मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-13)
अब इब्राहीम लोधी के कान खड़े हो
चुके थे । जिस वक्त बाबर बलख की बगावत को दबाने के लिये वापस चला गया था उस वक्त
इब्राहीम लोधी को ये उम्मीद हो गई थी कि वो मुगलों के हमलों से बच जायेगा लेकिन
अब बाबर दोबारा वापस आ गया था। तब इब्राहीम लोधी ने अपने लश्कर का बहुत बड़ा हिस्सा
अलग किया और उस हिस्से को अपने एक सालार हामिद खान की सालारी में दिया और उसे
बाबर पर हमला करने के लिये रवाना किया।
इब्राहीम लोधी का ये लश्कर जमना
के दांए किनारे दक्षिण पश्चिम की तरफ हिसार फरोजां के तरफ हामिद खान की कमान में
आगे बढ़ रहा था। बाबर को जब उसके लश्कर की आने की खबर मिली तो उसका मुकाबला करने
के लिये उसने अपने बेटे हुमायुं को रवाना किया। हुमायुं ने इस हिम्मत व जुराअत से
इब्राहीम लोधी के लश्कर से टकराया कि उसने इब्राहमी लोधी के लश्कर को शिकस्त दी
इस तरह इब्राहीम लोधी के उस लश्कर के एक बड़े हिस्से को हुमायुं ने काट कर रख
दिया बाकी अपनी जानें बचाकर भाग खड़े हुए।
अब बाबर अंबाला की तरफ बढ़ा और
जमना के किनारे से होता हुआ वो पानीपत के मैदान में जा पहुंचा।
बाबर के पास उस वक्त पच्चीस हजार
फौज थी दूसरी तरफ इब्राहीम लोधी भी अपनी फौज के साथ पानीपत के मैदान में
पहुंचा इस तरह से दोनों लश्कर आमने सामने
आ गये।
20 अप्रैल 1526ई. को बाबर को उम्मीद
थी कि इब्राहीम लोधी सख्त हमला करेगा। लेकिन इब्राहीम लोधी मैदान में यूं ही पड़ा रहा उसने जंग की शुरूआत नहीं
की।
दूसरी तरफ बाबर यूं ही बैठना नहीं
चाहता था वो जल्द से जल्द जंग शुरू करना चाहता था उसने इरादा किया कि इब्राहीम लोधी पर हमला करके उसे जंग के लिये भड़काया जाए बाबर की ये चाल
काम्याब रही 21 अप्रैल को सुबह इब्राहीम लोधी के लश्कर में हलचल हुई । इब्राहीम
लोधी ने जंग करने का इरादा कर लिया । उस वक्त इब्राहीम लोधी की फौज लगभग एक लाख
थी और उसके पास एक हजार जंगी हाथी भी थे
जबकि बाबर के पास 25 हजार सिपाहियों को लश्कर था।
आखिरकार जंग शुरू हुई बाबर के लश्कर
के बाएं तरफ इब्राहीम लोधी के सिपाहियों ने बाबर को नुकसान पहुंचाया मरकजी लश्कर की तरफ से उनकी मदद के लिये
सिपाही भेजे गये अब जो मुगलों ने अपने रिवायती हमलों की शुरूआत की और सख्त हमले
किये तो इब्राहीम लोधी के लश्कर के सिपाहियों को पीछे ढकेलने में काम्याब हो
गये। आखिरी मौके पर बाबर ने अपने तोपचियों
को तोपें चलाने का हुक्म दिया ऐसा होना था कि इब्राहीम लोधी के हाथी बेकार हो गये
अब इब्राहीम लोधी के लश्कर पर मुगलों की तरफ से तोपों के गोलों के अलावा तीरों की
बारिश शुरू हो गई थी।
दोपहर तक घमासान का युद्ध हुआ
आखिरकार इब्राहीम लोधी को हार का समाना करना पड़ा उसका लश्कर हार गया। इस जंग में
इब्राहीम लोधी के 15हजार सिपाही मारे गये वो खुद भी जख्मी हुआ और इसी हालत में इस
दुनिया से चला गया।
ग्वालियार का राजा विक्रमजीत भी
जंग में इब्राहीम लोधी की मदद कर रहा था वो भी बुरी तरह जख्मी हुआ था।
कहा जाता
है कि जब बाबर और इब्राहीम लोधी के बीच पानीपत के कस्बे के पूरब की तरफ
घमासान जंग हो रही थी और सुल्तान इब्राहीम लोधी के ज्यादातर लश्करी जंग में
मारे जा चुके थे उसके अलावा कुछ सालार और बहुत से लश्करियों ने जो इब्राहीम लोधी
से नफरत करते थे बगैर लड़े ही जंग से मुंह फेरकर पानीपत के मैदान से निकल जाने में
अपनी भलाई समझी थी उस वक्त इब्राहीम लोधी अपने मुहाफिजों और लश्कर के दूसरे वफादार सिपाहियों के साथ
जंग का नजारा कर रहा था।
इस मौके पर इब्राहीम लोधी का एक
सालार जिसे इब्राहीम लोधी बहुत पसंद करता था। अपने घोड़ को दौड़ाता हुआ इब्राहीम
लोधी के पास आया और उससे कहने लगा।
सुल्तान मोहतरम ! इस वक्त हमारे लश्कर की हालत
बहुत ही नाजुक है लश्कर का एक बड़ा हिस्सा इस जंग में मारा गया है और कुछ सिपाही
जो हमारे खिलाफ थे वो मैदान छोड़कर भाग गये हैं । इस मौके पर मैं आपको एक मश्वरा
दूंगा कि बेहतर होगा कि आप मैदान जंग से
निकल जाएं अगर किसी लश्कर को सिपेहसालार या किसी मुल्क का बादशाह सलामत रहे तो
फिर बाद में इधर उधर बिखरे हुए सिपाही भी इकट्ठे हो जाते हैं। इस तरह वो अपनी ताकत
को दोबारा संभालते हुए कई मौकों पर अपनी हार को जीत में बदल सकता है।
मैं आपको मश्वरा दूंगा कि अभी के
हालात को देखते हुए आप मैदान –ए- जंग से निकल जाएं मुगलों से मुकाबला करने के लिये इधर उधर बिखरे
हुए सालारों से सुलाह करें। भागे हुए सिपाहियें
को अपने साथा मिलाएं और फिर ताजा दम होकर मुगलों पर हमला करें।

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