हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.)भाग-50
हजरत निजामुद्दीन औलिया का मुरीद महेन्द्र देव अपने
रोजनामचे में लिखता है सुबह होते ही हिंदू फौज की भर्ती का हुक्म दे दिया गया, मस्जिदें जला दी गईं कुरआन मजीद फाड़ डाले गये और
तमाम अमीरों पर पहरे बैठा दिये गये और जितने बड़े ओहदे थे , वो सब हिंदुओं को दिये गये।
इस सूरत ने हजरत निजामुद्दीन औलिया को बहुत परेशान कर
दिया था आप अक्सर उदास रहा करते थे मोअतकिदीन और खिदमगारान लरजाखेज वाक्यात का
जिक्र करते तो हजरत निजामुद्दीन औलिया आबदीदा हो जाते और निहायत रिक्कत आमेज लहजे
में फरमाते लोगों कुदरत की आतिशे कहर भड़क रही है उसे तौबा
इस्तिगफार के पानी से ठंडा करो मैं डरता हूं कि कहीं हमारी बद आमालियां किसी और
बड़े अजाब का सबब न बन जाएं दीने इस्लाम की दीवारें ढाने की कोशिशें की जा रही हैं
और अल्लाह की आखिरी किताब को बे हुरमत किया जा रहा है आओ हम सब मिलकर रब्बे
जुलजलाल की पनाह ढूढें ,
उससे आफियत तलब करें कि वही अपने दीन को सर बुलंद करने वाला है और वही अपने नाम
लेवाओं की मुश्किल घड़ी में निजात देने वाला है।
खुसरू खान के बर सरे इक्तिदार आते ही महेन्द्र देव
बहुत ज्यादा परेशान रहता था एक दिन वो हजरत निजामुद्दीन औलिया की खिदमत में हाजिर
हुआ और अर्ज करने लगा सैयदी मुबारक शाह कत्ल हो गया मगर खतरा नहीं टला।
हजरत निजामुद्दीन औलिया ने पूछा तुम किस खतरे की बात
कर रहे हो?
महेन्द्र देव ने हाथ जोड़कर अर्ज किया मैं तो हर वक्त
आप ही फिक्र में मुब्तिला रहता हूं।
तुम्हें परेशान होने की क्या जरूरत है? हजरत महबूब इलाही ने मुस्कुराते हुए फरमाया।
सैयदी आप खुसरू खान को नहीं जानते? महेन्द्र देव के चेहरे से इन्तिहाई खौफ जाहिर हो
रहा था
मैं सिर्फ अल्लाह को जानता हूं हजरत निजामुद्दीन
औलिया ने निहायत इंकिसार के साथ फरमाया।
महेन्द्र देव नया नया मुसलमान हुआ था, इसलिये वो
दरवेशों के सब्र तहम्मुल और किनाअत व तवक्कुल से वाकिफ नहीं था घबराए हुए लहजे
में अर्ज करने लगा मैं खुसरू खान को खूब जानता हूं वो जाहिर में मुसलमान है मगर
अंदर से कट्टर हिंदू है उसका इस्लाम मस्नूई है जब मुबारक शाह जिंदा था तो खुसरू
खान मुझसे कहा करता था कि ये मुसलमान बाहर से इस मुल्क में आये हैं और उन्होंने
हम हिंदुओं को गुलाम बना लिया हैं मैं एक दिन तुझे दिखाऊंगा कि इन मुसलमानों को
कैसी इबरतनाक सजा दी जाएगी मैंने उस बदबख्त से कहा तू अपने मजमूम इरादों से बाज आ
जा वर्ना ये तेरी इंतिकामी रविश पूरी हिंदू कौम को मुसीबत में डाल देगी।
फिर उसने क्या जवाब दिया? हजरत निजामुद्दीन औलिया ने महेंन्द्र देव से पूछा वो एक कीना परवर हिंदू हैं
महेन्द्र देव ने अर्ज किया उस पर जरा भी मेरी बातों का असर नहीं हुआ खुसरू खान उस
वक्त भी मुसलमानों की बीख कुनी के मंसूबे बना रहा था जब वो मुबारक शाह का गुलाम
था आज तो उसके हाथ में मुकम्मल इक्तिदार है खुदा ही जानता है वो क्या करेगा।
हजरत निजामुद्दीन औलिया महेन्द्र देव का इज्तिराब
देखकर मुस्कुराए फिर निहायत शीरीं लहजे में फरमाया महेन्द्र देव आखिर तुम भी तो
हिंदू हो, क्या तुम अलाउद्दीन खिलजी के
खिलाफ नहीं थे? क्या सुल्तान मरहूम ने तुम्हारे
मुल्क(देव गढ़ दक्किन) को फतह नहीं किया? क्या उसके बेटे मुबारक शाह ने तुम्हारे इलाके को ताराज नहीं किया?
सैयदी ये दुरूस्त है महेन्द्र देव ने अर्ज किया मैं
कल तक हिंदू था मगर अब मैंने सच्चे दिल से इस्लाम कुबूल कर लिया है।
अगर तुम सच्चे दिल से मुसलमान हुए हो तो फिर सारे
मामलात अल्लाह पर छोड़ दो
हजरत निजामुद्दीन औलिया ने अपने मुरीद की तालीफ कल्ब
के लिये फरमाया।
खुसरू खान हिंदू हुकूमत कायम करना चाहता था महेन्द्र
देव के चेहरे से बदस्तूर खौफ व परेशानी झलक रही थी और उसने इस काम का आगाज भी कर
दिया है खुसरू खान आपका बद तरीन दुश्मन है वो मुझसे कहा करता था जब तक ये दरवेश
देहली में मौजूद है , उस वक्त तक हिंदू हुकूमत कायम
नहीं हो सकती, वही बदबख्त मुबारक शाह को भी
बरगलाया करता था।
ये मेरा और खुसरू खान का मामला है तुम क्यों परेशान
होते हो, ?हजरत निजामुद्दीन औलिया ने महेन्द्र देव
की परेशान कुन गुफ्तगू सुनकर निहायत मुतमइन लहजे में फरमाया अल्लाह ही
बेहतर जानता है कि किसकी हुकूमत होगी और कौन बे निशान हो जायेगा।
- हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-46
- हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-47
- हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-48
- हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-49

Comments
Post a Comment