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Showing posts from August, 2019
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

EK THI MAANO

एक थी मानो  एक थी मानो बिल्ली जो किसी की चहेती न थी- उसने शहर के एक कबाड़खाने में आँखे खोली और फिर अपनी माँ और अपने दूसरे बहन भाइयों के साथ मुख्तलिफ  जगहों की तब्दीली के बाद एक कसाब की दुकान के पास गंदे नाले के पास रहने लगी।  वो जरा बड़ी हुई तो उसकी बहन रानो बिल्ली को एक बहुत प्यारी सी बच्ची एक बड़ी सी गाड़ी में बैठाकर ले गई और उसका भाई शानि बिल्ला एक खूंखार कुत्ते के हाथों दुनिया से रुखसत हो गया।  वो जरा बड़ी हुई तो उसकी माँ उसे छोड़ कर चली गई- मानो बिल्ली कई बार अपनी माँ के पास गई शायद उसे पहचान ले लेकिन वो उसे हमेशा अजनबी बनकर मिलती और मार पीट कर भगा देती - मानो बिल्ली ने भी आहिस्ता आहिस्ता अपनी माँ को भुला दिया और यूं ही  गलियों में आवारा फिरने लगी - एक दिन अचानक उसने अपनी बहन रानो बिल्ली की देखा जो एक बहुत बड़े से लान में घांस पर बैठी दूध पी रही थी - मानो बिल्ली ने उसे पुकारा लेकिन उसने भी बहन को पहचानने से इंकार कर दिया और उसे अपने घर से निकाल दिया  - मानो बिल्ली का दिल टूट गया वो बाहर निकली तो एक बहुत गंदे बच्चे ने निशाना लेकर एक पत्थर...

ALI BABA KI SAFAR -E- HAJ KI RAWANGI

अली बाबा की सफर हज की रवानगी  रवानगी का वक़्त आ पहुंचा  अली ने अपने दोस्त शकील को अलविदा कहा और हाजियों के काफले के साथ बगदाद से रवाना हो गया उसने अपने साथ वो सामान भी ले लिया जिसका मक्का में बेंचने का इरादा था।  हाजियों का वो काफिला मक्का की तरफ रवाना हो गया मंजिलें ते करता हुआ आखिर अल्लाह के घर काबा में पहुंच गया जब बाबा हज से फारिग हुआ तो उसने अपना कीमती और उम्दा सामान बेंचना शुरू किया जो वो अपने साथ बगदाद से लाया था और साथ ही वो मक्का से दूसरा सामान भी खरीदने लगा।   उस दौरान दो ताजिर आये और उसका सामान बड़े गौर से देखने लगे उन्हें ये सामान बहुत पसंद आया सामान की नफासत देखते हुए एक ताजिर अपने दूसरे साथी से कहने लगा  अगर ये बूढ़ा ताजिर अपना ये उम्दा और नफीस सामान काहिरा ले जाकर बेंचे तो उसे उस माल की  दुगनी नहीं बल्कि चार गुणा ज्यादा मिलेगी।  अली बाबा ने जब दोनों ताजिरों की गुफ्तगू सुनी तो उसने काहिरा जाने का इरादा किया ताकि वहां जाकर अपना सामान मंहंगे दामों में बेंच कर मुनाफा  कमा सके।  बाबा अपने शहर बगदाद में देखा करता था क...

CHOTE CHOTE DAANE

छोटे छोटे दाने  किसी जंगल में एक नन्ही चींटी और उसकी बूढ़ी माँ रहती थी  नन्ही चींटी की माँ जब तक सेहतमंद थी अपने और नन्ही चींटी के लिए मजेदार दाने लाती लेकिन जब उसकी माँ बीमार और बूढ़ी हो गई तो दाना लाने की जिम्मेदारी नन्ही चींटी पर आ गई।  उसकी माँ ने उसे समझाया था की बरसात से पहले पहले बहुत सारा दाना जमा करना जरूरी है ताकि सर्दियों में आराम रहे और खुराक भी आसानी से मिलती रहे नन्ही ने पहले दिन बहुत मेहनत की और बहुत दूर से चंद दाने घर तक ले जा सकी और दाने लाने से इंकार कर दिया।  उसकी माँ ने फ़िक्रमंद लहजे में कहा।  नन्ही ! सिर्फ चंद दानो से तो कुछ न होगा आखिर हम सर्दियों में अपना पेट कैसे भरेंगे इस वक़्त खुराक बिलकुल गायब होगी।  नन्ही ने कहा ये बहुत मुश्किल काम है मैं तो सिर्फ चंद दाने ला सकती हूँ इससे ज्यादा नहीं - ये कहकर नन्ही सो गई।  अगले दिन फिर दानो की तलाश में निकल पड़ी उसने सोचा की अब बड़े बड़े दाने अपने घर में जमा करूंगी उसे एक दरख़्त के करीब बहुत सी चूंटियाँ नजर आईं   जब वो दरख़्त के करीब पहंची तो वहां रोटी के बेशुमार टुकड़े पड़े...

