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Showing posts from January, 2021
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-11]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-11) बाद में खानजहां के नाम से मश्‍हूर हुआ। इस बीच शिवाजी ने काफी ताकत इकट्ठी कर ली थी। उसने बहुत से मुगल इलाकों पर कब्‍जा कर लिया था और उसने लोगों से जमीन की आमदनी का चौथा हिस्‍सा जबरदस्‍ती वसूल करना शुरू कर दिया था। इस बीच हालात शिवाजी के हक में हो गये इसलिए कि बीजापुर का सुल्‍तान 1672 ई. में इंतिकाल कर गया तो शिवाजी ने बीजापुर के कुछ इलाकों पर भी नजरे गाढ़ दीं। इस मौके पर मुगलों के लिए हालात अजीब हो गये थे इसलिए कि खैबर के अफगानों ने भी बगावतें कर रखी थीं और औरंगजेब के लश्‍कर का बड़ा हिस्‍सा और अच्‍छे अच्‍छे सालार खैबर की बगावतों को दबाने में लगे हुए थे शिवाजी की तरफ छोटे छोटे लश्‍कर भिजवाते रहे जिन्‍हें काम्‍याबी न हुई इसलिए शिवाजी के हौंसले बढ़ गये उन हालात में जब शिवाजी ने देखा कि मुसलमानों के छोटे छोटे लश्‍कर उसका मुकाबला नही कर सके और हर एक को हराने में काम्‍याब हो गया तब उसने दक्किन के इलाकों में छत्रपति होने का ऐलान कर दिया जिसका मतलब था कि वो उन इलाकों का बादशाह है। उसके बाद उसने कार्यवाहियां करते हुए उसने कर्नाटक और मैसूर के कुछ इलाकों प...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-10]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-10) शिवाजी ने जब अंदाजा लगाया कि औरंगजेब का मामू शाइस्‍ता खान तो उसे खत्‍म कर देगा इसलिए उसने शाइस्‍ता खान को नुकसान पहुंचाने के लिए एक   चाल चलने का इरादा किया। शाइस्‍ता खान के सालारों में से एक सालार जसवंत सिंह था। शिवाजी ने अंदर ही अंदर जसवंत सिंह से राब्‍ता किया और जसवंत सिंह को कहला भेजा कि अगर वो शाइस्‍ता खान के हरम पर हमला करे तो जसवंत सिंह उसका साथ दे जसवंत सिंह ने उसकी पेशकश कुबूल कर ली। शिवाजी ने मक्‍कारी से आधी रात में पूना में कुछ लोगों के साथ शाइस्‍ता खान के हरम में दाखिल होकर कई लोगों को जख्‍मी कर दिया औरतों बच्‍चों को तक नहीं छोड़ा शाइस्‍ता खान का एक लड़का , एक सालार , चार नौकर और हरम की छ: औरतें कत्‍ल कर दी गईं और शाइस्‍ता खान के दो बेटों के अलावा कई औरतों को सख्‍त जख्‍म आये और इस कार्यवाही के बाद शिवाजी वहां से फरार होने में काम्‍याब हो गया। पूना में ये कार्यवाही करने के बाद शिवाजी के हौंसले बढ़ गये और अब उसने सूरत शहर को अपना निशाना बनाने का इरादा कर लिया । सूरत शहर में उस वक्‍त अंग्रेज भी ठहरे हुए थे वहां अंग्रेजों ने कुछ कार...

Mughal Badshah Auranzeb Alamgir [part-9]

मुगल  बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग9)   राजपूतों को हराने के बाद औरंगजेब आलमगीर के लिए मराठों की शक्‍ल में एक और मुसीबत उठ खड़ी हुई उस वक्‍त मराठों की कमान शिवाजी के हाथों में थी । शिवाजी अप्रैल 1627 ई. को एक पहाड़ी किले मैं पैदा हुआ था । उसके बाप साऊ जी ने उसकी मां जीजा बाई की मर्जी के बगैर दूसरी शादी रचाई थी इसलिए जीजाबाई का पूरा ध्‍यान अपने लड़के शिवाजी की तरबियत पर था। जीजाबाई बड़ी कट्टर हिंदू औरत थी और मुसलमानों से सख्‍त नफरत करती थी इसलिए उसने शिवाजी के कानों में बचपन से ही मुसलमानों के खिलाफ नफरत की कहानियां भरना शुरू कर दीं थीं इस तरह जीजाबाई अपने बेटे को मुसलमानों के खिलाफ नफरत सिखाकर उसे मुसलमानों के खिलाफ जंग पर उकासा रही थी। उसके अलावा जीजा बाई ने अपने बेटे शिवाजी की पढ़ाई के लिए जो उस्‍ताद रखा था वो भी जीजाबाई की तरह कट्टर हिंदू था और उसने भी शिवाजी के दिमाग में मुसलमानों के खिलाफ नफरत ही भरी। जवान होने के बाद उस शिवाजी ने हिंदू साधुओं से हिंदू समाज की तरक्‍की के मश्‍वरे करना शुरू कर दिये उसका गुरू एक शख्‍स स्‍वामी रामदास था और उसने शिवाजी को पहला सबक ये दिया...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-8]

