जल बचाओ जीवन बचाओ
जल हमारे शरीर और जीवन की बुनियादी आवश्यकता है। जल को सभी जीवित प्राणियों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में भी जाना जाता है और इस वजह से उसे ‘जीवन’ के रूप में भी नामांकित किया गया है। इस धरती पर जल के बिना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। धरती के तीन- चौथाई हिस्से में जल है किंतु इसमें से सिर्फ 2 प्रतिशत ही हमारे लिए उपयोगी है। भारत में कुछ स्थानों पर लोग जल की कमी और सूखे के हालात का सामना करते हैं, जबकि अन्य स्थानों पर रह रहे हैं अत्यधिक जल उपलब्ध है, उन्हें जल का महत्व एवं जल संरक्षण के महत्व का एहसास होना चाहिए।
हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब हमें स्वच्छ जल बचाने एवं इसे हमारे जरूरत के हिसाब से खर्च करने की आवश्यकता है। भारत एवं अन्य देशों के कई स्थानों में लोग जल की अत्यधिक कमी से जूझ रहे हैं। वे सरकार द्वारा टैंकों से की जा रही जल की आपूर्ति या लंबी दूरी पर स्थित कुछ प्राकृतिक जलाशयों पर निर्भर रहते हैं । वे जल की व्यवस्था करने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। जल की कमी की स्थिति उन लोगों के लिए और भी दयनीय है जिनके पास अपनी दैनिक जरूरतों जैसे पीने, नहाने-धोने इत्यादि के लिए भी पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध नहीं है।
भारत दुनिया भर के उन देशों में से एक है जो आज जल की कमी की विकराल समस्या का सामना कर रहा है। भारत में राजस्थान एवं गुजरात के कुछ हिस्से तो ऐसे हैं जहां घरों की महिलायें सिर्फ बर्तन भर जल के लिए नंगे पैर लंबी दूरी तय करती हैं। बैंगलूर जैसे कुछ शहरों में लोग स्वच्छ जल की एक बोतल खरीदने के लिए 25रू से 30 रू तक चुकाते हैं। हाल ही में किए गए एक अध्ययन के अनुसार 25 प्रतिशत शहरी आबादी को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है। गर्मियों के महीनों में जल की दैनिक आवश्यकता अधिक हो जाने की वजह से लोग और भी अधिक समस्या का सामना करते हैं। कुछ क्षेत्रों में जल निकायों का निजीकरण जल की कमी का मुख्य कारण है। जल की कमी की समस्या से निपटने के लिए हम विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वर्षा जल संरक्षण की विभिन्न तकनीकों से में से सबसे प्रभावी एवं उपयुक्त विधि है।
वनरोपण भी सतही अपवाह कम कर देता है एवं भूजल को रिचार्ज करता, भूमिगत जल संरक्षण को बढ़ावा देता है। ऐसे तरीके अपनाकर हम प्राकृतिक रूप
से और भी अधिक जल का संरक्षण कर सकते हैं और साथ ही भविष्य के लिए इसकी उपलब्धता
सुनिश्चित कर सकते हैं। हमें प्रतिज्ञा लेनी होगी एवं हमारा आदर्श वाक्य होना
चाहिए -‘ जल बचाओ’ जीवन बचाओ, पृथ्वी बचाओ।

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