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                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

ANGREJI HUKUMAT

अंग्रेजी हुकूमत 
मलका विक्टोरिया 

(1274 हिजरी )(1857 ईस्वी ) की इस हल चल के साथ ही कंपनी राज भी खत्म हो गया और इंग्लिस्तान की हुकूमत ने हिंदुस्तान का इन्तिजाम खुद अपने हाथ में ले लिया 1 नवंबर (1275 हिजरी )(1858 ईस्वी ) को इलाहबाद में एक बड़ा दरबार हुआ जिस में मलका विक्टोरिया की तरफ से आम माफ़ी का एलान किया गया और लोगों को इत्मीनान दिलाया गया की अब उनके साथ कोई ज्यादती नहीं की जाएगी।

इस वक़्त तक हिंदुस्तान का सबसे बड़ा ओहदा गवर्नर जनरल कहलाता था जो पांच बरस के बाद बदल जाता था इतने अर्से में , 1. वारेन हेस्टिंग  2. कार्नवालिस  3. सरजानशोर  4. वेलिजली  5. सर जार्ज बार्लो  6. मिंटो 7. हेस्टंगज   8.  अम्हेरिस्ट  9. विलयम बेन्टिंग  10 .  सर चार्ल्स मैटकाफ  11. ऑकलैंड  12. एलनबरा  13. हार्डज 14. डलहौजी  15 केनिंग    15गवर्नर जनरल आये।
कम्पनी की हुकूमत के साथ ये ओहदा भी बदला और गवर्नर जनरल को वायसराय (नायब शाह ) का लक़ब दिया गया  (1275 हिजरी )(1858 ईस्वी ) से इस वक़्त तक  1. लार्ड केनिंग  2. लार्ड अलगन  3. सर जान लॉरेन्स 4. लार्ड मियो   5.लार्ड नार्थबर्क 6. लार्ड लिटन  7. लार्ड रिपन 8. लार्ड डफरिन  9. लार्ड लैंसडॉन  10 लार्ड डाल्गाम  (दोम) 11. लार्ड कर्जन  12. लार्ड डलहौजी 13 . लार्ड हार्डिंग 14. लार्ड चेम्सफोर्ड 15. लार्ड रेडिंग 16. लार्ड आरोन  17.  लार्ड लंगटन 18. लार्ड लान्थगो    18  वायसराय आ चुके हैं इन की मुद्दत भी पांच साल होती है सबसे पहले लार्ड केनिंग वायसराय मुक़र्रर हुआ जिसने अपने  तव्ज्जो से दो ही तीन बरस में (1857 ईस्वी ) का असर दूर कर दिया  और मुल्क में ऑफर अमन और अमान कायम हो गया इसी ज़माने में कलकत्ता और बम्बई ,मद्रास में  यूनिवर्सिटीयां  कायम हुईं और जगह -जगह प्राइमरी स्कूल और मिडिल स्कूल खुले मुकदमात के लिए कानून की किताबें तैयार हुईं और बम्बई मद्रास और कलकत्ता में हाई कोर्ट कायम हुए इन बातों के अलावा सबसे बड़ी बात ये हुईं  की (1278 हिजरी )(1861 ईस्वी ) में इंडियन कॉउंसिल एक्ट जारी हुआ  और मुल्क के इन्तिजाम में हिंदुस्तान   राय ली जाने लगी (1279 हिजरी )(1862 ईस्वी ) में केनिंग विलायत वापस गया और इसके बाद लार्ड अलगन और लार्ड लारेंस दो  वायसराय आये और उनके ज़माने में (1281 हिजरी )(1864 ईस्वी ) में भूटान से लड़ाई हुईं लेकिन जल्दी ही सुलह हो गई (1283 हिजरी )(1866 ईस्वी ) में उड़ीसा में सख्त कहत पड़ा जिससे बीस लाख आदमी जान से मारे गए।
लार्ड मिउ