BAGDAAD KA TAAZIR AUR ALI BABA

बगदाद का तज़िर और अली बाबा  अली बाबा का ख्वाब  खलीफा हारुन रशीद के ज़माने में बगदाद शहर में एक बड़ा ताजिर रहता था उस ताजिर का नाम अली बाबा था अली बाबा न तो बहुत मालदार था और न ही बहुत गरीब अली बाबा की न तो कोई बीवी था और न ही कोई औलाद अली बाबा अपने बाप के तरफ से मिले विरसे के मकान में रहता था बाबा उन हालात में बहुत राजी ख़ुशी से जिंदगी  बसर कर था।  एक रात ताजिर अली बाबा गहरी नींद सो रहा था उसने एक अजीबो गरीब ख्वाब देखा  एक बड़े ही बा रोअब चेहरे वाला  बुजुर्ग गुस्से की हालत में कह रहा है, अली बाबा तुम इस शहर से से चले जाओ और इस वक़्त हाजिओं के साथ मक्का मुज्जिमा की तरफ रवाना हो जाओ देखो अली बाबा तुम मेरी बात पर अमल करने में सुस्ती मत करना।  अली बाबा ने दूसरी और तीसरी रात भी यही खुआब देखा उस बुजुर्ग ने उसे एक ही तरह का अंदाज बनाते हुए बार बार  उसे बगदाद शहर छोड़  जाने को कहा सुबह हुई तो अली बाबा घबराया हुआ नींद से बेदार हुआ  उसने ख्वाब में जो कुछ देखा था उसकी वजह से उसको बेचैनी हैरत और घबराहट हो रही थी बाबा एक नेक मुस्लमान था इस ...

ALLAH DEKH RAHA HAI

अल्लाह देख रहा है  एक बार का जिक्र है की गांव में एक शख्स रहता था उसका  नाम अब्दुर्रहमान था  उसके तीन बेटे थे और तीनों अपने वालिद से बहुत मुहब्बत करते थे  अब्दुर्रहमान भी अपने बच्चों से बहुत मुहब्बत करता था  एक मर्तबा अब्दुर्रहमान में अपने तीनों बेटों को बुलाकर एक -एक सेब दिया और कहा इस सेब को ऐसी जगह जाकर खाओ जहां तुम्हे कोई न देख रहा हो जो ऐसा करने में कामियाब होगा में उसको इनाम दूँगा  तीनो बेटे वालिद को अल्लाह हाफिज कहकर और उनकी दुआएं लेकर घर से निकले  दूसरे दिन अब्दुर्रहमान ने फिर अपने बेटों को बुलाया और बारी -बारी से पूछा सबसे पहले बड़े बेटे अब्दुल्लाह से पूछा  क्या तुम ऐसी जगह खाने में कामियाब हो गए जहां तुम्हे कोई न देख रहा हो ? अब्दुल्लाह ने जवाब दिया अल्हम्दुलिल्लाह मैंने वो सेब एक दरख़्त के पीछे जाकर खाया वहां मुझे कोई नहीं देख रहा था। फिर अब्दुर्रहमान ने दूसरे बेटे यूसुफ़ से पूछा तुम बताओ तुमने क्या किया ? यूसुफ़ ने कहा अब्बाजान मैने वो सेब कमरे में बंद हो कर अँधेरा करके खाया वहां मुझे किसी ने नहीं देखा   ...