मुगल बादशाह औरंगजेब आमलगीर (भाग-8) जो लश्‍कर अकबर , दुर्गादास और जयसिंह लेकर आ रहे थे। उस लश्‍कर की तादाद औरंगजेब के उस लश्‍कर से ज्‍यादा थी जो उस वक्‍त औरंगजेब आलमगीर के पास था लेकिन औरंगजेब ने अपनी हिम्‍मत और दिलेरी का मुजाहिरा किया अपने बेटे मुअज्‍जम और दूसरे सालारों को लेकर वो अजमेर से निकला। अजमेर से लगभग दस मील के फासले पर उसने बागियों से टकराने का इरादा कर लिया था। इस मौके पर औरंगजेब ने अपनी अक्‍लमंदी और सूझ बूझ से काम लेते हुए बगैर लड़े ही बागियों को भाग जाने और बिखर जाने पर मजबूर कर दिया था। दरअसल औरंगजेब के बेटे अकबर को बगावत पर उकसाने में जहां महाराणा राज और दुर्गादास का हाथ था वहां सबसे बड़ी उकसाहट सबसे बड़ी मदद औरंगजेब के एक सालार तहूर खान की तरफ से थी। तहूर खान जंग का बहुत तजुर्बा रखता था और जो लश्‍कर अकबर के पास था उसका सालार एक तरह से तहूर खान ही था और ये सारी हिम्‍मत और जसारत अकबर ने तहूर खान ही के बलबूते पर की थी। अब हालात ये थे कि तहूर खान का सुसर जिसका नाम इनायत खान था वो औरंगजेब के लश्‍कर में शामिल था और औरंगजेब का वफादार था। औरंगजेब ने सबसे पहले ये काम किया...

Mughal Badshah Auranzeb Alamgir [part-7]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-7) चौथी बगावत मारवाड़ के राठौरों ने खड़ी की थी। मारवाड़ का हिंदू राजा जसवंत सिंह औरंगजेब को टेक्‍स देता था। 1678ई. में उसकी मौत हो गई राजा जसवंत सिंह के कोई औलाद न थी इसलिये औरंगजेब ने ये रियासत अपनी हुकूमत में शामिल कर ली उसके बाद हालात का जायजा लेते हुए औरंगजेब ने मारवाड़ का हाकिम इंदर सिंह को बनाया। अब राजा जसवंत सिंह की मौत के बाद उसकी दोनों बीवीयों के यहां दो लड़के पैदा हुए उनमें एक तो जल्‍दी मर गया। दूसरे लड़के को लेकर उसकी मां औरंगजेब आलमगीर के दरबार में पहुंची और तख्‍त का दावा किया और ये भी कहा कि मारवाड़ की रियासत उसे वापस कर दी जाय और इंदर सिंह को वहां से हटाया जाय। उस रानी के आने पर औरंगजेब ने नरमी से काम लेते हुए रानी से वादा किया कि उसका बच्‍चा अभी दूध पीता है और जब तक वो बालिग नहीं हो जाता रियासत में मुगलों का ही इंतिजाम रहेगा। बच्‍चे की परवरिश भी औरंगजेब के शाही हरम में कराने का वादा किया और उसे रियासत के राजा की हैसियत से वजीफा दिया जाने लगा। राठौरों का एक सरदार दुर्गादास था उसे जब खबर हुई कि मारवाड़ का राजा मुसलमानों के यहां परवरिश...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgi [part-6]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-6)   बंगाल और उत्‍तर पश्चिमी इलाकों में बगावतों को खत्‍म करने और हालात को संवारने के बाद कई जगहों पर औरंगजेब के खिलाफ बगावतें उठ खड़ी हुईं। पहली बागवत 1669 ई. में मथुरा के जाटों ने की थी। मथुरा में जो उस वक्‍त औरंगजेब का गवर्नर था उसके खिलाफ जाटों ने मुहिम शुरू की चारों तरफ उन्‍होंने तबाही मचाकर रख दी उन जाटों की बगावत को दबाने के लिये औरंगजेब ने अपने एक सालार   हसन अली खान को रवाना किया उसने जाटों को बदतरीन शिकस्‍त दी और इस तरह मथुरा के जाटों की बगावत को खत्‍म कर दिया गया। दूसरी बगावत 1672 ई. में दिल्‍ली के पास तरनोल में सतनामियों ने खड़ी की। सतनामियों को मुंडे भी कहा जाता था क्‍योंकि अपने तमाम बाल यहां तक कि अपनी भवें भी साफ रखते थे। सतनामियों ने राजधानी को जाने वाला अनाज भी रोक दिया । उसके अलावा राजधानी देहली को जहां जहां से जरूरतों का सामान जाता था वो उन सतनामियों ने रोकना शुरू कर दिया । सतनामियों के बगावत करने की वजह ये थी कि मुगलों के एक सिपाही के साथ किसी सतनामी का मामूली झगड़ा हो गया था और इस झगड़े को सतनामियों ने मजहब का रंग दे ...

