Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2021
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-20]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-20) औरंगजेब ने कभी सरकारी खजाने से एक पाई भी न ली उसका मामूल था कि सुबह सवेरे उठकर नमाज अदा करता कुरआन मुकद्दस की तिलावत करता ।उसके बाद कुरआन मुकद्दस के नुस्‍खे अपने हाथ से तैयार करता उसका खाली वक्‍त इबादत में गुजरता उसके साथ औरंगजेब आलमगीर हाफिज कुरआन भी था 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे आराम करता था। शरीअत और हुजुर सललल्‍लाहु अलैहि वसल्‍लम का तरीका उसकी जिंदगी थीं । इतिहासकार लिखते हैं कि शरीअत ही औरंगजेब का लिबास था उसने अपनी पूरी जिंदगी एक दीनदार और पाकबाज इंसान की तरह गुजारी आम बादशाहों के उलट उसका जिंदगी जीने का तरीका ही सबसे अलग था। आखिरी दिनों में उसने अपने बेटे शहजादा आजम को एक खत लिखा जो उसके अच्‍छे किरदार को दिखाता उसने लिखा था। मेरी पैदाईश पर अनगिनत लोगों ने जश्‍न मनाया मगर मैं जब इस दुनिया से जा रहा हूं तो अकेला हूं। जिंदगी के मकसद बड़े होते हैं और मुझे उन लम्‍हों के बेकार जाने का सदमा है जो खुदा की इबादत और उसकी याद के बगैर गुजरे। काश मैं लोगों की खिदमत अपनी मंशा के मुताबिक कर सकता इसलिए कभी कभी एहसास होता है कि मेरी जिंदगी बे मकसद थी जो बेका...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-19]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-19) औरंगजेब बीमार था । उसकी तबियत बिगड़ी हुई थी। इसलिए अपने बेटे आजम खान की बातों में आते हुए अजीमुस्‍शान को पटना से वापस बुला लिया । इस बीच शहजादा आजम ने अपने भाई कामबख्‍श को किसी न किसी तरह मौत के घाट उतारना चाहा। आजम खान की हरकतों की औरंगजेब को भी खबर हो गई इसलिए बीमारी की हालत में भी औरंगजेब ने अपने एक सालार सुल्‍तान हसन को कामबख्‍श की हिफाजत में लगा दिया था। कहते हैं फरवरी 1707 ई. में औरंगजेब की हालत बहुत ज्‍यादा खराब हो गई लेकिन कुछ वक्‍त के लिए उसकी हालत में सुधार आ गया । औरंगजेब को एहसास था कि उसका आखिरी वक्‍त नजदीक आ गया है उसने अपनी मौत के बाद अपने बेटों को आपसी झगड़ों से बचाने के लिये हर मुमकिन कोशिश शुरू कर दी। उसने अपने बेटे कामबख्‍श को बीजापुर का गवर्नर बना दिया उसको एक लश्‍कर भी दिया। उसके सिर्फ चार दिन के बाद शहजादा आजम को मालवा का गवर्नर बनाया गया । आजम बड़ा शातिर आदमी था वो जानता था उसका बाप जिस बीमारी से जूझ रहा है उससे जिंदा नहीं बचेगा इसलिए वो कहीं न कहीं रूकता हुआ सफर कर रहा था ऐसा करने का उसका मकसद ये था कि अगर इसी बीच उसके बाप क...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-18]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-18) उसके बाद औरंगजेब आलमगीर ने मराठों के एक और किले जिसका नाम खलना था । खलना का किला समुद्र की सतह से 3350 फिट की   ऊंचाई पर था इतिहासकार लिखते हैं कि इसके आसपास घने जंग थे । फिर भी किसी तरह से औरंगजेब के सिपाही घने जंगलों में रास्‍ता बनाते हुए आगे बढ़े । 3350 फिट की ऊंचाई पर हमला करना बहुत ही मुश्किल था मुगलों को चट्टों से रास्‍ता बनाना पड़ रहा था । इधर किले के अंदर मराठों की तोपें लगातार औरंगजेब आलमगीर के लश्‍कर पर गोले बरसा रहीं थीं लेकिन औरंगजेब ने हिम्‍मत नहीं हारी । कहने को औरंगजेब की उम्र उस वक्‍त 90 साल थी लेकिन उसने जवानों की तरह फौज की कमांडरी की और पहाड़ों पर बने उस किले पर भी उसने कब्‍जा कर लिया। खलना की फतह के बाद औरंगजेब बेकार नहीं बैठा। उसने मराठों के खिलाफ अपनी जंगी मुहिम जारी रखते हुए सबसे पहले उसने मराठों से गोरधाना का किला छीना। उसके बाद राजगढ़ पर हमला करके उसे फतह कर लिया बाद में तोलना का किला भी मराठों से छीन लिया। 