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Showing posts from November, 2020
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

koi aur bhi padh le

कोई और भी पढ़ ले एक लड़के   को जब बहुत ज्‍यादा पढ़ने लिखने के बाद भी कोई नौकरी नहीं मिली   और घरेलू नौकरी उसे पसंद नहीं थीं। आखिर सोच समझकर उसने जूतों की एक दुकान खोल ली दुकान छोटी थी मगर उससे इतनी आय हो जाती थी कि घर का खर्च चल जाता था । लेकिन थोड़े ही दिनों में उसकी बीवी मर गई और ये अकेला रह गया । बीवी के मरे हुए छ: महीने हुए थे कि भाई और भाभी भी चल बसे सिर्फ छ: सात साल का एक भतीजा रह गया लड़के का कोई और सहारा नहीं था। चाचा ने अपने पास रख लिया और उसे पढ़ने के लिये स्‍कूल भेजने लगा।   थोड़े दिन बाद वो लड़का जब पढ़ना लिखना सीख गया तो चाचा ने खुद उसे खाली वक्‍त में पढ़ाना लिखाना शुरू कर दिया।   एक उसके दिमाग के ये ख्‍याल आया कि अगर इस वक्‍त में कोई और भी पढ़ लिया करे तो क्‍या नुकसान है। ये सोचकर उसने तमाम मोहल्‍ले के बच्‍चों को बुलाया और बगैर फीस के पढ़ाना शुरू कर दिया जिससे थोड़े ही दिनों में उसकी दुकान स्‍कूल बन गई। हर साल बहुत से बच्‍चे पढ़कर चले जाते   और बहुत से गरीब बच्‍चे उनकी जगह आ जाते। दो चार साल बाद उसका भतीजा तो स्‍कूल पास करके कॉलेज में च...

Mughal Badshah Zahir ud-din babar [part-7]

मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-7)  जहां तक उस वक्‍त के हिंदुस्‍तानी सिपाहियों की बात है तो वो लड़ाई में किसी भी तरह से कम नहीं थे लेकिन उनके पास हथियार , ट्रेनिंग की कमी थी । और इसी कमी की वजह से फायदा उठाकर बाबर ने हिंदुस्‍तान पर हमला करके उस पर कब्‍जा करने का इरादा कर लिया था   । इन हालात को देखते हुए 1505ई. में बाबर ने हिंदुस्‍तान का रूख किया उसने बदाम , चश्‍मा , ऊनापुर और जमरूद के रास्‍ते पर हमला किया और दरिया –ए – सिंध के पश्चिम में कोहाट के डेरा इस्‍माईल खान तक चढ़ाई कर दी बाबर की गैर मौजूदगी में उसका भाई नासिर मिर्जा भी हरकत में आया उसने गजनी से रवाना होकर बदख्‍शां पर हमला कर दिया और वहां अपनी हुकूमत कायम कर ली मगर कुछ ही महीनों बाद हालात उसके बर्दाश्‍त से बाहर होने की वजह से वापस आना पड़ा। बाबर की बदकिस्‍मती   कि उसका भाई जहांगीर मिर्जा पहले भी उसके खिलाफ   गद्दारी करता रहा था। जिस वक्‍त बाबर ने हिंदुस्‍तान पर हमला किया तो उसकी गैर मौजूदगी में बाबर के खिलाफ बगावत कर दी और गजनी को बर्बाद करने के बाद वो उत्‍तर की तरफ भाग गया और बाबर के दुश्‍मनों से मिल ग...

Two Brothers

दो भाई दो भाईयों को जेब खर्चे के लिये घर से एक एक पैसा रोज मिल जाता था छोटे की तो ये आदत थी कि कभी खर्च करता और उस संदूक में डाल देता जो मदरसे में गरीब बच्‍चों की मदद के लिय रखा रहता था। बड़े भाई की ये हालत थी कि जब मदरसे में खेलने की छुटटी होती तो वो मदरसे के मिठाई वाले की दुकान पर जा पहुंचता । भला उसकी रंग बिरंगी मिठाईयों के सामने उसके एक पैसे की क्‍या कीमत थी। दस पंद्राह दिन तक उसने इस तरह गुजारा कर लिया आज लड्डू ले लिये   तो कल बालूशाही   । एक दिन जलेबियां तो दूसरे दिन बर्फी। मगर इससे तसल्‍ली कब होती उसने दुकानदार से उधार मिठाई   लेना शुरू कर दी कुछ ही दिनों में उसके खाते में दो रूपिये हो गये। दुकानदार ने रूपिये मांगे तो ये घबराया। कि मां बाप की आय ज्‍यादा न होने की वजह से पैसे न मिलने की उम्‍मीद तो नहीं थी उल्‍टा मार पड़ने का डर था। आखिरकार एक दिन दुकानदार ने बस्‍ता छीन लिया कि रूपिये लाओगे तो बस्‍ता दूंगा। इस पर दूसरे दिन वो मदरसे पढ़ने नहीं गया। जब ये बात छोटे भाई पता चली तो उसने पहले तो बड़े भाई को समझाया। फिर दुकानदार से मिन्‍नत की कि उसका बस्‍ता दे दो। ...

