जहांगीर और नूरजहां भाग-1
सन् 1607ई. का एक दिन था और बादल छाए हुए थे
आगरा के दरबार में जो
कुर्सीयां लगी हुई थी वह लगभग सभी भरी हुई थीं कुछ खाली रह गईं थी सबसे आगे की
कुर्सीयों पर शहंशाह जहागीर के बेटे खुर्रम परवेज और शहजादा शहरयार बैठे हुए थे और
उनके आगे वजीर माल ग्यास जो नूरजहां का बाप था फिर महावत खां जो हकीकत में एक ईरानी
था लेकिन एक कमाडंर की हैसियत से जहांगीर के लश्कर में शामिल था उससे आगे असफ खां
और इब्राहीम बैठे हुए थे। ये दोनों नूरजहां के भाई थे। आसफ खान जहांगीर का वजीर था
। फिर उसके बाद राजा मानसिंह, अजीज कोका, बीकानेर का राजा रायसिंह, अंबर का राजा जगननाथ ,मेवाड़ का राजा अमर सिंह , तीन बड़े सालार पीर खान जो इतिहास में खान जहान के नाम से
मश्हूर हुआ। अब्दुल्लाह खान जो उम्दा सालारों में से था ।
उसके बाद इस्लाम खान भी
बैठा हुआ था । ये भी सालार था उससे आगे बुंदेलखण्ड का राजा बीरसिंह और मेवाड़ के
राजा का बेटा भीमसिंह और उसका बेटा किशन सिंह , अब्दुर्रहीम जो इतिहास में खान खाना के नाम से मश्हूर
हुआ। इसके बाद जहांगीर के दरबार का चित्रकार फर्ख बेग दो और चित्रकार जो समरकंद से
थे और जहांगीर के दरबार से जुड़े हुए थे। जिनके नाम मोहम्मद नादिर और मोहम्मद
मुराद थे। उसके बाद नक्काश और पत्थरों का कारीगर था। फिर ग्वालियार का राजा
रामदास बैठा हुआ था । सब लोग अलग अलग मुद्दों पर बात कर रहे थे कि बाहर गुलाम गरोश
ने शहंशाह जहांगीर के आने की खबर दी उसके आने की खबर सुनकर सब लोग खड़े हो गये ।
फिर जहांगीर दरबार में दाखिल हुआ उसका तख्त ऊंचे स्थान पर था। वह उसपर बैठा।
एक नजर अपने बगल में बैठे
हुए अपने दोनों बेटों परवेज ‘खुर्रम’ और शहरयार पर डाली । पास ही बैठे अपने वजीर माल ग्यास बेग
और उसके बेटे वजीर आसफ खान पर एक गहरी निगाह डाली और फिर कहने लगा।
इस दरबार में हमें एक काम
याद आया है जो हमें निपटाना है। उसके अलावा और कोई काम हो तो वो मुझे पहले से बतला
दो जो काम मेरे दिमाग में है और जिसे सबसे पहले निपटाना है वो ये है कि मैं अपने
बेटे खुर्रम को खुश करना चाहता हूं ताकि हमारे और उसके बीच में रिश्ते अच्छे
रहें । यहां तक कहकर जब जहांगीर खामोश हुआ तो उसका बेटा खुर्रम कहने लगा बाबा इसके अलावा भी और अहम काम हैं । एक पुराने
सालार फरीद खान की रिहाई है फरीद खान को मैं जानता हूं । मेरे दादा ने उसे इस बात
पर देहली के कैदखाने में डाल दिया था कि उसने दादा के बनाए हुए नए मजहब दीन ए
इलाही को मानने से इंकार कर दिया था । और उससे बढ़कर ये जुल्म किया कि उसके बेटे
रूस्तम खां को भी उसके साथ कैद में डाल दिया । उसके बाद सितम ये हुआ कि फरीद खान
को देहली के कैदखाने में रहने दिया और उसके बेटे रूस्तम खान को आगरा के कैदखाने
में डाल दिया । ये उनपर पहला सितम नहीं है बल्कि उससे पहले किसी ने फरीद खान के
घरवालों को कत्ल कर डाला । उनके कालिलों को अभी तक नहीं पकड़ा गया और न ही ये
जानने की कोशिश की गई कि कातिल कौन है?
