मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-20)
औरंगजेब ने कभी सरकारी खजाने से एक पाई भी न ली उसका मामूल
था कि सुबह सवेरे उठकर नमाज अदा करता कुरआन मुकद्दस की तिलावत करता ।उसके बाद
कुरआन मुकद्दस के नुस्खे अपने हाथ से तैयार करता उसका खाली वक्त इबादत में
गुजरता उसके साथ औरंगजेब आलमगीर हाफिज कुरआन भी था 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे आराम
करता था। शरीअत और हुजुर सललल्लाहु अलैहि वसल्लम का तरीका उसकी जिंदगी थीं ।
इतिहासकार लिखते हैं कि शरीअत ही औरंगजेब का लिबास था उसने अपनी पूरी जिंदगी एक
दीनदार और पाकबाज इंसान की तरह गुजारी आम बादशाहों के उलट उसका जिंदगी जीने का
तरीका ही सबसे अलग था।
आखिरी दिनों में उसने अपने बेटे शहजादा आजम को एक खत लिखा
जो उसके अच्छे किरदार को दिखाता उसने लिखा था।
मेरी पैदाईश पर अनगिनत लोगों ने जश्न मनाया मगर मैं जब इस
दुनिया से जा रहा हूं तो अकेला हूं। जिंदगी के मकसद बड़े होते हैं और मुझे उन लम्हों
के बेकार जाने का सदमा है जो खुदा की इबादत और उसकी याद के बगैर गुजरे। काश मैं
लोगों की खिदमत अपनी मंशा के मुताबिक कर सकता इसलिए कभी कभी एहसास होता है कि मेरी
जिंदगी बे मकसद थी जो बेकार गुजर गई लेकिन अब सिवाय अफसोस के और है भी? वक्त अपनी यादों के निशान छोड़ देता है मैं
बेहद कमजोर हो चुका हूं खुदा बहुत रहीम करीम है शायद वो मेरी बख्शिश कर दे ।
उसने कभी किसी भी वक्त हिंदूओं पर शरीअत की पाबंदीया लागू
नहीं कीं वो सिर्फ जिजया अदा करते थे और अपने अकीदों और रस्मों के तहत जिंदगी
गुजारते थे उनके मुकदमों के फैसले भी उनके मजहब और उनके अकीदों के तहत हुआ करते थे
उनके लिए हिंदू जज तैनात किये गये थे उन्हें इबादत करने और अपने त्यौहार मनाने
की पूरी आजादी थी लेकिन कानून के खिलाफ करने पर हिंदू मुस्लिम को बराबर सजा थी ।
कुछ लोग औरंगजेब के खिलाफ इसलिए भी लिखते हैं कि आलमगीर ने
कुछ रस्मों को सिर्फ इसलिए बंद कर दिया था कि वो शरीअत के खिलाफ थीं जैसे ताजपोशी
होने के बाद औरंगजेब आलमगीर ने शाही दरबार में जो गाने बजाने का इंतिजाम किया जाता
था उसे खत्म कर दिया गया जितने भी लोग गाने बजाने वाले थे उन्हें दरबार से निकाल
दिया गया । उससे पहले बादशाह की ताजपोशी को ताजपोशी के बाद सोने से तौला जाता था
औरंगजेब ने इस रस्म पर पाबंदी लगा दी । औरंगजेब आलमगीर से पहले हुकूमत के सिक्कों
पर कल्मा लिखवाया जाता था औरंगजेब ने इसको रोक दिया क्योंकि इससे कल्मे की
हुरमत में कमी होती थी। औरंगजेब आलमगीर से पहले बहुत से नुजूमी दरबार में रहते थे
उसने उन तमाम नूजूमियों को नौकरी से निकाल दिया क्योंकि वो इसे शिर्क समझता था ।
अपनी सादगी की वजह से उसने दरबार में रखे कीमती कलमदान हटवा
दिए इसके अलावा सोने और चांदी के तारों से जो शाही लिबास तैयार किये जाते थे उनपर
भी उसने रोक लगा दी ।
उसके अलावा शराब और उससे जुड़ी हुई तमाम खुराफातों पर सख्त
पाबंदी लागू कर दीं। जिस्म फरोशी के कारोबार को बंद करा दिया ऐसा करोबार करने
वाली औरतों को शादी का हुक्म दिया गया । हिंदूओं में सती प्रथा उस वक्त अपने चरम
पर थी जब शौहर मर जाता था तो उसके साथ ही बीवी को भी जला दिया जाता था । औरंगजेब
आलमगीर ने सख्ती से इस रस्म पर पाबंदी लगा दी ।
औरंगजेब आलमगीर पर बहुत से हिंदू ये इल्जाम लगाते हैं कि
उसने हिंदूओं के मंदिरों को गिरा जबकि ये उसपर इल्जाम लगाने के सिवा कुछ भी नहीं
उसने कभी ऐसा नहीं किया बल्कि उसने हिंदूओं के मंदिरों की हिफाजत के लिए भी कदम
उठाए। दो तरह के मंदिरों को उसने जरूर गिराया वो मंदिर जहां पहले मस्जिदें हुआ
करती थीं और उन्हें गिराकर मंदिर बना दिये गये थे। औरंगजेब ने उन्हें गिराकर उन्हें
पहले की तरह मस्जिदों में बदल दिया। वो मंदिर जिन के अंदर बैठकर बड़े बड़े बागी
हुकूमत के खिलाफ बगावत की साजिशें किया करते थे उन मंदिरों को भी औरंगजेब ने गिरा
दिया था।
औरंगजेब पर हिंदू ये इल्जाम लगाते हैं कि उसने हिंदूओं पर
जिजया लगा दिया था तो इतिहासकार लिखते हैं ये केवल हिंदूओं पर ही लागू नहीं था बल्कि
मुसलमान भी टेक्स देते थे बस नाम का फर्क था अगर हालात का जायजा लिया जाय तो
मुसलमानों के टेक्स क रकम हिंदूओं से ज्यादा बनती थी । हिंदूओं के आम लोगों से
सिर्फ 3 ½ रूपिये सालाना वसूला जाता था । इसके मुकाबले में जो
मुसलमानों पर टेक्स की रकम हिंदूओं से पांच गुना ज्यादा थी । उसके अलावा अपाहिज
मर्दों औरतों से टेक्स नहीं लिया जाता था।
औरंगजेब आलमगीर की मौत के बाद उनके बेटे आपस में झगड़ते रहे
और मुगलिया हुकूमत कमजोर होती चली गई और अंग्रेजों ने अपने पंजे इस मुल्क पर गाढ़
दिए । और मुगल सल्तनत लगभग खत्म हो गई थी।

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