जॉर्ज वाशिंगटन
एक शरीफ आदमी ने निहायत शौक से घर
के पास एक छोटा सा बाग लगा रखा था जिसे वो हर
दिन अपने हाथ से सींचता। एक दिन वो कहीं बाहर गया हुआ था कि उसका लड़का हाथ
में आरी लिये हुए बाग की सैर को निकला और उसने आरी को आजमाते आजमाते सबसे अच्छा
पेड़े काट दिया।
शाम को बाप ने आकर बाग को देखा तो
उसे पेड़ को कटा हुआ देखकर बहुत गुस्सा हुआ हर एक से पूछने लगा कि ये पेड़ किसने
काटा है।
इतने में बेटा भी आ गया। बाप ने
उससे पूछा तो उसने साफ कह दिया। आप नाराज तो होंगे मगर मैं झूठ नहीं बोलूंगा ये
पेड़ मैंने ही काटा है।
बाग का शौकीन बाप इतना गुस्सा हो
रहा था लेकिन बेटे की सच्चाई देखकर उसने
खुशी से अपने बेटे को गोद में उठा लिया और कहा। बेटा मुझे तुम्हारी सच्चाई से
इतनी खुशी हुई कि पेड़ कट जाने का दुख: इसके सामने कोई चीज नहीं।
शाबाश!
इसी तरह हमेशा सच बोला करना। बाप
के इस माफ कर देने और शाबाश देने का लड़के
पर इतना असर हुआ कि उसने उम्र भर फिर कभी
झूठ नहीं बोला। उसकी सच्चाई सारे शहर में
मश्हूर हो गई।
उस लड़के का नाम जार्ज वाशिंगटन
था।
जिसने अमेरिका को आजाद कराया और
वही इस बहुत बड़े देश का सबसे पहला राष्ट्रपति चुना गया। अमेरीका की राजधानी का
नाम भी इसी लड़के के नाम पर रखा गया है।

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