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                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

opration vijay

ऑपरेशन विजय




19 सितंबर देश के इतिहास में उस तारीख के रूप में दर्ज है जब भारतीय सेना ने गोवा , दमन और दीप में प्रवेश करके इन इलाकों को 450 साल के पुर्तागाली अधिपत्‍य से आजाद कराया था। ब्रिटिश और फ्रांस के सभी औपनिवेशिक अधिकारों को खत्‍म होने के बाद भी गोवा, दमन और दीव में पुर्तगालीयों का शासन था। 

भारत सरकार की  बातचीत की मांग को पुर्तगाली बार बार ठुकरा दे रहे थे। जिसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय के तहत एक छोटा सेन्‍य दल भेजा। 18 दिसंबर 1961 के दिन ऑपरेशन विजय की कार्यवाई की गई। भारतीय सैनिकों के दल ने गोवा के बॉर्डर में प्रवेश किया। 36 घंटे से भी ज्‍यादा  वक्‍त तक जमीनी, समुद्री और हवाई हमले हुए। इसके बाद पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के भारतीय सेना के समक्ष 19 दिसंबर को आत्‍मसमर्पण किया। गोवा पिश्‍चमी भारत में बसा एक छोटा सा राज्‍य  है।  छोटे से आकार के बावजूद यह विशाल ट्रेेड सेंटर था और व्‍यापारियों को आ‍कर्षित करता था।

 प्राइम लेकेशन की वजह से गोवा की ओर मौर्य, सातवाहन और भोज राजवंश  आकर्षित हुए थे। 1954 में, निशस्‍त्र भारतीयों ने गुजरात और महाराष्‍ट के बीच स्थित दादर और नागर हवेली के ऐंक्‍लेव्‍स पर कब्‍जा कर लिया पुर्तगाल ने इसकी शिकायत हेग में (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जिस्टिस) में की। 1960 में फैसला आया जिसमें लिखा था कि कब्‍जे वाले क्षेत्रों पर पुर्तगाल का अधिकार है। 

कोर्ट ने साथ में ये फैसला दिया कि भारत के पास अपने क्षेत्र में पुर्तगाली पहुंच वाले ऐंक्‍लेव्‍स पर उसके दखल को न मानने का पूरा अधिकार भी है। 1 सितंबर 1955 को, गोवा में भारतीय कोन्‍सुलेट को बंद कर दिया गया। जिसके बाद भारत ने पुर्तगाल को बाहर करने के लिए गोवा में ऑपरेश विजय शुरू किया, क्‍योंकि यथास्थिति बरकरार रखी गई थी, 18 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने गोवा, दमन और दीव पर चढ़ाई कर  ली।  इसे ऑपरेशन विजय का नाम दिया गया। पुर्तगाल सेना को यह आदेश दिया गया तो वह। आखिरकार सीजफायर का ऐलान हो गया। जिसके बाद भारत ने पुर्तगाल के अधीन रहे इस क्षेत्र को भारतीय  सीमा में मिला लिया। 

पुर्तगाल के गवर्नर जनरल वसालो इ सिल्‍वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन थापर के सामने सरेंडर किया। 30 मई 1987 को गोवा को राज्‍य का दर्जा दे दिया गया जबकि दमन और दीव केंद्रशसित प्रदेश बने रहे। गोवा मुक्ति दिवस प्रति वर्ष 19 दिसम्‍बर को मनाया जाता है।

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