लालची कुत्ता
शहर के करीब किसी गांव में एक कुत्ता
रोजाना सुबह अपनी रोजी की तलाश में घर से निकलता था और गोश्त की दुकान के बाहर
पड़ी हुई हड्डीयों को जमा करता और घर लाकर अपने घर वालों के साथ मिलकर खाया करता
था।
एक बार कुत्ता भूका था, बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कोई
हड्डी नहीं मिली आखिर वो घूमते घूमते एक गोश्त की दुकान पर पहुंचा जहां लोग गोश्त
खरीद रहे थे। कसाई लोगों को गोश्त बेच रहा था।
कुत्ता धीरे धीरे दुकान की तरफ
बढ़ा और कसाई से नजर बचाकर हड्डी उठाई और अपने घर की तरफ दौड़ लगाई।
कसाई ने कुत्ते की ये हरकत देखी
तो कुत्ते की पीछे भागा अब तो कुत्ता बहुत घबराया और तेजी से दौड़ने लगा यहां तक
कि वो कसाई की पहुंच से बहुत दूर निकल गया.... लेकिन वो अपने घर जाने की बजाय नहर
की तरफ आ गया।
कुत्ते ने मुंह में हड्डी दबाई
हुई थी। उसने नहर में देखा तो उसे अपनी ही परछाई नजर आई। कुत्ता समझा कि पानी में
एक और कुत्ता है जिसके पास हड्डी भी है
लालची कुत्ते ने सोचा कि क्यों न मैं ये हड्डी छीन लूं तो मेरे पास दो
हड्डीयां हो जायेंगी। इस इरादे से उसने जैसे ही भोंकने के लिये मुंह खोला तो उसके
मुंह से हड्डी पानी में जा गिरी।
अब उसने देखा तो पानी में मौजूद
कुत्ते के मुंह में भी हड्डी नहीं थी।
अब उसकी समझ में आया कि जिसेे वो
दूसरा कुत्ता समझ रहा है हकीकत में वो उसी की परछाई थी लेकिन अब इस समझ का क्या
फायदा।
लेकिन इतनी बात उसके समझ में आ गई
कि..... लालच बुरी बला हैं।
लालच का पहला नुकसान ये होता है कि
अपने पास मौजूद नेअमत भी छीन ली जाती है हमें किसी बच्चे की घड़ी नजर आये , किसी की कलम नजर आये तो उसको
ललचाती हुई निगाह से नहीं देखना चाहिये और न अपने अम्मी अब्बू से जिद करके
मांगनी चाहिये बल्कि अल्लाह तआला ने जैसी भी हमको कलम या घड़ी दी है उस पर शुक्र
अदा करना चाहिये, हां अल्लाह तआला से जरूर उससे बड़ी नेअमतें मांगते रहना
चाहिये मगर लालच से बचते रहना चाहिये अब दुआ करें अल्लाह किसी बच्चे और बच्ची
को लालची न बनाये, लालच की बुरी आदत से सब की हिफाजत फरमाये ।
आमीन

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