Skip to main content
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Comptroller and Auditor General Of India (CAG)

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक(कैैैैग)


 


 

भारतीय संविधान में अनुच्‍छेद 148 से 151 कैग, नियंत्रक व महालेखा परीक्षक पद, उसके और कर्तव्‍यों की व्‍याख्‍या करते हैं। कैग भारत के सुप्रीम ऑडिट इंस्‍टीटूशन का प्रमुख होता है और देश की समस्‍त वित्तिय प्रणाली संघ नियंत्रण करता है। उसे इंडियन ऑडिट व अकाउंट सर्विसेज से सहायता मि̺लती है। 1860 में इंडियन ऑडिट एवं अकाउंट डिपार्टमेंट बना।

 तब सरकारी लेखा व परीक्षण कार्य एक साथ थे और दोनों महालेखा परीक्षक के कार्यक्षेत्र  में ही आते थे। 1950 में संविधान लागू होने के बाद इसकी शक्तियां बढा दी गई और पद का नाम नियंत्रक व महालेखा परीक्षक कर दिया गया। भारतीय संविधान के अनुसार, सरकार का यह दायित्‍व है कि बजट का निर्माण करके संसद में पेश करे। चूंकि बजट संसद में पास होता है, इसलिए संसद का सरकारी खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होता है। संसद कैग की रिपोर्ट के जरिए सरकार के किए गए धनराशि के अनुचित प्रयोग को जांच के दायरे में ला सकती है। चयन और योग्‍यता कैग की नियुक्ति राष्‍ट्रपति करता है। उसे पद से उसी आधार प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है जैैैैसे उच्‍चतम न्‍यायालय के न्‍यायधीश को हटाया जाता है। कैग की पदावधि उसके पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष होती है। 65 वर्ष  की आयु पूरी करने पर भी वह पद से हट जाता है।


 वह किसी भी समय राष्‍ट्रपति को अपना त्‍याग पत्र दे सकता है। अपने पद से हटने के बाद वह भारत सरकार या राज्‍य सरकार के अधीन कोई भी पद स्‍वीकार नहीं कर सकता। कार्य व अधिकार कैग देश, राज्‍य और संघ शासित प्रदेशों के फंड से लिए खर्च की जांच करता है। आकस्मि̺क निधि से ली गई राशि, पब्लिक अकाउंट, सरकारी ऑफिस या विभागों में स्‍टोर्स  अकाउंट और स्‍टाक की जांच के दायरे में आते हैं। केंद्र और राज्‍य सरकार को अपने अकाउंट किस प्रकार व्‍यवस्थित  करने हैं, यह काम भी कैग का होता है। संविधान में यह बात भी निहित है कि केंद्र या राज्‍य सरकार राष्‍ट्रपति के निर्देशनुसार अपने अकाउंट रखेगी।

 राष्‍ट्रपति इसके लिए कैग से सलाह लेगा। केंद्र और राज्‍य सरकार के इन अकाउंट की रिपोर्ट कैग संसद या राज्‍य विधानमंडल में पेश करने से पहले राष्‍ट्रपति या राज्‍यपाल को सौंपता है। भारतीय कैग पद कुछ मायनों में अन्‍य देशों से अलग है। भारतीय कैग के अंतर्गत लेखा व परीक्षण, दोनों कार्य आते हैं। वह न तो संसद का कोई अधिकारी होता है और न ही वह कार्यपालिका का कार्यकारी अंग होता है। यहीं नहीं, कंपनी एक्‍ट 1956 उसे सरकारी कंपनियों के ऑडिट की जिम्‍मेदारी देता है। कैग को उन संस्‍थाओं और प्राधिकरणों की भी जांच का अधिकार है, जिन्‍हें सरकार वित्तीय सहायता देती है। बीते सालों में कैग दिल्‍ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपनी रिपोर्ट के चलते काफी चर्चा में रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

