादा किया कि वो बचकर गुजरात की तरफ भाग जाएगा । अब्‍दुल्‍लाह जब लवानी पहुंचा तो अकबर से उसका सामना हो गया । अकबर ने उस पर हमला कर दिया लेकिन अब्‍दुल्‍लाह किसी तरह जान बचाकर गुजरात भाग गया इस तरह अकबर ने आगे बढ़कर अपने लश्‍कर के साथ मांडू के मकाम पर कयाम किया और मालवा का इं‍तिजाम अपने हाथ में ले लिया।   यहां अकबर को पता चला कि खानदेश का हुक्‍मरां मुबारक शाह की एक बेटी है जो बहुत ही खूबसूरत है । अकबर ने उसके नाम एक पैगाम भेजा कि वो अपनी बेटी की शादी अकबर से कर दे। खानदेश का हुक्‍मरां मुबारक शाह इस पर राजी हो गया और अपनी बेटी को अकबर के निकाह में दे दिया। उसके बाद अकबर आगरा की तरफ लौट आया उसने आगरा के किले को नये तरीके से बनाने का इरादा किया उसने हुक्‍म दिया कि पुरानी ईंटों के इस किले को गिराकर नया किला बनाया जाए किले को बनाने में बड़े बड़े मजबूत पत्‍थरों का इस...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-6]

मुगल बादशाह जलालुुुुुद्दीन अकबर (भाग-6) रानी दुर्गावती को जब खबर हुई कि अकबर का सालार आसफ खान उस पर हमला करने के लिए आ रहा है तब वो अपने मरकजी शहर चूड़ गढ़ से निकली जबलपुर के पास गढ़ और मंडल  के बीच रानी दुर्गावती और आसफ खान के बीच टकराव हुआ दोनों लश्‍कर बुरी तरह एक दूसरे पर टूट पड़े थे। रानी दुर्गावती के बेटे राजा भीर नारायण की बदकिस्‍मी कि जंग के शुरू में ही भीर नारायण जख्‍मी हो गया और रानी ने उसे पीछे की तरफ भेज दिया। उसके बाद जब मुसलमानों की तरफ से तेज तीर बरसाए गये तब रानी की बदकिस्‍मती कि उसे दो तीर ऐसे लगे कि वो बुरी तरह जख्‍मी हो गई रानी के लश्‍करियों ने जब देखा कि उनका राजा भीर नारायण जख्‍मी होकर पहले ही पीछे जा चुका है और रानी भी बुरी तरह जख्‍मी हुई है तो उन्‍होंने लड़ाई बंद कर दी और हार मानकर भाग गये। रानी ने जब देखा कि उसकी फौज को शिकस्‍त हुई है उसके सिपाही अपनी जान बचाकर भाग गये हैं तो उसे खतरा नजर आया कि मुसलमान उसे गिरफ्तार कर लेंगे इसलिये  कि वो सख्‍त जख्‍मी थी और वो भाग नहीं सकती थी इसलिए उसने अपना खंजर निकाला और अपने पेट में घोंप कर अपना खात्‍मा कर लिया...

Mughal Badshah Jalal ud-din Akbar [part-5]

मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-5) रख दिया बाकी अपनी जान बचाकर भाग गये । इस लड़ाई में देवंद दास भी बुरी तरह जख्‍मी हुआ और उसी हालत में मर गया । इस तरह अकबर के लश्‍कर ने जोधपुर के किले मेरठ पर कब्‍जा कर लिया था । अब अकबर ने एक लश्‍कर अपने सालार अधम खान और पीर मोहम्‍मद की निगरानी में मालवा पर हमला करने के लिए रवाना किया । मालवा का हुक्‍मरां उन दिनों बाज बहादुर था जो हर वक्‍त ऐश और शराब में मस्‍त रहता था अपने आस पास उसने नाचने गाने वालीयों को जमा कर रखा था। सारंगपुर के मकाम पर अधम खान और पीर मोहम्‍मद के लश्‍कर का टकराव मालवा के हुक्‍मरां बाज बहादुर से हुआ जिसमें बाज बहादुर को बदतरीन शिकस्‍त हुई और वो भाग गया । इस तरह मालवा पर मुगलों का कब्‍जा हो गया। मालवा में अधम खान ने बड़े जुल्‍म किये। बाज बहादुर ने अपने महल में जो गाने वालीयां   जमा कर रखी थी उन पर जुल्‍म करने के साथ साथ उनका कत्‍ल भी किया उस वक्‍त तक अकबर ने उसे मालवा का हाकिम बना दिया था और पीर मोहम्‍मद को उसका नायब बना दिया था। लेकिन जब अकबर को पता चला कि मालवा में अधम खान ने बड़े जुल्‍म ढाये हैं तो उसने अधम खान को मालवा...