मुगल बादशाह जलालुुुुुद्दीन अकबर (भाग-6)
रानी दुर्गावती को जब खबर हुई कि अकबर का सालार आसफ खान उस
पर हमला करने के लिए आ रहा है तब वो अपने मरकजी शहर चूड़ गढ़ से निकली जबलपुर के
पास गढ़ और मंडल के बीच रानी दुर्गावती और
आसफ खान के बीच टकराव हुआ दोनों लश्कर बुरी तरह एक दूसरे पर टूट पड़े थे।
रानी दुर्गावती के बेटे राजा भीर नारायण की बदकिस्मी कि
जंग के शुरू में ही भीर नारायण जख्मी हो गया और रानी ने उसे पीछे की तरफ भेज
दिया।
उसके बाद जब मुसलमानों की तरफ से तेज तीर बरसाए गये तब रानी
की बदकिस्मती कि उसे दो तीर ऐसे लगे कि वो बुरी तरह जख्मी हो गई रानी के लश्करियों
ने जब देखा कि उनका राजा भीर नारायण जख्मी होकर पहले ही पीछे जा चुका है और रानी
भी बुरी तरह जख्मी हुई है तो उन्होंने लड़ाई बंद कर दी और हार मानकर भाग गये।
रानी ने जब देखा कि उसकी फौज को शिकस्त हुई है उसके सिपाही
अपनी जान बचाकर भाग गये हैं तो उसे खतरा नजर आया कि मुसलमान उसे गिरफ्तार कर लेंगे
इसलिये कि वो सख्त जख्मी थी और वो भाग
नहीं सकती थी इसलिए उसने अपना खंजर निकाला और अपने पेट में घोंप कर अपना खात्मा
कर लिया था। आसफ खान अपने लश्कर के साथ रानी दुर्गावती की रियासत गौंडवाना की
राजधानी चूड़ गढ़ की तरफ बढ़ा।
राजा भीर नारायण जख्मी हो चुका था लेकिन बड़ी तेजी से अपनी
राजधानी की तरफ भागा और सिपाहियों को जमा करके एक लश्कर तैयार किया और मुसलमानों
के मुकाबले के लिए आया लेकिन उसकी बदकिस्मती
कि एक बार फिर उसे शिकस्त हुई और राजा मारा गया इस तरह रियासत गौंडवाना पर मुगलों
का कब्जा हो गया।
आसफ खान जब अपने लश्कर के साथ रियासत गौंडवाना की
राजधानी में दाखिल हुआ तो रानी के
सिपाहियों ने शाही खानदान की औरतों को एक जगह जमा करके आग लगाकर उनका खात्मा कर
दिया सिर्फ दो औरतें बचीं। एक रानी दुर्गावती की बहन और भीर नारायण की खाला
कमलावती थी और दूसरी उसकी एक रिश्तेदार लड़की थी।
आसफ खान जब अपने लश्कर के साथ चूढ़ गढ़ में दाखिल हुआ तो
यहां उसे बहुत सा सोना बे शुमार जवाहारात व सोने चांदी के बुत व एक हजार हाथी के अलावा बहुत सा माल दौलत भी
हाथ लगे फिर वह अपने लश्कर के साथ चूड़ गढ़ में ठहरा और कीमती माल दौलत में से
सिर्फ दो सौ हाथी और कुछ ही सामान अकबर की तरफ रवाना कर दिया।
इसी बीच अकबर को किसी ने उकसाया कि मालवा का अजबक हाकिम अब्दुल्लाह
अकबर के खिलाफ बगावत करने का इरादा रखता है। हालांकि अब्दुल्लाह ने मुगलों की
सल्तनत को मजबूत करने के लिए बहुत मेहनत की थी। अब्दुल्लाह के अलावा भी जितने
अजबक हिंदुस्तान में मुगलों के साथ उन्होंने
मुगलों के लिए बहुत काम किया था। ये खबर सुनते ही अकबर एक लश्कर लेकर मालवा की
तरफ रवाना हुआ । उसने सबको यही बताया कि वो शिकार पर जा रहा है हालांकि उसका इरादा
अब्दुल्लाह से पूछताछ करना और उसे गिरफ्तार करना था।

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