यहां तक कहने के बाद फर्ख
रूका, और फिर जहांगीर
को मुखातिब करके कहने लगा ।
तीसरा काम जो आपको दरबार में
निपटाना है वो ये कि बंगाल से खबरें आ रही हैं बंगाल में कुछ अफगानी बगावत करने पर
उतर आए हैं और अलीकुली खान (शेर अफगन) जिसे मेरे दादा ने बंगाल में एक खासी बड़ी
जागीर दे रखी है जो अपनी बीवी नूरजहां और अपनी बेटी लाडली बेगम के साथ बंगाल में
ठहरा हुआ है । उसके बारे में खबरें आ रही हैं कि वो भी बंगाल में बागियों के साथ
मिलकर बंगाल को मुगल रियासत से अलग करना चाहता है।
ये खबरें सुनकर जहांगीर
के माथे पर बल पड़ गया। फिर अपने बेटे खुर्रम की तरफ देखकर कहने लगा । आज ही एक
तेज रफ्तार कासिद हाकिम बंगाल कुतुबुद्दीन की तरफ रवाना करो जो हमारा रिश्ते में
भाई भी है। और उससे पता लगाया जाय कि बंगाल के हालात कौन खराब कर रहा है।
दूसरी बात ये है कि अगर
तुम्हारे कहने के मुताबिक अगर मश्हूर कमांडर फरीद खान बेगुनाह है तो फिर अबतक
उसे रिहा क्यों नहीं किया गया ? इसपर खुर्रम कहने लगा ।
बाबा मैंने कुछ आदमी
भेजकर फरीद खान को देहली से आगरा बुला लिया है। मैं चाहता हूं कि वो आपकी खिदमत
में हाजिर हो ।हमने अभी तक उसे रिहा नहीं किया । मेरे दादा ने उसे जंजीरों में
जकड़कर कैदखाने में डाला था इस वक्त भी वो जंजीरों में जकड़ा साथ वाले कमरे में बैठा
हुआ है, वो बहुत ही परेशान है। उसका बेटा जिसका नाम रूस्तम है , जो छोटी सी उम्र में कैद
कर दिया गया था अब उसकी उम्र 13 साल का हो गया है उसे भी जंजीरों में जकड़कर
कैदखाने में रखा गया था ।मैंने कुछ आदमी भेजे ताकि उसे भी कैदखाने से यहां लाया
जाय अगर आपकी इजाजत हो तो मैं फरीद खान को आपके सामने पेश कर दूं।
जहांगीर हां में गर्दन
हिला दी तब हाथ के इशारे से खुर्रम ने चोबदार को बुलाया और हुक्म दिया कि उसे
हुक्म दिया कि साथ वाले कमरे में फरीद खान बैठा हुआ है उसे अंदर लाया जाय।
थोड़ी देर में एक अधेड़
उम्र का एक आदमी दरबार में लाया गया जो जंजीरों में जकड़ा हुआ था और उसे जहांगीर
के सामने खड़ा कर दिया उसकी गर्दन झुकी हुई थी। जहांगीर बड़ी देर तक उसे देखता रहा
और फिर अपने बेटे खुर्रम से कहने लगा । ‘’ ये फरीद खान है । मैं इसे जानता हूं। इसके कोई शक नहीं कि
पुराने जमाने का एक बेहतरीन सालार है अगर इसे दीन ए इलाही पर न करने की वजह से
कैदखाने ने डाला गया था तो ये गलत था। पहले ये कहो कि उसका बेटा कहां है?
इस पर जहांगीर ने चोबदार
को बुलाया और उसे कहने लगा।
जब फरीद खान का बेटा आ
जाए तो उसे भी अंदर लाया जाय ।
थोड़ी देर के बाद चोबदार
एक 12-13 साल के लड़के को अंदर ले आया , जो जंजीरों में जकड़ा हुआ था । उसे देखते ही खुर्रम कहने
लगा ।
‘’ बाबा ये रूस्तम
है फरीद खान का बेटा’’

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