24 AUGUST AAJ KA ITIHAS

 24 अगस्त आज का इतिहास  विश्व की प्रमुख घटनाएं  1815 - नीदरलैंड के आधुनिक संविधान पर हस्ताक्षर  किये थे।  1816  -सेंट लुईस की संधि पर मिसौरी में हस्ताक्षर किए गए।   1820 - ओपोतो  , पुर्तगाल में संविधानिक विद्रोह शुरू हुआ।  1870 वोलसेली अभियान लाल नदी विद्रोह को समाप्त करने के लिए मरितोबा पहुंचे।   1936 - ऑस्ट्रेलिया अंटार्टिका इलाक़े की स्थापना की।  1944 - दूसरे विश्व युद्ध : मित्र राष्ट्रों ने पेरिस पर हमला किया था।  1950 - संयुक्त राष्ट्र के लिए एडिम सैम्पसन पहला काला अमेरिकी प्रतिनिधि बन गया था।  1981 - जॉन लेनन की हत्या के लिए मार्क डेविड चैपलेन को जेल में 20 साल की सजा सुनाई गई।  1991 - यूक्रेन ने सोवियत संघ से खुद को स्वतन्त्र घोषित कर लिया था. 2008 - पेइचिंग ओलम्पिक का समापन जिसमे चीन 51 गोल्ड मैडल के साथ शीर्ष पर रहा था।  24 अगस्त को जन्मे व्यक्ति  1833 - गुजराती भाषा के युग प्रवर्तक माने जाने वाले रचनाकार नर्मद का जन्म हुआ।  1888 - भारत के प्रसिद्ध...

23 AUGUST AAJ KA ITIHAS

23 अगस्त  का इतिहास  1456 - जर्मनी के योहानेस गुटेनबर्ग ने आधुनिक ढंग से दुनिया के पहले छापाखाने से बाइबिल की पहली  प्रति छापी जो गुटेनबर्ग बइबिल के नाम से प्रसिद्ध हुई। 1914 - प्रथम विश्व युद्ध में जापान ने जर्मनी पर युद्ध की एलान किया। 1942 - दूसरे विश्व युद्ध स्टेलिनिगराद  की लड़ाई की शुरुआत हुई। 1947 - यूनान के राष्ट्रपति दिमित्रियो मैक्सिमोज ने त्याग पत्र दिया था। 1958 - चीनी गृह युद्ध : दूसरा ताइवान स्ट्रेट संकट पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के बमबारी के साथ शुरू हुआ। 1975 - पोंटियाक में पोंटियाक सिल्वरडोम खोला गया। 1990 - अर्मेनिया ने सोवियत संघ से अपनी आजादी का एलान किया था। 1990 - पश्चिम और पूरब जर्मनी ने एलान किया की वे 3 अक्टूबर को फिर मिलेंगे।  1991 - द वर्ल्ड वाइड वेब जनता के उपयोग के लिए लांच किया गया। 2000 - खाड़ी एयर फिलाइट 072 मनामा , बहरीन के पास फारस की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त होने                            143 लोगों की मौत हो गई थी।  2001 - पूनिया हत्याका...

22 AUGUST AAJ KA ITIHAS

22 अगस्त  विश्व की घटनाएं  1827 -जैसे दे ला मार पेरू के राष्ट्रपति बने थे। 1851- ऑस्ट्रेलिया में सोने के इलाक़ों की खोज हुई थी। 1902 - कैडिलेक मोटर कंपनी की स्थापना हुई थी। 1934 -ऑस्ट्रेलिया के बिल वुडफुल एसेज कप को दो बार हासिल करने वाले ,एक मात्र क्रकेटर बने। 1953 -डेविड द्वीप पर दंड कॉलोनी स्थाई रूप से बंद हो गई थी। 2012 - केन्या की ताना नदी जिले में मवेशी के लिए चरागाह अधिकारों पर जातीय संघर्ष के के कारण 52 से अधिक मौतें हुईं थीं। 1969 - अमेरिका में समुद्र में तूफ़ान आने से 255  लोगों की मौत हुई थी। 1904 -चीनी नेता डेंग जियो पिंग  का जन्म हुआ था. 1964 - मैट्स विलेंडर का जन्म हुआ।  भारत की घटनाएं  1921 -राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। 1979 - राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने लोकसभा भंग की थी। 1877 - भारत के प्रसिद्ध कलामर्मज तथा चिंतक आनंद कुमार स्वामी का जन्म हुआ था। 1919 - प्रसिद्ध कवि एवं नाटककार गिरिजाकुमार माथुर का जन्म हुआ था। 1924 - हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंगकार  हरी शंकर परसाई का जन्म हुआ था। 18...

