जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्ते में बहुत ज्यादा मुस्किलें पैदा हो ...
कोई और भी पढ़ ले एक लड़के को जब बहुत ज्यादा पढ़ने लिखने के बाद भी कोई नौकरी नहीं मिली और घरेलू नौकरी उसे पसंद नहीं थीं। आखिर सोच समझकर उसने जूतों की एक दुकान खोल ली दुकान छोटी थी मगर उससे इतनी आय हो जाती थी कि घर का खर्च चल जाता था । लेकिन थोड़े ही दिनों में उसकी बीवी मर गई और ये अकेला रह गया । बीवी के मरे हुए छ: महीने हुए थे कि भाई और भाभी भी चल बसे सिर्फ छ: सात साल का एक भतीजा रह गया लड़के का कोई और सहारा नहीं था। चाचा ने अपने पास रख लिया और उसे पढ़ने के लिये स्कूल भेजने लगा। थोड़े दिन बाद वो लड़का जब पढ़ना लिखना सीख गया तो चाचा ने खुद उसे खाली वक्त में पढ़ाना लिखाना शुरू कर दिया। एक उसके दिमाग के ये ख्याल आया कि अगर इस वक्त में कोई और भी पढ़ लिया करे तो क्या नुकसान है। ये सोचकर उसने तमाम मोहल्ले के बच्चों को बुलाया और बगैर फीस के पढ़ाना शुरू कर दिया जिससे थोड़े ही दिनों में उसकी दुकान स्कूल बन गई। हर साल बहुत से बच्चे पढ़कर चले जाते और बहुत से गरीब बच्चे उनकी जगह आ जाते। दो चार साल बाद उसका भतीजा तो स्कूल पास करके कॉलेज में च...