9फरवरी1705ई. को मराठों के कुछ और किलों को फतह करने में काम्‍याब हो गया था। सख्‍त मेहनत की वजह से औरंगजेब आलमगीर ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-17]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-17) अब जुल्फिकार खान के लिए एक और मुसीबत उठ खड़ी हुई उसने जब ये अंदाजा कर लिया कि उसके लश्‍कर के छोटे सालारों को उसकी हरकतों पर शक होने लगा है   उसकी इज्‍जत अब मुगलों के अंदर दांव पर लग गई तब उसने एक दम पल्‍टा खाया । दाऊद खान का साथ देते हुए मराठा सालार रामराज की तरफ बढ़ा । रामराज को जब खबर हुई कि जुल्फिकार खान और दाऊद खान दोनों एक साथ मिलकर उसपर हमला करने के लिए आ रहे हैं । तो उसने भी अपनी ताकत जमा कर ली । मुगलों और मराठों के बीच खूनी जंग हुई जिसके नतीजे में राजाराम को बदतरीन शिकस्‍त हुई और वो अपने बीवी बच्‍चों को छोड़कर भाग गया । राजाराम के भागने के बाद जुल्फिकार खान और दाऊद खान ने आगे बढ़कर मराठों के तीन बड़े किलों पर कब्‍जा कर लिया और रामराज के पांच बच्‍चों और चार बीवीयों को गिरफ्तार भी कर लिया था। लेकिन दूसरी तरफ सनत और धन अभी तक अपने लश्‍करों के साथ दनदनाते फिर रहे थे । इसी बीच औरंगजेब ने अपने एक सालार शेरज खान को एक लश्‍कर देकर सनत और धन पर हमला करने के लिए भेजा लेकिन मराठों ने हमला करके न सिर्फ शेरज खान को हरा दिया बल्कि शेरज खान को गिरफ्ता...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-16]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-16) दूसरी तरफ जुल्फिकार खान और असद खान के सालार भी चौकन्‍ने थे और उन्‍होंने भी अपने मुखबिर फैला रखे थे और मराठों की कार्यवाहियों और मराठों और कामबख्‍श के बीच होने वाली बातें   भी उन्‍हें बताते रहते । इसलिए जब हालात बिगड़ने लगे तब जुल्फिकार खान और असद खान ने ये अंदाजा लगा लिया कि कामबख्‍श किसी भी वक्‍त मराठों के साथ मिलकर उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकता है तो उन्‍होंने कामबख्‍श को गिरफ्तार करके औरंगजेब के पास भेज दिया। इस तरह मराठों को एक तरह से औरंगजेब के खिलाफ एक बड़ी बगावत करने का मौका न मिल सका । अब मराठे भी तीन धड़ों में बंट गये थे एक गिरोह का सरदार सनत नाम का एक शख्‍स था और दूसरे गिरोह की कमान धन के हाथ में भी और तीसरे गिरोह का कमांडर राजाराम था । कामबख्‍श की गिरफ्तारी के बाद मुगलों के दोनों सालार हरकत में आना चाहते थे कि मुगल लश्‍कर की बदकिस्‍मी कि उन्‍हें दो मुसीबतों का सामना करना पड़ा एक तो उनकी खुराक खत्‍म हो गई थी और लश्‍कर में भुखमरी के आसार दिखाई देने लगे थे दूसरी तरफ मराठों ने उनके खिलाफ गौरिल्‍ला जंग शुरू कर दी थी। इस मौके पर अपने लश्‍...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-15]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर(भाग-15)   इतिहासकार लिखते हैं कि औरंगजेब को गोलकुंडा की फतह के बाद सात करोड़ रूपिये नकद के अलावा सोने चांदी और जवाहरात के ढेर भी मिले औरंगजेब आलमगीर ने उनकी रियासत को अपनी सल्‍तनत में शामिल कर लिया था। हालात फिर से करवट लेने लगे थे जिस वक्‍त औरंगजेब पिछले दिनों मराठों के खिलाफ जंग में था बीजापुर गोलकुंडा वालों ने   अपनी ताकत बहुत बड़ा ली थी तो उन्‍होंने उसके खिलाफ हरकत में आना शुरू कर दिया और जब बीजापुर गोलकुंडा वालो को अपने सामने झुका दिया और उनके इलाकों पर कब्‍जा कर लिया इस बीच मराठों ने फिर से ताकत हासिल कर ली। जब तक औरंगजेब आलमगीर बीजापुर गोलकुंडा के खिलाफ जंग में लगा रहा । इस बात का फायदा उठाकर मराठों ने अपनी ताकत को बढ़ा लिया साथ ही आसपास के इलाकों में लूटमार करके अपने लिये जरूरी सामान इकट्ठा करते रहे । मराठे जानते थे कि बीजापुर और गोलकुंडा वालों को अपने सानमे झुकाने के बाद औरंगजेब जरूर उनके खिलाफ हरकत में आयेगा । इसलिए अच्‍छी खासी ताकत हासिल करने के बाद मराठों ने अपने लश्‍कर को कई हिस्‍सों में बांट दिया उनका इरादा