(1286 हिजरी )(1869 ईस्वी ) में लार्ड मिउ वायसराय मुक़र्रर हुए उसके ज़माने में बहुत से नए महकमे कायम हुए  जराअत की तरफ खास तवज्जो हुई और उस गरज से एक पूरा महकमा खुल गया सांभर नमक का खास इन्तिजाम भी इस के ज़माने में हुआ  मुल्क में के इन्तिजाम में कुछ कुछ इस्लाहे हुईं अफगानिस्तान से दोस्ती बढ़ाई गई  ताकि रूस से इत्मीनान रहे इस गरज से अमीर काबुल से 12 लाख सालाना मदद का वादा भी किया गया  (1289 हिजरी )(1872 ईस्वी )में  लार्ड मिउ काले पानी के एक कैदी के हाथों मारा गया और लार्ड नार्थ ब्रूक वायसराय मुक़र्रर हुआ  इसके ज़माने में देसी रियसतों को भी अंग्रेजी तालीम का ख्याल दिलाया गया और अजमेर में मिउ कॉलेज कायम हुआ  (1293 हिजरी )(1876 ईस्वी ) में लार्ड नार्थ ब्रूक विलायत वापस गया और लार्ड लिटिन  वायसराय बनाया गया उसके ज़माने में देहली में बड़ा शानदार दरबार हुआ और (1293 हिजरी )(1876 ईस्वी  )में मलका विक्टोरिया की बादशाही का एलान किया गया इसी ज़माने में अफगानिस्तान पर कब्जा करने की कोशिश की गई लेकिन नुकसान के सिवा कुछ हासिल  न हुआ (1297 हिजरी )(1880 ईस्वी)  में  लार्ड रिपन वायसराय हो कर वापस आया उसने हिन्दुस्तानियों का  दिल हाथ में लेने की कोशिश की लार्ड लिटिन की सख्तियां दूर की अखबारात को आजादी दी और (1300 हिजरी )(1883 ईस्वी ) में मुनिस्पलटीओं  और डिस्ट्रिक्ट बोर्डों के लिए नए कानून बने जिन से इन्तिजाम में रियाया को भी हिस्सा मिला जो स्वराज का पहला जीना था  रिपन ने हाकिम और महकूम  अंग्रेज और हिंदुस्तानी के फ़र्क़ को दूर करने की कोशिश की   इस सिलसिले में सबसे पहले उसने अदालतों की तरफ तवज्जो की और चाहा की अंग्रेजों और हिन्दुस्तानियों के मामलात एक ही अदालत में तय हों  लेकिन अग्रेजों ने इतनी सख्त मुखालिफत की की कानून बन न सका उनकी ये जिद्द हिन्दुस्तानियों को बहुत बुरी लगी  और इंडियन नेश्नल कांग्रेस की बुनियाद पड़ी जिसका पहला इजलास  (1302 हिजरी )(1858 ईस्वी )में बंबई में हुआ और दादा भाई नौरोजी इसके सदर थे।
दादा भाई नौरोजी
लार्ड रिपिन के ज़माने में अफगानिस्तान के झगड़े भी ख़त्म हो गये अमीर अब्दुर्रहमान खान से दोस्ती कायम हो गयी  और लोगों को आये दिन के झगड़ों से निजात मिली (1301 हिजरी )(1884) में रिपिन की मुद्दत पूरी हुई और लार्ड डफरिन ने इन्तिजाम अपने हाथ में ले लिया  उसके ज़माने में (1303 हिजरी )(1886 ईस्वी )में बर्मा बिल्कुल अंग्रेजी हुकूमत में शामिल हो गया (1306 हिजरी )(1888 ईस्वी ) में लैंसडॉन  वायसराय मुक़र्रर हुआ  इसके ज़माने में कौंसिलों की और इस्लाह हुई (1310 हिजरी )(1892 ईस्वी ) और उनमें हिन्दुस्तानियों का दखल बढ़ा और उनके इख़्तियारात में इजाफा हुआ (1312 हिजरी )(1894 ईस्वी ) में अल्ग्न सानी  ने काम हाथ में लिया  उस ज़माने में सरहदी पठानों से सख्त लड़ाईयाँ रहीं  (1314 हिजरी )(1896 