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                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Alim ki umer

 आलिम की उम्र

 


किसी ने एक बड़े इतिहासकार से पूछा। आपकी उम्र कितनी होगी?

इतिहासकार ने कहा। यही कोई सात आठ हजार साल की ।

उसने कहा शक्‍ल से तो आप  चालीस साल के लगते हो।

इतिहासकार ने जवाब दिया आपका सोचना बिल्‍कुल सही है कि मुझे इस दुनिया में आये हुए चालस साल ही गुजरे हैं मगर इल्‍म ने मेरी उम्र इतनी बढ़ा दी कि आज से सात आठ हजार साल पहले की बातें मुझे इस तरह याद हैं कि , मानो कि मेरे सामने हो रही हैं।

वो तमाम बड़े शाही दरबार जिन्‍हें मामूली आदमी देख नहीं सकते थे और ऐसी लड़ाईयां जिनमें जाते हुए बड़े बड़े बहादुरों के होश उड़ जाते थे । ,किताब खोलते ही मेरे सामने आ जाती हैं। भाषाएं मेरे सामने बनती हैं और बिगड़ती हैं। मजहब मेरे सामने पैदा होकर दूर दूर तक फैल जाते हैं। सल्‍तनतें मेरे सामने बनकर बिगड़ जाती हैं। और पुरानी जगहें नये लोग संभाल लेते हैं।

हर जमाने के मश्‍हूर आदमियों के नामों और उनके अच्‍छे बुरे कामों को जानता हूं।

हर मजहब के आलिमों और देश  विदेश के बादशाहों को जानता हूं। मुझे मालूम है कि जहां अब तुम्‍हारे शहर बसते हैं, बाग महकते , रेल और मोटर चलते देख रहे हो, वहां इससे पहले ऐसे सुनसान जंगल थे कि आदमी वहां कदम रखते हुए डरते थे।

मुल्‍क , रेगिस्‍तान , पहाड़, बस्तियां और वीराने मेरे देखते देखते कुछ से कुछ हो गये। इल्‍म पढ़ोगे तो ऐसी ही उम्र पा लोगे।

 

 

 

 

 

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