21 AUGUST -AAJ KA ITIHAS

21 अगस्त का इतिहास  1901 -   600 अमेरिकी स्कूली शिक्षक  थोमसाइट्स , यूएसएटी थॉमस पर मनिला पहुंचे थे 1959 -  हवाई अमेरिका का 50 वा  राज्य बना था। 1972 -  भारत में वन्यजीव अधिनियम पारित किया गया था। 1983 -  फिलीफिन के विपक्षी नेता एक्विनो जूनियर की मनीला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हत्या की गई थी। 1988- भारत नेपाल सीमा पर आये तीर्व भूकंप से एक हजार लोगों की मौत हुई थी।  1871 -  भारत के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल कृष्ण देवधर का जन्म हुआ। 1922 -  अमेरिकी खजाना और मेल फिशर समुद्री विरासत संग्रालय के संस्थापक मेल फिशर का जन्म हुआ।      1986 - कैमरून में ज्वालामुखी झील न्योस से कॉर्बनडाईऑक्साइड  गैस के निकलने से 1800 लोग मारे गए थे 1993 - नासा ने मंगल ऑब्जर्ब अंतरिक्ष यान के साथ संपर्क खो दिया था। 2013 - सीरिया के घौटा में रासायनिक हमलों से सैंकड़ो लोगों की मौत हो गई  प्रसिद्ध लोगों की मौत  1978 - भारतीय अभिनेत्री भूमिका चावला का निधन हुआ। 1978 -भारत के महान क्रकेट खिलाड़ी वीनू मांकड़ का निधन हुआ...

AAZAD HINDUSTAN

लड़ाई का खात्मा और आज़ाद हिंदुस्तान  महात्मा गाँधी -प. नेहरू - मौलाना आज़ाद  अप्रैल (1945 ईस्वी ) में जर्मनी को शिकस्त हुई इटली पहले ही हर चूका था (1945 ईस्वी ) में जापान ने भी अमेरिका के एटम बम के सामने हथियार डाल दिए और इसी तरह कई बरस की खूंरेजी के बाद दूसरी लड़ाई भी ख़त्म हो गई अंग्रेज लड़ाई जीत तो गए मगर बे दम हो चुके थे छह साल की जंग ने उन्हें बेहद थका दिया था वो अब किसी दूसरी लड़ाई के लिए तैयार न थे आज़ाद हिन्द फौज का हाल सुन चुके हो उनकी मिसाल दूसरे फौजी जवानों को भी मुतास्सिर  कर रही थी अब अंग्रेजों को ये उम्मीद  न रह गई थी  की हिन्दुस्तानियों को गुलाम बनाये रखने में इनका हुक्म बजा लाते रहेंगे दूसरी तरफ ये नजर आ रहा था की हिंदुस्तानी आज़ादी के मुतालबे से पीछे नहीं हटेंगें (1942 ईस्वी ) की हिंदुस्तान छोड़ दो तहरीक का नतीजा सामने आ रहा था दुनिया के हालत भी आज़ादी के मुआफ़िक थे इसलिए अंग्रेज मजबूर हुए की हिन्दुस्तानियों से सुलह कर लें  गाँधी जी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ,पंडित जवाहर लाल नेहरू ,और दूसरे लीडर जेलों से रिहा किये   गये और स...

