हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-46
हजरत निजामुद्दीन औलिया खामोश रहे
सुल्तान एक नादान बच्चा है और आप एक उम्र रसीदा बुजुर्ग हैं मल्का-ए- हिंद
ने दोबारा अर्ज किया मुबारक शाह की शोखियों का ख्याल न किजिये और उसे माफ फरमा
दीजिये।
हजरत निजामुद्दीन औलिया ने इस बार भी खामोशी इख्तियार की फिर जब बीबी मलिक
बहुत ज्यादा बे करार नजर आने लगीं तो आपने पुर जलाल लहजे में फरमाया मैं जब तक
उसकी खता माफ नही करूंगा तब तक वो चीज खत्म न हो जाए जिसकी वजह से बार बार खताएं
सर जद होती हैं।
मैं शेख की गुफ्तगू का मफहूम नहीं
समझी मल्का-ए- हिंद ने हैरत जदा लहजे में अर्ज किया आखिर वो कौन सी चीज है जिसका आप
खात्मा चाहते हैं
खातून आपके बेटे को इस बात का खतरा है कि मैं उसकी हुकूमत के खिलाफ बगावत कर
दूंगा हजरत निजामुद्दीहन औलिया ने वजाहत करते हुए फरमाया ये इक्तिदार ही तो है जो
उसे मुझसे बद गुमान रखता है और वो बार बार गुनाहे अजीम का मुरतकिब होता है लिहाजा
सुल्तान को चाहिये कि वो अपनी बादशाहत मेरे हवाले कर दे फिर उसके सारे खौफ और अंदेशे खत्म हो जाएंगे और वो आइंदा इस
गुनाह से महफूज रहेगा।
मल्का-ए-हिंद वापिस चली गईं औन उसने
तमाम सूरते हाल बेटे के सामने बयान कर दी कुतुबुद्दीन मुबारक शाह तकलीफ की शिद्दत
से तड़प रहा था मां की बात सुनते ही रोने लगा आपको मालूम कि मैं किस अजिय्यत में मुब्तिला हूं आप शेख के पास दोबारा जाएं और
उनसे कहें कि मैं अपनी बादशाहत उन्हें दी , बस वो मेरी सेहत के लिये दुआ कर दें पहली बार वो मगरूर हुक्मरां एक दरवेश के
सामने झुका हुआ था ।
बीबी मलिक दोबारा हजरत महबूब इलाही की खिदमत में हाजिर हुईं और उसने अपने बेटे
की दरख्वासत पेश की जवाब में हजरत महबूब
इलाही ने फरमाया मैं उनकी जुबानी
बातों को नहीं मानता कुतुबुद्दीन मुबारक
शाह से कहो कि वो हुकूमत से दस्तबरदार होने की दस्तावे लिखे, उस पर अपनी मोहर लगाए और तमाम अमीरों और वजीरों की तस्दीक कराए, फिर वो दस्तावेज मेरे पास भेजे, उसके बाद मैं तुम्हारे
बेटे के हक में दुआ करूंगा।
बीबी मालिक एक जहीन खातून थी उसने
हजरत निजामुद्दीन औलिया का इरशाद गिरामी सुनकर अर्ज किया हुजूर तो
तारिकुद्दुनिया है , फिर हुजूर को बादशाहत की
क्या जरूरत है?
मल्का-ए- हिंद की बात सुनकर हजरत महबूब इलाही ने
फरमाया मैं दुनिया का तारिक(छोड़ने वाला) भी हूं और जो लोग इस दुनिया का गलत इस्तेमाल
करते हैं , उनसे उनकी गल्तियों को तर्क कराने वाला भी हूं जब तक मेरी ये शर्त पूरी नही
होगी,
मैं उस वक्त तक मुबारक शाह के हक में हरगिज दुआ नहीं करूंगा।
बीबी मालिक फिर एक बार कुतुबुद्दीन मुबारक शाह के पास
पहुंचीं और उसने हजरत निजामुद्दीन औलिया की शर्त बयान कर दी कई दिन से पेशाब बंद
होने के सबब सुल्तान उस वक्त तकलीफ में
मुब्तिला था जैसे ही उसने हजरत महबूब इलाही की शर्त सुनी, चींख चींख कर कहने लगा सब अमीरों और वजीरों को जमा कर लो शेख
निजामुद्दीन जो चाहते हैं उन्हें दे दो मगर मुझे मरने से बचा लो, मौत सरहाने खड़ी है, बस वो मुझे काबू पाना ही चाहती है।
मुबारक शाह की फरयाद सुनकर बीबी मलिक ने उसी वक्त
सल्तनते हिंद के तमाम मंसब दारों को उसी कमरे में तलब कर लिया जहां उसका बेटा
बिस्तर पर पड़ा ऐडि़या रगड़ रहा था फौरी तौर पर एक दस्तावेज तैयार की गई जिसकी
इबारत हस्बे जेल थी।
मैं सुल्तान कुतुबुद्दीन मुबारक शाह बिन सुल्तान
अलाउद्दीन खिलजी मरहूम व रजा व रगबत अपने तमाम इख्तियारात शेख निजामुद्दीन को
तफवीज करता हूं आज से शेख निजामुद्दीन बदायूनी ही इस मुल्क के हुक्मरां हैं और उन्हीं
का हुक्म नाफिजुलअमल हैं।
इस इबारत के नीचे
सुल्तान कुतुबुद्दीन शाह की मोहर सब्त की गई , बाद में तमाम उमराए सल्तनत ने दस्तखत
किेये , फिर बीबी मालिक इंतिकाल-ए-
इक्तिदार के दस्तावेज लेकर हजरत निजामुद्दीन औलिया की खिदमत में हाजिर हुई।
हजरत महबूब इलाही कुछ देर तक उस दस्तावे को मुलाख्ता
फरमाते रहे, फिर आपने वो कागजी टुकड़ा बीबी
मालिक को वापस करते हुए फरमाया मुबारक शाह से कहो कि वो इस दस्तावे पर पेशाब करे
दे, उसकी तमाम तकलीफ दफा हो जाएगी
इंशाअल्लाह।
मल्का हिंदुस्तान खुशी खुशी बेटे के पास पहुंची और
हजरत निजामुद्दीन औलिया का इरशाद गिरामी उसके गौशे गुजार कर दिया मुबारक शाह किसी
जिबाह किये हुए जानवर की तरह तड़प रहा था उसने फौरन ही हजरत महबूब इलाही के हुक्म
के मुताबिक अमल किया और फिर वो तकलीफ चंद
लम्हों में दूर हो गई जिसने फरमा रवाए हिंद को तीन चार दिन तक ना काबिल बयान
अजिययत में मुब्तिला कर रखा था ।

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