काम बड़ा या नाम
एक रात रूश्तम के अस्तबल से किसी
चोर ने उसका घोड़ा चुरा लिया। हालांकि रूश्तम उस वक्त जाग रहा था लेकिन उसका ख्याल
था कि उसके घोड़े पर कोई सवारी नहीं कर सकता इसलिये वो चुपचान तमाशा देख रहा था ।
लेकिन जब चोर घोड़े पर सवार होकर उसे बाहर ले गया तो रूश्तम चुप न रह सका । घर से
निकलकर तेजी से दौड़कर चोर के पास पहुंचा और छलांग लगाकर घोड़े की पीठ पर सवार हो
गया।
रूश्तम बैठ तो गया मगर चोर बहुत बहादुर था न डरा और न
घबराया बल्कि उससे पूछने लगा कि तुम कौन
हो ? रूश्तम ने कहा। पहले तुम बताओ । चोर बोला मैं तो चोर हूं
।‘’ रूश्तम ने कहा ‘’ मुझे भी वही समझ लो।‘’
रूश्तम ने चोर को इतना निडर देखा
तो चुपके से उसे पांच साल जोर के मुक्के लगा दिये मगर उन मुक्कों को चोर पर कोई
असर नहीं हुआ बल्कि वो रूश्तम से कहने लगा अरे भाई मजाक क्यों करते हों। आराम से
क्यों नहीं बैठते ।
चोर की बातें सुनकर रूश्तम के होश
उड़ गये कि जो शख्स उसके मुक्कों से नहीं डरा बल्कि उन्हें मजाक बता रहा है।
उसको कुश्ती में कैसे हराया जा सकता है।
बस अब कोई और दाव खेलना चाहिये ये सोचकर रूश्तम ने घबराई हुई आवाज में कहा
‘’ दोस्त ! मैं तो चला! वो देखो घोड़े का मालिक रूश्तम आ रहा है। ये सुनते
ही चोर फौरन कूद पड़ा और रूश्तम घोड़ा लेकर घर चला गया। हकीकत में कई बार नाम भी बड़ा काम दे जाता है।
मगर नाम भी बगैर काम के नहीं बनता।

Comments
Post a Comment