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                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

AZAD HIND FOJ

आजाद हिन्द फौज 

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सुभाष चंद्र बोस 



मार्च (1942 ईस्वी ) में जापान ने बर्मा फतह कर लिया और उसके हवाई जहाज हिंदुस्तान तक पहुंचने लगे कलकत्ता और असम की सरहद पर बम्ब भी गिराये गए इस तरह लड़ाई हिंदुस्तान तक पहुंच गई बंगाल के नामवर लीडर सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजो की क़ैद से निकल कर मुल्क के बाहर चले गए बर्मा में उन्होंने बहुत से मुहिब्बे वतन नौजवानों की मदद से आजाद हिन्द फौज बनाई और आजाद हिन्द हुकूमत क़ायम की उन्होंने जापानी से समझौता कर लिया और फतह के बाद हिंदुस्तान की हुकूमत हिन्दुस्तानियों के हाथ में होगी।
सुभाष बाबू की इन कोशिशों के साथ मुल्क के अंदर भी आज़ादी की जद्दो जहद तेज हो रही थी (अगस्त 1944 ईस्वी ) में कांग्रेस ने ये तजवीज मंजूर की अंग्रेज हिंदुस्तान खाली कर दें और जगह -जगह अग्रेजों हिंदुस्तान छोड़ो के नारे लगने लगे हुकूमत भी सख्ती पर तुल गई और तहरीक को कुचलने  जोर लगा दिया बड़े -बड़े लीडरों के अलावा लाखों वतन दोस्त हिंदुस्तानी भी गिरफ्तार हुए और हजारों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा मगर हिन्दुस्तानियों ने हिम्मत नहीं हारी और बराबर आज़ादी की लड़ाई लड़ते रहे और अंग्रेजों ने हिन्दू -मुस्लिम इख़्तिलाफ़ात की आड़ लेनी चाही मगर आज़ादी की तड़प के सामने कोई तदबीर कामयाब न हो सकी और मुल्क को गुलामी से छुड़ाने की जद्दो -जहद जारी रही।

नोट - ये कहानी "हिदुस्तान  की कहानी "उर्दू पुस्तक का अनुवाद है,  और चित्र गूगल से लिए गए हैं। 


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