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Showing posts from October, 2020
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

लुकमान हकीम की समझदारी

लुकमान हकीम की समझदारी   कहते हैं कि जब लुकमान हकीम पढ़ कर फारिग हो चुके तो उस्‍ताद ने कहा। लुकमान !   आज एक बकरा जिबह करो और उसमें से जो सबसे अच्‍छी चीज समझो हमारे लिये   पका लाओ। लुकमान हकीम ने बकरा हलाल करके उसके दिल और जबान को खूब अच्‍छे मसालों के साथ भून भान कर उस्‍ताद के सामने रख दिया। उस्‍ताद ने चखा तो तो तारीफ करके कहा। लुकमान आज तुम आधे पास हो गये हो। दूसरे दिन उस्‍ताद ने फरमाया। आज फिर एक बकरा जिबह करो और उसमें से सबसे बुरी चीज हो , वो हमारे लिये तैयार कर लाओ। उन्‍होंने बकरा जिबह करके अब भी पहले की तरह दिल और जबान को चुन लिया। मगर अब के इस तरकीब से पकाई कि जबान मीठी पकाई और दिल कड़वा। और फिर दोनों को मिलाकर उस्‍ताद के सामने रखा तो बद मजा पाकर पूछा लुकमान ! आज क्‍या पका लाए ? लुकमान ने अर्ज की। हुजूर !   वही दिल और जबान जो आपस में एक जैसी नहीं । उस्‍ताद ने फरमाया। जाओ अब तुम बिल्‍कुल पास हो गये। हकीम लुकमान ने दोनों बार कैसी अच्‍छी चीज   चुनी । सचमुच एक जैसे दिन और जबान से बढ़कर कोई नेअमत नहीं और न एक दूसरे   से मुखालिफ दिल और जबान स...

Dahej prtha

दहेज प्रथा एक अभिाशाप भारत की आधी आबादी महिला सशक्तिकरण और मुक्ति की परिभाषा गढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। परंतु पुरूष प्रधान समाज की सरजमीन पर आज भी औरतों के हक में बने सरकारी कानूनों को न तो सही तरीके से अमल में लाया गया है और न ही उन पर सामाजिक अनुमति की मुहर लगी है। बिहार के सुशासन में महिलाओं को पंचायत चुनावों में पचास फीसदी आरक्षण देकर नीतीश कुमार की सरकार ने अच्‍छी पहल की है। लेकिन यदि महिलाओं से संबंधित दहेज निषेध अधिनियम बाल विवाह अधिनियम आदि संबंधित कानूनों को तत्‍परता से लागू नहीं किया गया तो बिहार का हाल पंजाब जैसा हो जाएगा।  कहा जाता है कि पंजाब राज्‍य में हर उस गांव को पुरस्‍कार दिया जाता है जो प्रत्‍येक एक हजार की आबादी पर नौ सौ पचास लड़कियों को जन्‍म देता है। साल 2001 में हुई भारत जनगणना के मुताबिक बिहार में प्रत्‍येक एक हजार पुरूष जनसंख्‍या पर नौ सौ इक्‍कीस औरतें हैं। बिहार में कई ऐसे परिवार है जो सोचते है कि लड़कियों जन्‍म एक अभिशाप है कि और उनके पैदा होने से जीवन की कमाई का एक बड़ा हिस्‍सा गायब ही हो जाता है। हाल में ही एक महिला आईपीएस अधिकारी ने टिप्‍पणी  ...

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-59

  हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-59 अलाउलमलिक हजरत निजामुद्दीन का मुरीद था अलाउलमलिक के आदमी को मुझसे क्‍या काम हो सकता है ? मैंने सैयद मोहम्‍मद के खादिम से पूछा। मैं क्‍या बता सकता हूं ? मलीह ने ला इल्‍मी का इजहार करते हुए कहा। मैं कुछ देर तक सोचता रहा फिर मलीह से कहा कि कोतवाल साहब के आदमी को अंदर बुला लो जब वो शख्‍स अंदर आया तो मुझे यूं महसूस हुआ कि जैसे कोई ना मालूम खतरा बहुत तेजी से मेरी तरफ बढ़ रहा है । मैं कोतवाल अलाउलमिलक साहिब का नाइब हूं उस शख्‍स की आवाज में   गरज थी और लहजा   तेज था जैसे वो अपने किसी दुश्‍मन से बात कर रहा हो। मैंने अलउलमलिक के नाइब की तरफ गौर से देखा   वो हथियार बांधे हुए   था उसकी लम्‍बी दाढ़ी थी और चेहरे से खूंख्‍वारी बरस रही थी । आपको मुझसे क्‍या काम है ? मैंने नर्म लहजे में पूछा और मैं एसा करने के मजबूर था । उसने मुझे गहरी नजरों से देखा जैसे वो किसी मुज्रिम को तलाशी ले रहा हो तुम से जो सवाल किया जाए उसका सहीह जबाब देना वो गर्जा। मुझे झूठ बोलने की आदत नहीं है मैंने भी हिम्‍मत से काम लिया। क्‍या तुम्‍हारा नाम ही म...

