मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-10)
ये खबर सुनकर
मिर्जा हाकिम के होश उड़ गये उसी वक्त अपने लश्कर के साथ वो लाहौर से निकला और
बड़ी तेजी से काबुल की तरफ चला गया उसकी खुशकिस्मती कि उन दिनों सर्दियां बहुत
तेज थी और बदख्शां का हाकिम सुलेमान काबुल से बदख्शां की तरफ चला गया था। हाकिम
मिर्जा के लिए काबुल का मैदान खाली था। इसलिए तेजी से आगे बढ़ा और एक बार फिर
काबुल पर कब्जा कर लिया और वहां का हुक्मरां बन गया।
दूसरी तरफ अकबर
लाहौर पहुंचा । शहर में अपने लश्कर के साथ रूका लाहौर में ठहरने के दौरान उसको दो
बुरी खबरें मिलीं पहली ये कि मालवा में उसके रिश्तेदारों ने उसके खिलाफ बगावत कर दी थी दूसरे अजबक सरदार
खान जमान फिर एक बार बगावत पर उतर आया था और उसने खुले तौर पर अकबर की जगह मिर्जा
हाकिम को अपना बादशाह तस्लीम कर लिया था।
मालवा और उसके
आसपास के इलाकों में अकबर के जिन रिश्तेदारों ने बगावत की थी उनके छ: भाई सबसे
आगे थे 1 अलफा मिर्जा 2 शाह मिर्जा 3 इब्राहीम हुसैन मिर्जा 4 अकील हुसैन मिर्जा 5 मोहम्मद हुसैन मिर्जा 6
मसऊद हुसैन मिर्जा थे।
अपने इन रिश्तेदारों
को अकबर ने बहुत बड़ी जागीर दे रखी थी इतिहासकार ये नहीं बता सके कि उन लोगों ने
बगावत क्यों की थी उन बगावतों को मिर्जाओं की बागवत कर नाम दिया गया और अकबर ने जो उन्हें जागीरें दी थी उनसे
निकलकर उन्होंने दूसरे इलाकों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया था। ये हालत देखते
हुए अकबर ने अपने सालार मुनअम खान को एक लश्कर देकर मालवा की तरफ रवाना किया और
अपने उन रिश्तेदारों को सजा देने का पक्का इरादा कर लिया। वो खुद अजबकों की तरफ
बढ़ा ।मिर्जाओं को जब खबर हुई कि अकबर का सालार मुनअम खान एक लश्कर लेकर उनपर
हमला करने के लिए आ रहा है तो वो मुकाबला करने की बजाय मालवा छोड़कर गुजरात की तरफ
भाग गये।
दूसरी तरफ अकबर
अपने लश्कर के साथ अजबकों का सफाया करने के लिए लाहौर से रवाना होकर थानेसर पहुंचा और फिर आगरा में दाखिल हुआ । उस
वक्त तक खान जमान कन्नौज के पास ‘’ शेर गढ़’’ पहुंचा वहां जो
अकबर का लश्कर था जिसका सालार यूसुफ खान था उसका मुहासरा किये हुए था। खान जमान का
भाई बहादुर खान मानकपुर पर हमला करके वहां का मुहासरा कर चुका था ये हालत बड़ी
खतरनाक थी इसलिए अकबर ने वक्त बर्बाद किये बगैर बड़ी तेजी से पहले खान जमान पर
हमला करने के लिए शेर गढ़ का रूख किया और 6मई को अकबर शेर गढ़ रवाना हुआ। खान जमान
को जब अकबर के आने की खबर हुई तो उसने ज्लदी से शेर गढ़ का मुहासरा उठा लिया और
अपने भाई बहादुर खान के पास चला गया जो उस वक्त मानकपुर में था ।
खान जमान और
बहादुर खान का एक और रिश्तेदार सिकंदर खान उस वक्त अवध में अकबर के खिलाफ
कार्यावाहीयां कर रहा था। अकबर ने एक लश्कर
उस पर हमला करने के लिए रवाना किया बहादुर खान और खान जमान भी सिकंदर खान से जा
मिले थे। मुगल लश्कर भी वहां पहुंच गया आखिर अकबर के लश्कर और बागियों का
मुकाबला कड़ा शहर से 7 मील दूर फतहपुर परसा में हुआ यहां होलनाक जंग हुई इस जंग
में अजबकों को हार का सामना करना पड़ा और खान जमान भाग खड़ा हुआ लेकिन उसकी बदकिस्मी
कि वो एक हाथी के पांव तले आकर कुचल गया और मर गया । उसके भाई बहादुर खान को
गिरफ्तार कर लिया गया । खान जमान हाथी के नीचे कुचल गया था लेकिन अकबर के
सिपाहियों ने उसका सर काटकर अकबर के सामने पेश कर दिया। दूसरी तरफ खान जमान के भाई
बहादुर खान को जब अकबर के सामने पेश किया गया तो अकबर ने उसका सर कलम कर दिया था। खान जमान और बहादुर खान के बाद दूसरे बड़े बड़े
अजबकों को अकबर के सामने पेश किया गया उन्हें भी अकबर ने उनके जुर्म के मुताबिक
सजाएं दीं। इस तरह अजबाकों की बगावत का हमेशा के लिए खात्मा हो गया था।
अजबकों का खात्मा
करने के बाद 18 जुलाई 1567ई. को अकबर आगरा पहुंच गया अब वो चेन से नहीं बैठा वो चाहता था कि जहां जहां भी कहीं बगावतें उठने
का खतरा है यो जो इलाके अभी तक उसके खिलाफ बगावत कर सकते हैं उन पर हमला करके उन्हें
फतह कर लिया जाय। सबसे पहले उसने राजपूतों के मश्हूर किले चित्तौड़ पर हमला करने
का फैसला किया।
31 अगस्त को
आगरा से निकलकर वो धौलपुर पहुंचा वहां से ग्वालियार की तरफ रवाना हुआ फिर वहां से
निकलकर अकबर ने चित्तौड़ से का रूख किया। चित्तौड़ का राजा उदय सिंह बड़ा घमंण्डी
था। वो अपने आपको सारे राजपूतों का सरदार मानता था।
क्योंकि आमेर के
राजा भारमल ने तो अकबर के साथ अपनी लड़की की शदी करके अकबर तक पहुंच हासिल कर ली
थी । उदय सिंह इस बात से भी भारमल के खिलाफ हो गया था उसका मानना था कि भारमल ने
अपनी बेटी अकबर को देकर राजपूतों के नाम पर बट्टा लगा दिया है । इसलिए अदय सिंह
अकबर और भारमल दोनों से बदला लेना चाहता था।
उदय सिंह अपनी
राजपूती शान कायम रखने का इरादा रखता था लेकिन दूसरी तरफ अकबर समझता था कि अगर उदय
सिंह ने उसकी इताअत कुबूल न की तो अकबर की तौहीन होगी । वो इसलिए राजा उदय सिंह को
हर कीमत पर अपनी इताअत करवाना चाहता था।

Comments
Post a Comment