AZAD HIND FOJ

आजाद हिन्द फौज  सुभाष चंद्र बोस  मार्च (1942 ईस्वी ) में जापान ने बर्मा फतह कर लिया और उसके हवाई जहाज हिंदुस्तान तक पहुंचने लगे कलकत्ता और असम की सरहद पर बम्ब भी गिराये गए इस तरह लड़ाई हिंदुस्तान तक पहुंच गई बंगाल के नामवर लीडर सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजो की क़ैद से निकल कर मुल्क के बाहर चले गए बर्मा में उन्होंने बहुत से मुहिब्बे वतन नौजवानों की मदद से आजाद हिन्द फौज बनाई और आजाद हिन्द हुकूमत क़ायम की उन्होंने जापानी से समझौता कर लिया और फतह के बाद हिंदुस्तान की हुकूमत हिन्दुस्तानियों के हाथ में होगी। सुभाष बाबू की इन कोशिशों के साथ मुल्क के अंदर भी आज़ादी की जद्दो जहद तेज हो रही थी (अगस्त 1944 ईस्वी ) में कांग्रेस ने ये तजवीज मंजूर की अंग्रेज हिंदुस्तान खाली कर दें और जगह -जगह अग्रेजों हिंदुस्तान छोड़ो के नारे लगने लगे हुकूमत भी सख्ती पर तुल गई और तहरीक को कुचलने  जोर लगा दिया बड़े -बड़े लीडरों के अलावा लाखों वतन दोस्त हिंदुस्तानी भी गिरफ्तार हुए और हजारों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा मगर हिन्दुस्तानियों ने हिम्मत नहीं हारी और बराबर आज़ादी की लड़ाई लड़ते रहे और अंग्रेजों न...

POORI AAZADI KA MUTALBA

पूरी  आज़ादी का मुतालबा   उनकी इस रविश से नाराज होकर आठ सूबों की कोंग्रेसी वजारतों ने इस्तीफा दे दिया (1940 ईस्वी ) में राम गढ़ में मौलाना अबुलकलाम  आज़ाद की सदारत में कांग्रेस का सालाना जलसा हुआ इस जलसे में अंग्रेजों के तर्जे अमल के खिलाफ तजवीज मंजूर की गई और एलान किया गया की हिंदुस्तान मुकम्मल आज़ादी चाहता है जंग की वजह से अंग्रेजों की सख्तियां बढ़ गईं थीं इसीलिए किसी बड़ी मुख़लिफाना जद्दो जहद का मौक़ा न था मगर इसपर खामोश रहना भी मुनासिब न था इसलिए गाँधी जी के मशवरे  से इनफिरादी  सिविल नाफरमानी का सिलसिला शुरू हुआ किसी मजमे में कोई एक आदमी होकर जंग के खिलाफ तक़रीर करता या नारा लगाता तो गिरफ्तार हो जाता था इस तरह हजारों आदमी पकड़कर जेल में बंद कर दिए गए मगर आजादी का ज़ज्बा बढ़ता ही गया। नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है,  और चित्र गूगल से लिए गए हैं। 

DUSRI BARI LARAI

दूसरी बड़ी लड़ाई  दूसरी बरी लड़ाई  अभी नए कानून के मुताबिक़ सूबों में बा इख़्तियार हुकूमतें बने हुए दो ही साल हुए थे की यूरोप में एक नई लड़ाई छिड़ गई जो आगे चलकर इतनी बड़ी की सारी दुनिया इसकी लपेट में आ गई ये लड़ाई इतनी सख्त थी की लोग उसके मुक़ाबले में पहली बड़ी लड़ाई को भूल गए इस बार इटली और जापान की हुकूमतों ने जर्मनों का साथ दिया और अग्रेजों के साथ फ़्रांस, रूस, और अमेरिका की हुकूमतें थीं अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानियों को भी लड़ाई में शरीक कर लिया  उनकी ये बात हिन्दुस्तानियों को अच्छी नहीं लगी की सूबों की हुकूमतों ,मर्कजी असेम्ब्ली सियासी पार्टियों और क़ौमी रहनुमाओं से पूछे बगैर इतने बारे झगड़े में हिन्दुस्तानियों को डाल दिया लेकिन अग्रेजों ने इस नागवारी कोई परवाह नहीं की और फौजी ताक़त के जोर पर हिन्दुस्तानियों से आदमी और सामान मैदान -ए जंग में भेजा जाने लगे। नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है,  और चित्र गूगल से लिए गए हैं। 