Save water save life

 जल बचाओ जीवन बचाओ जल हमारे शरीर और जीवन की बुनियादी आवश्‍यकता है। जल को सभी जीवित प्राणियों के लिए एक महत्‍वपूर्ण तत्‍व के रूप में भी जाना जाता है और इस वजह से उसे ‘ जीवन ’ के रूप में भी नामांकित किया गया है। इस धरती पर जल के बिना की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती। धरती के तीन- चौथाई हिस्‍से में जल है किंतु इसमें से सिर्फ 2 प्रतिशत ही हमारे लिए उपयोगी है। भारत में कुछ स्‍थानों पर लोग जल की कमी और सूखे के हालात का सामना करते हैं , जबकि अन्‍य स्‍थानों पर रह रहे हैं अत्‍यधिक जल उपलब्‍ध है , उन्‍हें जल का महत्‍व एवं जल संरक्षण के महत्‍व का एहसास होना चाहिए।  हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब हमें स्‍वच्‍छ जल बचाने एवं इसे हमारे जरूरत के हिसाब से खर्च करने की आवश्‍यकता है। भारत एवं अन्‍य देशों के कई स्‍थानों में लोग जल की अत्‍यधिक कमी से जूझ रहे हैं। वे सरकार द्वारा टैंकों से की जा रही जल की आपूर्ति या लंबी दूरी पर स्थित कुछ प्राकृतिक जलाशयों पर निर्भर रहते हैं । वे   जल की व्‍यवस्‍था करने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। जल की कमी की स्थिति उन लोगों के लिए और भी दयनीय है जिनके पास ...

ईमानदार किसान

ईमानदार   किसान     एक किसान के खेत में किसी अमीर के घोड़े घुस गये। जिन्‍होंने कुछ तो रोंदकर और कुछ चरकर खेत को खराब कर दिया।   किसान गुस्‍से से भरा हुआ अमीर के पास पहुंचा और कहा कि आपके घोड़ों ने मेरा खेत तबाह कर दिया। अमीर ने कहा। तुम्‍हारे ख्‍याल में कितना नुकसान हुआ होगा ? किसान ने कहा पचास रूपिये(50) का। अमीर ने उसी वक्‍त किसान को पचास रूपये (50) देकर कहा। अगर नुकसान कुछ ज्‍यादा हुआ हो तो फिर सोच लेना। मैं ज्‍यादा देने को भी तैयार हूं। किसान पचास रूपये(50) लेकर घर आ गया। लेकिन खेत पककर पहले से भी ज्‍यादा कीमत पर बिक गया। जिस पर ईमानदार किसान ने अमीर के पास पचास रूपये(50) ले जाकर कहा। जनाब -ए- आली मुझे नुकसान की जगह कुछ लाभ भी हो गया है। अब आप अपने रूपये   वापस ले लें। ये सुनकर अमीर ने उन पचास रूपयों(50) के साथ पचास ही और मिलाकर किसान को पूरे सौ रूपये(100) दे दिये और कहा। ये नुकसान का बदला नहीं , तुम्‍हारी ईमानदारी का इनआम है।   शौक से ले जाओ और इसी तरह हमेशा सच्‍चाई पर कायम रहो।  

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-58

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-58 हजरत अमीर खुसरू ने   अर्ज किया मैं बच्‍चों की तालीम तरबियत के लिये एक मुख्‍तसर किताब तहरीर कर रहा हूं जिसका नाम ’ खालिक बारी ’ तजवीज किया गया है    उस किताब का कुछ हिस्‍सा सुनाओ हजरत निजामुद्दीन औलिया ने हजरत अमीर खुसरू को हुक्‍म दिया हजरत अमीर खुसरू ने अपनी इस मुनफरिद किताब ‘ खालिक बारी ’   के कुछ अश्‍आर पीरो मुर्शिद को सुनाए हजरत महबूब इलाही ने उन अश्‍आर को पसंद करते हुए इर्शाद फरमाया ये बहुत मुफीद चीज है मगर हिन्‍दी जबान मैं ऐसे अश्‍आर भी लिखो जिन्‍हें लोग गाया करें। इसके बाद हजरत शेख ने दूसरे लोगों को मुखातिब करते हुए फरमाया आज कल हमारी फारसी और खुसरू की तुर्क जबान के साथ हिन्‍दुओं की बोल चाल के बहुत से अल्‍फाज मिल गये हैं और अब लोग अपने घरों और म‍हफिलों में भी हिन्‍दी अल्‍फाज इस्‍तेमाल करने लगे हैं लेकिन बहुत से हजरात ऐसे भी हैं जो फारसी और तुर्की की जबानों में हिन्‍दी की मिलावट नहीं होगा कि वो जिद छोड़ दें और अपना मकसद हासिल करने के लिये हिन्‍दी बोल चाल को बढ़ावा दें। महेन्‍द्र देव के बयान किये हुए   इस वाक्‍ये से ...