ईस्वी ) में  बम्बई से ताऊन  की इब्तिदा हुई   जिसने सरे मुल्क में आफत  मचा दी (1315 हिजरी )(1897 ईस्वी )में ऐसा सख्त कहत पड़ा की लोग बिलबिला उठे (1317 हिजरी )(1899 ईस्वी ) में अल्ग्न वलायत वापस गया और लार्ड कर्जन की वायसराई  शुरू हुई (1319 हिरजी )(1901 ईस्वी ) में मलका विक्टोरिया का इन्तिक़ाल हो गया और शाह एडरोड हफ्तुम तख्त पर  बैठा (1321 हिजरी )(1903 ईस्वी ) में देहली में बड़ा शानदार दरबार हुआ।
लार्ड कर्जन
कर्जन के ज़माने में हुकूमत  महकमों में काफी इस्लाह हुई (1322 हिजरी )(1904 ईस्वी ) में इमदादी अन्जुमनो  (को ऑपरेटिव सोसायटी ) का काम शुरू हुआ पंजाब में कर्ज जारी हुआ जिस से जमीं महाजनो के चुंगल  से  बच गईं पुरानी इमारतों की हिफाजत के आसार -ए कदीमा के नाम से एक नया महकमा क़ायम हुआ इसके ज़माने में मुल्क के अंदर कोई लड़ाई नहीं हुई  लेकिन फिर भी कहत  तावान और तक़सीम बंगाल की वजह से बड़ी  हल चल रही  बंगाल पहले बिहार उड़ीसा आसाम तक फैला हुआ था रकबा ज्यादा होने की वजह से लार्ड कजर्न ने  बंगाल के पूरबी और पश्चिमी ( मशरिक़ी और मगरिबी )  दो हिस्से कर दिए मुस्लमान इस तक़सीम के मुआफ़िक थे लेकिन हिन्दू बंगालियों ने इसकी सख्त मुख़ालिफत की  और सारे मुल्क में आफत मचा दी  आखिर (1329 हिजरी (1911 ईस्वी ) में देहली दरबार के मौके पर खुद शाह जार्ज पंचम ने इस फैसले को बदल दिया  पुराना बंगाल  पहले जैसा रहा आसाम एक चीफ कमिश्नर के सुपुर्द हुआ और बिहार उड़ीसा को मिलकर एक नया सूबा बनाया गया।  
लार्ड कर्जन के आखरी ज़माने में फौजी सिपेहसालार  लार्ड क्चज से अनबन हो गयी बात इतनी बड़ी लार्ड कर्जन ने इस्तीफा दे दिया और लार्ड मिंटो वायसराय मुक़र्रर हुआ उस जमाने में बड़ी  हल चल रही , कांग्रेस के अलावा (1324 हिजरी )(1906 ईस्वी ) में मुस्लिम लीग भी क़ायम हो गई तक़सीम बंगाल और बलकान और तरबुलस  की लड़ाइयों ने मुसलमानो में भी सख्त जोश पैदा कर दिया पहले ताक़त से लोगों को दबाने की कोशिश की गई लेकन ये तदबीर न चल सकी तो (1327 हिजरी )(1909 ईस्वी ) में कुछ इख़्तियारात दिए गए जो वायसराय लार्ड मिंटो और वजीर हिन्द लार्ड माले के नाम से मिंटो मार्लो इस्लाहात कहलाते हैं।
लार्ड हार्डिंग
(1328 हिजरी )(1910 ईस्वी ) में लार्ड मिंटो की मुद्दत पूरी हुई और लार्ड हार्डिंग ने मुल्क का इन्तिजाम अपने हाथ में लिया इसी साल  एडवर्ड हफ्तुम का इन्तिक़ाल हो  गया और शाह चार्ज पंचम तख़्त पर बैठा  12 दिसम्बर  (1911 हिजरी )(1329 ईस्वी )  देहली में बड़ा शानदार और दरबार हुआ जिस में बादशाह ने खुद भी  शिरकत की।   

नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है,  और चित्र गूगल से लिए गए हैं। 


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