AZADI KI KOSHISH

आजादी की कोशिश  इस लड़ाई में हिन्दुस्तानियो से आजादी का वादा किया जब ये वादा पूरा न हुआ तो सारे मुल्क में नाराजगी फैल गई इधर तुर्कों की तबाही से मुसलमान सख्त नाराज थे मुल्क के क़ौमी रहनुमाओं ने सारे मुल्क का दौरा किया हिन्दू व मुसलमनो में मेल हुआ गांव -गांव  कांग्रेस और खिलाफत कमेटियां बनीं और 'तुर्क मवालात ' की तहरीक ने अग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए हुकूमत ने पहले ताक़त से दबाने की कोशिश की लेकिन जब जोर बढ़ता ही गया तो कुछ नए इख़्तियारात दिए गए  जो  'मांटेंगो इस्लाहात ' के नाम से मशहूर हैं लेकिन ये तदबीर भी नाकाम रही (1340 हिजरी )(1921 ईस्वी) में चेम्सफोर्ड वापस गए और उनकी जगह लार्ड रेडिंग भेजे गए और मुल्क में तुर्क मवालात की तहरीक अब भी जारी थी लार्ड रेडिंग ने बड़ी सख्ती से काम लिया और छोटे बड़े तमाम लीडर गिरफ्तार कर लिए गए और क़ैदिओं से जेलें भर गईं मगर लोगों का जोश का अब भी बही हाल था आखिर वही पुराना हरबा काम आया (1342 हिजरी )(1923 ईस्वी ) में सुधि संगठन का किस्सा शुरू हुआ और हिन्दू मुसलमानों के पुरानी अदावतें फिर ताजा हो गईं ये तदबीर कामयाब हुई। लार्ड इरविन अप्रैल (...

BARI LARAAI

पहली बड़ी लड़ाई (पहला विश्व युद्ध ) पहली बड़ी लड़ाई  (1332 हिजरी )(1914 ईस्वी ) में यूरोप में बड़ी सख्त लड़ाई शुरू हुई जिसका असर सारी दुनिया तक पहुंचा  इस जंग में एक तरफ जर्मनी , ऑस्ट्रिया , और टर्की  वगैरा थे और दूसरी तरफ इंग्लिस्तान , फ़्रांस , इटली ,रूस ,अमेरिका और वगैरा थे लार्ड चेम्सफोर्ड  (1334 हिजरी )(1916 ईस्वी ) में लार्ड हार्डिंग की मुद्दत पूरी हुई और लार्ड चेम्सफोर्ड वायसराय मुक़र्रर हुआ उसके जमाने में लड़ाई की वजह से हिन्दुस्तानियों को मुतमईन रखने की बहुत कोशिश की गई , यहां तक की अगस्त (1325 हिजरी )(1917 ईस्वी ) में बा  इख़्तियार हुकूमत देने का वादा किया (1336 हिजरी )(1918 ईस्वी ) में जंग ख़त्म हुई जर्मनी और उसके साथियों को शिकस्त हुई और अंग्रेजों और उसके जो शर्तें चाही मनवा लीं तवाने जंग के अलावा जर्मनी की फौजी ताक़त बिल्कुल कम कर दी गई और उसके इलाक़ों में काट -छांट की गई टर्की के हिस्से बिखरे हो गए और सारी सल्तनत मुख्तलिफ लोगों में बाँट दी गई। नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है,  और चित्र गूगल से लिए गए हैं।...

ANGREJI HUKUMAT

अंग्रेजी हुकूमत  मलका विक्टोरिया  (1274 हिजरी )(1857 ईस्वी ) की इस हल चल के साथ ही कंपनी राज भी खत्म हो गया और इंग्लिस्तान की हुकूमत ने हिंदुस्तान का इन्तिजाम खुद अपने हाथ में ले लिया 1 नवंबर (1275 हिजरी )(1858 ईस्वी ) को इलाहबाद में एक बड़ा दरबार हुआ जिस में मलका विक्टोरिया की तरफ से आम माफ़ी का एलान किया गया और लोगों को इत्मीनान दिलाया गया की अब उनके साथ कोई ज्यादती नहीं की जाएगी। इस वक़्त तक हिंदुस्तान का सबसे बड़ा ओहदा गवर्नर जनरल कहलाता था जो पांच बरस के बाद बदल जाता था इतने अर्से में , 1. वारेन हेस्टिंग  2. कार्नवालिस  3. सरजानशोर  4. वेलिजली  5. सर जार्ज बार्लो  6. मिंटो 7. हेस्टंगज   8.  अम्हेरिस्ट  9. विलयम बेन्टिंग  10 .  सर चार्ल्स मैटकाफ  11. ऑकलैंड  12. एलनबरा  13. हार्डज 14. डलहौजी  15 केनिंग    15गवर्नर जनरल आये। कम्पनी की हुकूमत के साथ ये ओहदा भी बदला और गवर्नर जनरल को वायसराय (नायब शाह ) का लक़ब दिया गया  (1275 हिजरी )(1858 ईस्वी ) से इस वक़्त तक  1. लार्ड केनिंग ...