जैविक भोजन पदार्थ आज की आवश्‍यकता

 जैविक भोजन पदार्थ  आज की आवश्‍यकता जैविक भोज्‍य पदार्थ वे भोज्‍य पदार्थ हैं जो कुछ तय मानकों द्वारा उत्‍पादित किए जाते हैं।यह मानक विश्‍व भर में अलग-अलग हो सकते हैं पर विश्‍व भर में मुख्‍यत: यह बिना कीटनाशकों और रासायनिक खाद के उगाए जाते हैं। सामान्‍य तौर पर , जैविक खेती के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाता है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जाता है। जैविक भोज्‍य पदार्थ या तो प्राकृतिक तैर - तरीकों से बिना रासायनिक उर्परकों द्वारा उगाये जाते हैं या फिर वह जैविक तरीके से उगाये गये भोज्‍य पदार्थ से फायदे पता चले है तब से इनकी मांग में काफी जोर देखने को मिला है। जैविक भोज्‍य पदार्थ किसी भी तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्‍त होते हैं इनकें कम्‍पोस्‍ट खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों तथा जैविक उर्वरकों का ही उपयोग किया जाता है। भारत में जैविक भोज्‍य पदार्थ के रूप में बेचे जाने वाले किसी भी भोज्‍य पदर्थ को राष्‍टीय जैविक भोज्‍य पदर्थ उत्‍पादनके मानकों पर खरा उतरना होता है जो कृषि एवं संसाधित भोज्‍य उत्‍पाद निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित किय...

लालची की आदमी

लालची की आदमी   एक गरीब आदमी के मकान की छत टूट गई थी और वो उस पर घास फूंस बिछा रहा था कि इत्तिफाक से एक सखी अमीर भी उधर आ निकला और कहा। भले आदमी ! इस घास फूस से क्‍या बारिश रूकेगी। पक्‍की छत बनवा लो तो टपकने का खतरा नहीं रहेगा। गरीब ने जवाब दिया जनाब ! आपका कहना बेशक सही है और मैं भी जानता हूं। मगर हुजूर ! मेरे पास पक्‍की छत बनवाने के लिये पैसे नहीं हैं। अमीर ने पूछा पक्‍की छत पर क्‍या खर्चा आयेगा ? गरीब आदमी ने जवाब दिया जनाब ! डेढ़ सौ रूपये(150)   तो लग ही जाएंगे। ये सुनकर अमीर ने जल्‍दी से जेब में से डेढ़ सौ रूपये (150) निकाले और उस गरीब को दे दिये कि जाओ इससे अपना काम पूरा करो। जब अमीर नोट देरक चला गया तो गरबी के पेट में चूहे दौड़ने लगे कि ये तो बड़ा सखी आदमी दौलतमंद था। अगर मैं पांच सौ रूपये (500) कह देता तो इतने ही दे जाता। मैंने गल्‍ती से कम कह दिये। ये सोचकर वो अमीर के मकान पर पहुंचा और कहने लगा। जनाब ! मैंने अंदाजे में गल्‍ती की थी। छत पर पांच सौ रूपये (500) का खर्च   आएगा। अमीर ने कहा। वो डेढ़ सौ रूपये(150)   कहां हैं ? गरीब ने नोट...