Mughal Badsha Zahir ud-din Babar [part-6]

   मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-6) पंजाब के उन इलाकों पर एक शख्‍स दौलत खान लोधी की हुकूमत थी। सिंध और मुल्‍तान के अलावा और जोनपुर , बंगाल और उड़ीसा आजादी हासिल कर चुके थे। इस तरह इब्राहीम लोधी की हुकूमत सिर्फ नाम की हुकूमत रह गई थी उसके बहुत से खास अमीर और सरदार और बड़े दरबारी   उसके सख्‍त रवैये और जिद्दीपन की वजह से तंग आ चुके थे   और खुलकर बगावत करने पर तैयार थे। उसके अलावा बिहार के दरिया खान लोधी ने मरकज के खिलाफ बगावत कर रखी थी मेवाड़ के राणा सांगा राम सिंह   ने भी इब्राहीम लोधी को तख्‍त से उतारने और देहली पर कब्‍जा करने के लिये मंसूबे बना रखे थे। इन्‍हीं साजिशों की वजह से दिल्‍ली की हुकूमत बहुत कमजोर हो गई थी और हालात बहुत खराब हो गये थे। दूसरी तरफ मुसलमान हुकूमत गुजरात में थी जहां सुल्‍तान मोहम्‍मद मुजफ्फी शाह सानी की हुकूमत थी सुल्‍तान मोहम्‍मद मुजफ्फर शाह सानी ने अपनी रियासत को काफी फैला रखा था और मालवा के बहुत से इलाके भी अपनी रियासत में शामिल कर लिये थे । उसने राणा सांगा जिसका नाम राम‍ सिंह भी था उसकी बढ़ती हुई ताकत का मुकाबला किया और शिकस्‍त ...

Mughal Badshah Zahir ud-din Babar [part-5]

 मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-5) बाबर जब अपने लश्‍कर के साथ समरकंद की तरफ बढ़ा तब शीबानी खान भी बुखारा से अपना लश्‍कर लेकर आगे बढ़ा । शीबानी खान ने समरकंद का मुहासरा कर लिया। अब तक बाबर अपने लश्‍कर के साथ समरकंद में दाखिल हो चुका था । शीबानी खान ने मुहासरे को इस कदर सख्‍त किया कि बाबर को शहर के अंदर अनाज की कमी और कहत का सामना करना पड़ा जिसकी वजह से शीबानी खान से सुलाह की पेशकश की गई। शीबानी खान ने सुलाह की इस पेशकश को कुबूल कर लिया और इस तरह समरकंद पर भी शीबानी खान का कब्‍जा हो गया बाबर और उसके खानदान की शीबानी खान ने इस शर्त पर जान बख्‍शी कि बाबर अपनी बहन खानजादी की शादी शीबानी से कर दे। बाबर ने इस शर्त को कुबूल कर लिया और अपनी प्‍यारी बहन खानजादी की शादी शीबानी खान से करने के बाद वो अपने खानदान के सारे लोगों के साथ बेहद परेशानी की हालत में निकल खड़ा हुआ। समरकंद से निकलने के बाद बाबर बहुत सी ठोकरें खाने के बाद वो अपने मामू महमूद खान के पास ताशकंद पहुंचा। बाबर ने अपने साथियों के साथ तशकंद में अपने मामू के पास तीन साल गुजारे और इस बीच वो अपने खोये हुए इलाके वापस लेने के...