1857 KI HALCHAL

1857 की हलचल मेरठ छावनी  (1274 हिजरी )(1857ईस्वी ) में हिंदुस्तान ने फिर संभाला लिया और जो माद्दा अर्से से अंदर ही अंदर ही सुलग रहा था एक बार भड़क उठा , (10मई 1857 ) को मेरठ छावनी की जरा सी फौजी शिकायत ने आनन -फानन सरे मुल्क में हलचल मचा दी और ऐसा मालूम होने लगा बस अंग्रेजों का चल-चलाव है लेकिन पंजाब के सिक्ख और दूसरी रियासतें  इस जंग में शरीक नहीं हुईं बल्कि अंग्रेजों को पूरी मदद की इधर इन लड़ने वालों में कोई ऐसा सर धरा न था जो उनको संभाल सकता और क़ायदे से काम लेता देहली के लाल किले अबू जफर बहादुर शाह  में अबू जफर शाह के सर पर ताज रखा गया लेकिन ये रोग उनके बस के बाहर था नतीजा ये हुआ की साल ही भर के अंदर हिदुस्तानि सिपाहियों का जोर टूट गया उसके बड़े -बड़े सरदार मारे गए बहदुर शाह गिरफ्तार करके रंगून भेज दिए गये और लाल किले का आखरी चिराग भी गुल हो गया।   नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है।

SINDH -BRMA - AWADH

सिंध -बर्मा -अवध  बर्मा के राजा  (1260 हिजरी )(1844 ईस्वी ) में सिंध के अमीरों से लड़ाई छिड़ गई और खेर पुर के सिवा सरे मुल्क पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया (1268 हिजरी )(1852 ईस्वी ) में बर्मा के राजा से फिर जंग हुई पहली लड़ाई (1240 हिजरी )(1824 ईस्वी )में हुई अबकी भी राजा को शिकस्त हुई और आसाम का सूबा और बर्मा का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी सल्तनत में शामिल कर लिया गया फिर (1302 हिजरी )(1885 ईस्वी )में बाक़ी हिस्सा भी ले लिया गया और राजा गिरफ्तार करके हिंदुस्तान भेज दिया गया। अवध नवाब    वाजिद अली शाह (1274 हिजरी )(1857 ईस्वी )में इसी तरह बद इंतिज़ामी के नाम पर अवध पर भी कब्जा कर लिया गया और वाजिद अली शाह को 12 लाख पेंशन देकर कलकत्ता में नजरबंद कर दिया गया इस तरह 100 बरस के अंदर कश्मीर से रासकुमरी तक  और दर्रे खैबर से बर्मा तक अंग्रेजीं राज क़ायम हो गया। नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है।

PUNJAB PAR ANGREJON KA QABJA

पंजाब पर अंग्रेजों का कब्ज़ा  राजा रणजीत सिंह  अब कलकत्ता से देहली और मैसूर से हिमालिया की तराई तक सारा हिंदुस्तान अंग्रेजों के कब्जे में आ गया सिर्फ पंजाब में सिक्खों के आजाद रियासत रह गई थी जिसे राजा रणजीत सिंह ने मजबूत कर दिया था रणजीत सिंह ने किसी न किसी तरह इस रियासत को अंग्रेजों से बचाये रखा लेकिन (1260 हिजरी )(1839 ईस्वी ) उसके मरते ही मुल्क में ऐसी अब्तरि मची की छह बरस में आगे पीछे चार राजा गद्दी पर बैठे और मारे गए आखिर राजा दलीप सिंह  (1261हिजरी)(1845 ईस्वी ) राजा का एक छोटा लड़का दलीप सिंह तख़्त पर बैठाया गया लेकिन फौज  अब भी काबू से बहार थी आखिर अंग्रेजों से भिड़ ही गई नतीजा जाहिर था सिक्खो को शिकस्त हुई और दो ही तीन लड़ाई में अंग्रेजों ने आगे बढकर लाहौर पर कब्जा कर लिया मजबूरन कश्मीर का पूरा मुल्क पंजाब का एक बड़ा हिस्सा (सतलुज , और ब्यास का दोआब ) और डेढ़ करोड़ नक़द दे कर म तहति के इक़रार के साथ सुलह करनी पड़ी मगर इस सुलह के दो बरस भी पूरे न होने पाए थे की (1265 हिजरी )(1848 ईस्वी ) में फिर लड़ाई ठन गई सिक्ख बड़ी बहादुरी से लड़े लेकिन कामयाबी न हो सकी दलीप सि...