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-57

  हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-57 उस रात महेन्‍द्र देव हजरत ख्‍वाजा मोहम्‍मद का मेहमान था खाने से फारिग होने के बाद उसने मोहम्‍मद से अर्ज किया आज मैंने अपनी आंखों से   हजरत शेख की कई करामात देखीं और उन करामात का तअल्‍लुक हम दोनों की जात से था महेन्‍द्र देव ने दुकानदार की तरफ इशारा करते हुए कहा मेरी दरख्‍वास्‍त है कि आप हजरत शेख की कोई और करामत बयान फरमाएं हजरत ख्‍वाजा सैयद मोहम्‍मद ने निहायत पुरसोज लहजे में फरमाया मैं हजरत शेख की किस किस करामात का जिक्र करूं ? आपकी जिंदगी   हर काम और दिन और रात का हर लम्‍हा करामतहै ‘ हजरत ख्‍वाजा   सैयद मोहम्‍मद ने इख्तिसार से काम लिया महेन्‍द्र देव चूंकि गैर मुस्लिम था , इसलिये आपकी बात का मतलब नहीं समझ सका और बराबर करामत के बारे में पूछता रहा । आखिर हजरत ख्‍वाजा सैयद मोहम्‍मद ने एक वाक्‍या बयान करते हुए फरमाया उस रोज मैं भी हजरत शेख की मज्लिस में हाजिर था सैयदी दर्स दे रहे थे कि उसी दौरान एक शख्‍स दाखिल हुआ और खामोशी से एक गौशे में बैठ गया आगरचे   वो आदाब मज्लिस का लिहाज रखते हुए   खामोश बैठा था लेकिन उसके चेह...

George Washingto

जॉर्ज वाशिंगटन     एक शरीफ आदमी ने निहायत शौक से घर के पास एक छोटा सा बाग लगा रखा था जिसे वो हर   दिन अपने हाथ से सींचता। एक दिन वो कहीं बाहर गया हुआ था कि उसका लड़का हाथ में आरी लिये हुए बाग की सैर को निकला और उसने आरी को आजमाते आजमाते सबसे अच्‍छा पेड़े काट दिया। शाम को बाप ने आकर बाग को देखा तो उसे पेड़ को कटा हुआ देखकर बहुत गुस्‍सा हुआ हर एक से पूछने लगा कि ये पेड़ किसने काटा है। इतने में बेटा भी आ गया। बाप ने उससे पूछा तो उसने साफ कह दिया। आप नाराज तो होंगे मगर मैं झूठ नहीं बोलूंगा ये पेड़ मैंने ही काटा है। बाग का शौकीन बाप इतना गुस्‍सा हो रहा था   लेकिन बेटे की सच्‍चाई देखकर उसने खुशी से अपने बेटे को गोद में उठा लिया और कहा। बेटा मुझे तुम्‍हारी सच्‍चाई से इतनी खुशी हुई कि पेड़ कट जाने का दुख: इसके सामने कोई चीज नहीं। शाबाश !   इसी तरह हमेशा सच बोला करना।   बाप के इस माफ कर देने   और शाबाश देने का लड़के पर इतना असर हुआ कि उसने   उम्र भर फिर कभी झूठ नहीं बोला।   उसकी सच्‍चाई सारे शहर में मश्‍हूर हो गई। उस लड़के का नाम जार्ज...

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-56

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-56 दुकानदार हंस कर कहने लगा मैं साफ और खरा आदमी हूं तुम मुसाफिर अजनबी हो सबसे बढ़कर   ये कि मुसलमान हुकूमत के जिम्मि हो इसलिये मैंने तुम्‍हें बुराई से बचाना जरूरी समझा जिम्मि का मतलब क्‍या होता है ? जिसकी हिफाजत मुसलमान हुकुमत के जिम्‍मे हो , उसे इस्‍लामी शरीअत में जिम्‍मी   कहते हैं , मैं भी इस्‍लामी हुकूमत का एक फर्द हूं और तमाम हिन्‍दूओं को जिम्‍मी समझता हूं इसलिये तुम्‍हारी हिफाजत करना मेरा फर्ज है। मुझे तुम्‍हारे इस ख्‍याल से बहुत खुशी हुई मैंने दुकानदार की बात सुनकर कहा तुमने मुझे लफ्ज जिम्‍मी का मफहूम समझाया मैं भी शुक्रगुजारी के तौर पर तुम्‍हें एक गुनाह से बचाना चाहता हूं जिसमें तुम अनजाने में   मुब्तिला हो गये हो तुम आज ही मेरे साथ हजरत निजामुद्दीन औलिया की खानकाह चलो। वो राजी हो गया जब हम दोनों खानकाह में दाखिल हुए तो वहां आम दिनों से ज्‍यादा हुजुम था मजिलस में कोई जगह खाली नहीं थी मजबूरन मैं सबसे पीछे बैठ गया मगर वो दुकानदार हाजिरीन की सफों को चीरता हुआ और हजरत शेख निजामुद्दीन औलिया के करीब पहुंचा और निहायत बे अदबी का मुज...