Mughal Badshah Zahir ud-din Babar [part-4]

मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-4) अब तम्‍बल और सुल्‍तान अली के बीच ये तय हुआ कि तम्‍बल फरगाना के मरकजी शहर अंदजान पर कब्‍जा कर लेगा जबकि समरकंद सुल्‍तान अली के कब्‍जे में रहने दिया जायेगा। इसी दौरान तम्‍बल अपने सिपाहियों की एक बहुत बड़ी टुकड़ी लेकर जिसे वो पहले तैयार कर चुका था वो अंदजान जा पहुंचा और वहां बाबर का छोटा भाई जहांगीर और उसके दूसरे घर वाले ठहरे थे । तम्‍बल ने अंदर ही अंदर साजिश करके बाबर के भाई जहांगीर को भी अपने साथ मिला लिया और अंदजान शहर पर उसने कब्‍जा करने का इरादा कर लिया। साथ ही उसने ये खबरें भी फैला दीं कि वो उमर शेख के बेटे जहांगीर मिर्जा के लिये अंदजान शहर फतह करना चाहता है। तम्‍बल खुलकर अंदजान पर हमला नहीं करना चाहता था उसे पता था कि अगर बाबर से उसका मुकाबला हुआ तो उसे हार का सामना करना पड़ेगा और बाबर उसका सर काट देगा। हालात को सामने रखते तम्‍बल ने तेज रफ्तार कासिद समरकंद की तरफ भिजवाया ताकि वो जान सके बाबर पर इस खबर का क्‍या असर हुआ है। कासिद जब समरकंद पहुंचा तो उसने देखा वहां तो बाबर बीमार पड़ा था और बाबर हकीकत में उन दिनो बीमार था । कासिद ने तम्‍बल से क...

hunar ki qimat

हुनर की दौलत   किसी द्वीप पर एक मालदार आदमी रहता था। जिसे शिकार का बहुत शौक था मगर शिकार को जाते हुए एक जगह किसी गरीब टोकरी बुनने वाले की जगह पड़ती थी । उस खेत में नरसल उगे हुए थे नरसलीयों से गुजरने में उस आदमी को बड़ी परेशानी होती थी। एक दिन मालदार आदमी ने गरीब आदमी को बुलाकर कहा। तुम ये जमीन हमें दे दो। गरीब ने जवाब दिया हुजूर ! मेरा तो गुजारा इसी जमीन से होता है। मैं इस जमीन को बेचना नहीं चाहता।   इस पर मालदार आदमी नाराज हो गया पहले तो उसने गरीब को खूब पिटवाया। फिर उसके खेत में खड़ी फसल में आग लगा दी जिसपर गरीब रोता हुआ बादशाह के पास चला गया। बादशाह ने अमीर को बलाकर हाल पूछा तो अमीर ने जवाब दिया। बेशक मैंने इस जलील आदमी को इसलिये मारा और इसके खेत में फसल को जला दिया कि उसने मेरा हुक्‍म नहीं माना था। बादशाह ने कहा। तुमने दौलत के नशे में तुमने एक गरीब को परेशान किया , और बड़ा नुकसान पहुंचाया है। हालांकि तुम्‍हारा पर दादा इससे भी ज्‍यादा गरीब था जो हमारे ही घराने की बदौलत इतनी   दौलत का मालिक बना जिस पर तुम इतना घमंड कर रहे हो। मेरी नजर में ये गरीब तुमसे इस...

Mughal Badshah Zahir ud-din Babar [part-3]

मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर  (भाग-3) बाबर को जब समरकंद के हालात की खबर हुई तो उसने तय कर लिया कि वो समरकंद को हासिल करने के लिये जान व माल की बाजी लगा देगा। उसने फैसला कर लिया कि वो अपने मरकजी शहर में हाथ पर हाथ धरे नही बैठेगा। बल्कि अपना लश्‍कर लेकर निकलेगा और समरकंद पर हमला करके उस पर कब्‍जा करेगा और वो तैमूर लंग का वारिस बन जायेगा। बाबर समरकंद पर हमले की तैयारीयां कर रहा था उस वक्‍त हालात उसके लिये ज्‍यादा फायदेमंद साबित हो गये । वो इस तरह कि समरंकद के हुक्‍मरां अहमद के मरने के बाद समरकंद में बहुत से गिरोह आपस में बंट गये थे और आपस में लड़ने लगे थे उनमें से जिन लोगों को हार का सामना करना पड़ता वो बाबर के पास आ जाते इस तरह बाबर के लश्‍कर में फौजियों की बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई थी। उसके अलावा बाबर को एक और फायदा हुआ कि उसका चाचाजाद भाई जिसका नाम सुल्‍तान अली मिर्जा था वो भी समरकंद में शिकस्‍त खाने के बाद वहां से भागा और बाबर के पास उसके मरकजी शहर अंदजान में पहुंच गया इस तरह बाबर की फौजी ताकत में काफी बढ़ोतरी हो गई । बाबर ने देख कि उसके पास अब बहुत बड़ा लश्‍कर हो गया है और उसन...