Hazrat Nizamuddin Auliya (rh.) part-66

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) पाठ-66   ‘’ मैं किस चीज का हिसाब पेश करूं ? हजरत निजामुद्दीन औलिया ने पुर जलाल लहजे में फरमाया वो सारी रकम बैयतुलमाल का हिस्‍सा थी जो हकदारों को पहुंच गई- मैंने उसमें से एक तुनका भी अपनी जात पर खर्च नहीं किया अगर मैं ऐसा करता तो यकीनन सुल्‍तान को इस रकम का हिसाब पेश कर देता- ‘’ सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक ने हजरत निजामुद्दीन औलिया का जवाब बड़ी हैरत से सुना। फिर अपने कारिन्‍दे से मुखातिब हुआ। कहीं यह तेरी जहनी इख्तिरा तो नहीं ? ये कैसे मुमकिन है कि एक दरवेश   ने खड़े खड़े पांच लाख तिनके दूसरों पर लुटा दिये ? आखिर बाकी दरवेशों ने किस लिये रकम महफूज रखी और वापस मांगने पर क्‍यों लौटा दी ? सुल्‍तान आली कद्र ? कारिन्‍दे ने   झुकते हुए अर्ज किया मै दूसरे दरवेशों के बारे में तो नहीं जानता कि उनका मिजाज क्‍या है मगर हजरत महबूब इलाही की जात गिरामी से जरूर वाकिफ हूं कि आप की सखावत का अंदाज यही है। सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक खामोश हो गया और फिर उसने अपने भरोसे के   लोगों के जरीये हजरत निजामुद्दीन औलिया के बारे में तहकीकात कराई फिर बड़ी मुश्किल...

CHALAAK NEWALA

चालाक नेवला  आपने बहुत से जानवरों के किस्से और मालूमात सुनी होंगी लेकिन आपको एक अजीब जानवर का हाल सुनाते हैं इससे पहले आपको इसके बाते में कुछ मालूमात भी हो तो बेहतर है - तो सुनिए ! ये चूहों , साँपों , और मगर मच्छो का दुश्मन है - मगर मच्छ अपना मुँह खुला रखता है और उसके मुँह में घुसकर उसके पेट में पहुंच जाता है और उसकी आंते काट देता है और फिर बहार निकल आता है - हां तो फिर आप इंतजार में होंगे आखिर ये कौनसा जानवर है  तो लीजिये ये जानवर नेवला है नेवला बहुत होशियार जानवर है - एक बार एक नेवल एक चूहे का शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़ा , चूहा अपनी जान बचाने के लिए एक दरख़्त पर चढ़ गया - जब उसको भागने का कोई रास्ता न मिला तो वो एक शाख का पत्ता अपने मुँह में दबाकर लटक गया नेवले ने चूहे जब ये चालाकी देखि तो उसने अपनी मादा को आवाज दी - मादा उसकी आवाज सुनकर दरख़्त के निचे आई तो नेवले ने उस शाख को जिस पर चूहा लटक रहा था काट दिया शाख के काटने से चूहा नीचे गिरा गिरते ही मादा ने उसका शिकार कर लिया -  नेवला चोर भी होता है जब उसको सोने चाँदी की कोई च...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-20]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-20) औरंगजेब ने कभी सरकारी खजाने से एक पाई भी न ली उसका मामूल था कि सुबह सवेरे उठकर नमाज अदा करता कुरआन मुकद्दस की तिलावत करता ।उसके बाद कुरआन मुकद्दस के नुस्‍खे अपने हाथ से तैयार करता उसका खाली वक्‍त इबादत में गुजरता उसके साथ औरंगजेब आलमगीर हाफिज कुरआन भी था 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे आराम करता था। शरीअत और हुजुर सललल्‍लाहु अलैहि वसल्‍लम का तरीका उसकी जिंदगी थीं । इतिहासकार लिखते हैं कि शरीअत ही औरंगजेब का लिबास था उसने अपनी पूरी जिंदगी एक दीनदार और पाकबाज इंसान की तरह गुजारी आम बादशाहों के उलट उसका जिंदगी जीने का तरीका ही सबसे अलग था। आखिरी दिनों में उसने अपने बेटे शहजादा आजम को एक खत लिखा जो उसके अच्‍छे किरदार को दिखाता उसने लिखा था। मेरी पैदाईश पर अनगिनत लोगों ने जश्‍न मनाया मगर मैं जब इस दुनिया से जा रहा हूं तो अकेला हूं। जिंदगी के मकसद बड़े होते हैं और मुझे उन लम्‍हों के बेकार जाने का सदमा है जो खुदा की इबादत और उसकी याद के बगैर गुजरे। काश मैं लोगों की खिदमत अपनी मंशा के मुताबिक कर सकता इसलिए कभी कभी एहसास होता है कि मेरी जिंदगी बे मकसद थी जो बेका...