Mughal Badshah Auranzeb Almagir [part-5]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-5) युसुफजई कबीले ने पिशावर के पश्चिमी हिस्‍सों में भी लूट मार मचा दी वहां के मुगल सालार कामिल खान ने उन्‍हें रोकना चाहा लेकिन वो ऐसा न कर सका। मई 1667ई. में मुगल लश्‍कर को एक सालार शमशेर खान की निगरानी में सिंध नदी पार करके युसुफजई कबीले पर हमला करने के लिए भेजा गया । शमशेर खान युसुफजई इलाकों में घुस गया उन्‍हें सख्‍त नुकसान पहुंचाया और उनके गांव के गांव उसने बर्बाद कर दिये और युसुफजई के बहुत से इलाकों पर उसने कब्‍जा करने के बाद उसने दरिया –ए पंजशेर तक उनका पीछा किया । सितम्‍बर के महीने में मुगलों की तरफ से अफगानिस्‍तान के हाकिम मोहम्‍मद अमीन खान ने एक मुहिम की शुरूआत की और युसुफजई कबीले को बहुत नुकसान पहुंचाया और उसके बाद युसुफजई कबीले को कई साल तक बगावत करने की हिम्‍मत नहीं हुई। उसके बाद खेबर के कबीलों ने 1672 ई. में बगावत शुरू कर दी   उसके साथ ही आफरीदी कबीलों ने सरदार अकमल की निगरानी में न सिर्फ बागावत की बल्कि अकमल को अपना बादशाह भी मान लिया और मुगलों के खिलाफ जिहाद का नाम देकर एक नये मिशन का आगाज कर दिया। अकमल की ताकत इतनी बढ़ी कि उसने अफ...

Mughal Badshah Auranzeb Alamgir [part-4]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-4) औरंगजेब आलमगीर के इस सालार ने बड़ी अक्‍लमंदी और दिलेरी   और समझदारी से बागियों को अपने सामने झुकने पर मजबूर कर दिया था। कहने को बागी बार बार लश्‍कर पर हमला करते थे उसके बावजूद वो उनके साथ इंसाफ के साथ बर्ताव करता और किसी से भी उसने गैर इंसाफी का सुलूक नहीं किया इतिहासकार लिखते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि उन बा‍गी राजाओं को झुकाने का काम मीर जुमला ही कर सकता था । बागी राजा ने जो औरंगजेब से बगावत न करने का वादा किया था । लेकिन चार साल के बाद ही उसने फिर से औरंगजेब आलमगीर के खिलाफ बगावत कर दी । उन चार सालों में वो बड़ी तेजी से अपने लश्‍कर में बढ़ोत्‍तरी करता रहा दूसरे उसे ये भी खबर हो चुकी थी कि मीर जुमला अब मर चुका है और हो सकता है कि कोई दूसरा सालार उसको हरा न सके इसलिए उसने जंग का ऐलान कर दिया मीर जुमला ने उससे पहले जो इलाके फतह किये थे उनपर भी उसने कब्‍जा कर लिया। यहां तक कि उसने गोवाहाटी शहर पर भी कब्‍जा कर लिया था। औरंगजेब आलमगीर ने उस बगावत को दबाने के लिए सबसे पहले अपने एक सालारा राजा राम सिंह को रवाना किया लेकिन मीर जुमला की तरह उसमे न अ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-3]

 मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-3) इसके अलावा वहां के बागी तो उन सारे इलाकों को अच्‍छी तरह जानते थे जबकि मीर जुमला और उसके सिपाहीयों को उन इलाकों की कोई खास जानकारी नहीं थी लेकिन फिर भी मीर जुमला ने इस कदर सख्‍त हमले किये कि जगह जगह बागियों को हार का सामना करना पड़ा उसने बागियों को बदतरीन शिकस्‍त दी और उनकी ताकत को पूरे तरीके से खत्‍म कर दिया। इस टक्‍कर की वजह से मीर जुमला ने बागियों पर हमला करके उन्‍हें एक के बाद एक शिकस्‍त देकर उनके 8 अहम किलों पर कब्‍जा कर लिया था। उसके बाद मीर जुमला आगे बढ़ा और बागियों की राजधानी के घर और गांव पर कब्‍जा कर लिया था। बागियों के शहर , गुड़गांव पर कब्‍जा करने के बाद मीर जुमला ने हालात का जायजा लेना शुरू का किया इस बीच आसाम का राजा और उसके साथी पहाड़ों में जाकर छुप गये उन्‍हें खबर हो गई थी कि अब मीर जुमला उन पर हमला करने के लिए आगे बढ़ेगा। दूसरी तरफ मीर जुमला ने हालात को देखते हुए फैसला किया कि अगले बरसात के मौसम तक हालात का जायाजा लिया जाय क्‍योंकि वो सारे इलाके उसके और उसके सिपाहियों के लिए नये थे इसलिए वो उन इलाकों को अच्‍छी तरह से समझना ...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-2]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-2) तख्‍त पर बैठने के बाद सबसे पहले औरंगजेब आलमगीर ने दक्षिणी बिहार के इलाकों प्‍लामू और चटा गांव को फतह करके अपनी सल्‍तनत में शामिल किया प्‍लामू को औरंगजेब के हाकिम दाऊद खान ने 1661ई. में और बंगाल के हाकिम शाइस्‍ता खान ने 1666 ई. में चाटगांव फतह किया। उसके अलावा 1665ई. में औरंगजेब आलमगीर की ताकत को देखते हुए लद्दाख के हाकिम ने औरंगजेब की इताअत कुबूल कर ली थी अपनी सल्‍तनत में उसने औरंगजेब आलमगीर के नाम के सिक्‍के जारी कर दिए थे और पहली बार उसकी राजधानी में आजान की आवाज गूंजी थी इसी बीच वहां के हिंदूओं ने आपस के झगड़ों से फायदा उठाकर औरंगजेब के खिलाफ बगावत खड़ी करने की कोशिश की थी। लेकिन औरंगजेब ने हर बागी को बड़ी सख्‍ती से कुचल कर रख दिया था। सबसे पहले मंधेला के चंपत राव मंधेला और नवा नगर काठियावाड़ के राय सिंह ने बगावतें कीं लेकिन औरंगजेब ने उन पर हमला करके उनकी बगावतों को सख्‍ती से कुचल दिया उसके बाद बीकानेर के करण सिंह ने जब सर उठाने की कोशिश की तो उसे भी खूब रगेदा गया । उसके बाद उसने औरंगजेब से माफी मांगी। इस तरह औरंगजेब ने बहुत से इलाकों में अमन ...

Mughal Badshah Aurangzeb Almgir [part-1]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर     औरंगजेब आलमगीर 15जून 1659ई. को हिंदुस्‍तान के ताज व तख्‍त के मालिक बने । अपने बाप शाहजहां की जिंदगी ही में वो तख्‍त पर बैठ गये थे उन्‍हें हुकूमत हासिल करने के लिए अजीब कश्‍मकश का सामना करना पड़ा । असल में शाहजहां के चार बेटे थे। दारा शिकोह , मुराद बख्‍श , शाह शुजाअ , और औरंगजेब आलमगीर । शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह ने अपने   बाप के दिमाग पर कब्‍जा कर रखा था वो एक तरह से अपने   बाप की जिंदगी में ही हुकूमत का मालिक बन बैठा था इसके अलावा शाहजहां भी अपनी औलाद में सबसे ज्‍यादा दारा शिकोह को ही पसंद करता था और उसपर भरोसा करता था और उसने दारा शिकोह को अपना वारिसा भी बना दिया था। इसमें कोई शक नहीं कि औरंगजेब आलमगीर ने मुगलिया सल्‍तनत की बेहद खिदमत की हकीकत में उसकी खिदमत का सिला न मिल सका था उसके अलावा शाहजहां ने अपनी जिंदगी में दारा शिकोह को अच्‍छे इलाकों का हाकिम बनाया था और उसे कई ओहदे दे रखे थे। जबकि औरंगजेब को दक्किन की तरफ फेंक दिया गया था। जहां औरंगजेब को अपने बाप के फैसले मंजूर नहीं थे वहीं उसे अपने भाई दारा शिकोह पर ...