ये था कि औरंगजेब जब उनके ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-14]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-14) जब औरंगजेब बीजापुर के हाकिम सिकंदर के महल में गया तो उसने देखा कि महल के अंदर तरह तरह की तस्‍वीरें दीवारों पर सजी हुई थीं और अजीब नक्‍से बने हुए थे। ये सब चीजे देखते ही औरंगजेब ने उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द हटाने का हुक्‍म दिया । इस तरह बीजापुर की हैसियत एक मुगल सल्‍तनत के सूबे के बराबर हो गई बीजापुर की बदकिस्‍मती कि इस फतह के बाद बीजापुर में महामारी फैल गई लगभग आधी आबादी मौत के मुंह में चली गई बीजापुर के हाकिम को दौलताबाद में नजरबंद कर दिया गया था जहां उसने 13 अप्रैल को वफात पाई। मराठों को खत्‍म कर दिया गया और बीजापुर को भी घुटनों के बल बैठा दिया था । अब गोलकुंडा की बारी थी गोलकुंडा का हाकिम उन दिनों अबुल हसन था ये बड़ा अय्याश और शराब व कबाब को शौकीन था । उसने हुकूमत की बागडोर एक हिंदू ब्रहमण वजीर के सुपुर्द की थी और खुद हर वक्‍त नाचने और गाने वालियों के बीच में मस्‍त रहता था । दरअसल उसकी हुकूमत की ताकत तीन लोगों के हाथों में थी उनमें से एक मदना और उसके भाई आकना और भतीजे रूस्‍तम के हाथ में थी नतीजा ये निकला कि इन तीनों की वजह से हर तरफ अफरातफरी फै...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-13]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-13) जब औरंगजेब ने उनकी राजधानी पर कब्‍जा कर लिया तो वहां शिवाजी के खानदान की औरतें बच्‍चे और सम्‍भू जी के बच्‍चे जिनमें उसका एक सात साल का लड़का साहू जी भी शामिल था। सभी को गिरफ्तार करके औरंगजेब के सामने पेश किया गया ।औरंगजेब उनसे  बहुत इज्‍जत से पेश आया और उनको किसी किस्‍म की तकलीफ नही दी इस तरह मराठों की उन बगावतों को खत्‍म करके दक्किन को औरंगजेब आलमगीर ने अपनी सल्‍तनत में शामिल कर लिया था। जिस वक्‍त औरंगजेब और मराठे एक दूसरे से टकरा रहे थे तब बीजापुर रियासत ने मराठों की मदद की थी और गोलकुंडा की हुकूमत ने भी बीजापुर वालों की मदद की थी इस तरह तीनों ताकतें मुगलों के खिलाफ इकट्ठा हो गई थीं । पहले मराठे दूसरे बीजापुर वाले और तीसरे गोलकुंडा की हुकूमत। जब तक औरंगजेब मराठों से लड़ता रहा बीजापुर और गोलकुंडा वालों पर उसने हमला नहीं किया बल्कि उन्‍हें जंग में उलझाए रखा उनपर अपने एक सालार दिलेर खान को लगा दिया जिसने उसे उलझाए रखा और मराठों की तरफ न आने दिया। मराठों को हराने के बाद औरंगजेब ने बीजापुर और गोलकुंडा की हुकूमतों को सबक सिखाने का फैसला किया। ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-12]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-12)   शिवाजी की मौत के बाद मराठे दो हिस्‍सों में बंट गये मराठों का एक गिरोह शिवाजी की मौत के बाद उसके बेटे सम्‍भू जी को अपना हाकिम बनाना चाहता था। जबकि दूसरा गिरोह सम्‍भू जी के दस साल के सौतेले भाई राजाराम को मराठों के ताज व तख्‍त का मालिक बनाना चाहता था। लेकिन सम्‍भू जी ने जबरन ताज व तख्‍त पर कब्‍जा कर लिया और साथ ही अपनी ताकत बढ़ाने के लिये उसने एक और काम किया उन्‍हीं दिनों औरंगजेब के बागी बेटे शहजादा अकबर ने भी उन्‍हीं इलाकों में पनाह ली हुई थी   इसलिए सम्‍भू जी ने उसके साथ राब्‍ता करके उसे अपने साथ मिला लिया और उसे एक तरह से अपनी निगरानी में ले लिया था। शहजादा अकबर के साथ सम्‍भू जी ने वादा किया वो न सिर्फ अपने बाप की मौत का बदला लेगा बल्कि वो अकबर को हिंदुस्‍तान का शहंशाह बनने में मदद करेगा। शिवाजी की मौत के बाद मुगल सिपाहियों ने सुकून का सांस लिया कि अब कोई बगावत नही उठेगी लेकिन सम्‍भू जी ने अपने बाप के रास्‍त पर चलते हुए लूट मार करना शुरू कर दिया । कहते हैं कि वो दशहरा के हर त्‍योहार के बाद लश्‍कर लेकर निकलता और लूट मार करके अपने लिय...