सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
एक बार की बात निराला जी लिखी हुई किताबे बेचने निकले। उन किताबों को बेहतरीन दाम पाकर वे बहुत खुश हुए और ठाठ से घर को चल दिए। तभी उनकी निगाह एक औरत पर गयी जो कि तपती दोपहर में एक पेड़ की छाया में बैठी भिख मांग रही थी। उसकी दशा बहुत खराब थी जिसे देख निराला जी तुरंत ही वहा थम गये और उस औरत की और जाने लगे। निराला जी को अपने पास आता देखकर वह औरत अपने दोनों हाथ फैलाकर उनसे भीख मांगने लगी।
निराला जी जब उस औरत के पास पहुंचे तो तुरंत बोले की आज आपको कुछ नहीं मिला। तो बुढी औरत ने कहा की बेटा आज सुबह से ही कुछ नहीं मिला है। तो निराला जी ने कहा कि आपने मुझे बेटा कहा तो आप मेरी माता समान हुई और यह कैसे हो सकता है कि निराला की माता जी ऐसे ही राह पर बैठकर भीख मांग रही हैं। यह सुनकर उस लाचार औरत की आखों में पानी भर आया ।
फिर निराला जी ने कुछ पैसे उस औरत के हाथ पर रखते हुए बोले कि मैं आपका बेटा और आप मेरी माता। अब बताइए कितने दिन तक आप भिख नहीं मांगेंगी। तो औरत ने कहा कि एक दो दिन तक नहीं मांगूगी बेटा। फिर निराला जी ने उसे कुछ और पैसे दिए और पूछा की अब कितने दिन तक नहीं मांगेंगी। तो औरत ने कहा कि बीस दिन तक नहीं मांगुंगी। ऐसा करते करते निराला जी ने सारे पैसे उस औरत के पास चले गये। वह बस हर बार पुछते रहे और पैसे उस औरत की गोद में डालते रहे यह सब एक राहगीर देख रहा था और दंग रह गया। वहीं दूसरी तरफ इतने सारे पैसे देखकर वह औरत भावुक हो गयी और निराला जी से कहने लगी अब वह कभी भी भिख नहीं मांगेगी।
इतना सुनकर निराला जी अपने एक खास मित्र के घर गये और पहुंचते ही निराला जी ने अपने मित्र को रिक्शे का किराया भरने को कहा। जैसे ही उनका मित्र किराया देने लगा अचानक से रिक्शे वाले ने सबकुछ उनके मित्र को बता दिया। यह सब बातेंं सुनकर निराला जी के मित्र को रोना आ गया और रिक्शे वाले को उसके पैसे देकर विदा कर दिया।
आसान नहीं होता है किसी अनजान की राह चलते मदद कर
देना। निराला जी ने जो किया वह बेहद सराहनीय था जो लोग महान होते है उनका दिल उदार
और बहुत ही कोमल होता है। उनसे किसी की भी परेशानी नहीं देखी जाती हैं। वे लोग
दूसरों के सुख में ही अपना सुख देखते हैं। ऐसे लोग अपने पराय में कोई अंतर नहीं
रखते हैं।वे सबको अपना परिवार ही मानते हैं। हम भी अगर लोगों की छोटी छोटी बातों
में मदद कर दें तो दूसरों की खुशी का कारण बन पायेंगे और मानवता की नींव रख
पायेंगे।

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