MESSOR

मैसूर  नवाब हैदर अली  मराठों के अलावा अंग्रेजों को मैसूर के हाकिम हैदर अली और उसके बेटे टीपू सुल्तान से सख्त मुक़ाबला करना पड़ा जिसका सिलसिला (1181 हिजरी )(1267 ईस्वी ) से (1214हिजरी )(1799 ईस्वी )तक पूरे बत्तीस बरस तक जारी रहा इस अर्से में मामूली छेड़ -छाड़  के अलावा चार बड़ी लड़ाईयाँ हुईं पहली जंग (1181 हिजरी )(1767 ईस्वी )में शुरू हुईं और (1183 हिजरी )(1769 ईस्वी ) तक जारी रही आखिर अंग्रेजों को दब कर सुलह करनी पड़ी , दूसरी लड़ाई (1194 हिजरी )(1780 ईस्वी ) में शुरू हुईं और (1198 हिजरी )(1784 ईस्वी )तक जारी रही इसमें कभी हैदर अली को फतह हुई कभी अंग्रेज जीते आखिर में बराबरी के साथ सुलह हुई इसी दर्मियान में (1196 हिजरी )(1782 ईस्वी )में  हैदर अली का इन्तिक़ाल हो गया टीपू सुल्तान . और टीपू सुल्तान गद्दी पर बैठा तीसरी लड़ाई (1205 हिजरी )(1790 ईस्वी )में शुरू हुई और (1207 हिजरी )(1792 ईस्वी ) तक जारी रही इस मर्तबा हैदराबाद और मराठो की फौजें भी अंग्रेजो के साथ थीं तकरीबन दो बरस तक जंग का सिलसिला जारी रहा आखिर (1207 हिजरी )(1792 ईस्वी ) में सुलह हुई इस मर्तबा टीपू बड़ा प...

MARHATE

मराठे  वारिन हेस्टिंगेज  (1181 हिजरी )(1767 ईस्वी ) में किलायू वापस इंग्लिस्तान  गया इसके बाद चार -पांच बरस वार्लिस्ट और कॉलेटर ने क़ायम मुक़ामी की आखिर (1886 हिजरी )(1772 ईस्वी ) में वारिन हेस्टंगगेज बंगाल का गवर्नर हुआ  जिसे (1188 हिजरी )(1774 ईस्वी ) में तरक़्क़ी देकर गवर्नर जनरल कर दिया गया ये भी कलाइयू  की तरह अंग्रेजी हुकूमत का बानी समझा जाता है उसके ज़माने में मराठों  से भी लड़ाई शुरू हो गई मराठों  की फौजी जिंदगी बीजपुर अहमद नगर से शुरू होती है शिवाजी के ज़माने में ये रंग और तेज हुआ लेकिन औरंगजेब की क़ुव्वत के सामने कामयाबी न हो सकी शिवाजी के बाद उसका लड़का संभा बाप का बारिस हुआ (1090 हिजरी )(1679 ईस्वी ) में लेकिन जल्दी ही गिरफ्तार हो कर मारा गया.संभा के बाद उसका लड़का साहू शाही अमीरों में शामिल कर लिया गया और औरगंजेब के दरबार में रहने लगा। संभा जी आगे चलकर यही साहू मुगलों की निगरानी में मराठों  का सरदार हुआ जैसे -जैसे मुग़ल कमजोर होते गए मराठों  की ताक़त बढ़ती गई यहां तक की वो सारे हिंदुस्तान की बादशाहत का  खुआब देखने लगे और अ...