मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर (भाग-19)
14 अक्टूबर 1603 ई. को अकबर ने एक लश्कर सलीम के हवाले किया और उसे हुक्म
दिया वो राजपूतों की बगावत को दबाने के लिए निकले सलीम लश्कर के साथ निकल तो गया
। लेकिन उसने अकबर से कहा राजपूतों पर हमला करने के लिए बड़े लश्कर की जरूरत
इसलिए उसे इलाहाबाद जाकर इसका मौका दिया जाय । अकबर ने उसे इलाहाबाद जाने की इजाजत
दे दी अकबर अब किसी बात पर उसे खिलाफ नहीं जाना चाहता था इसलिए कि वो नहीं चाहता
था कि सलीम फिर से बगावत कर दे।
इलाहाबद पहुंचकर सलीम ऐश व अय्याशियों में पड़ गया उसकी हरकतों से अकबर को
सदमा पहुंचा वो पहले ही अपने दूसरे बेटे दानियाल की हरकतों से परेशान था जो दिन
रात शराब के नशे में धुत रहता था वो उस वक्त दक्षिण में था। इस तरह शहजादा सलीम
ने भी शराब पीने के साथ साथ अफीम खानी शुरू कर दी थी और शहजादा सलीम की पहली बीवी
जो राजा मानसिंह की बहन थी उसने शहजादा सलीम के रवैये की वजह से तंग आकर खुदकुशी
कर ली थी।
इस बात पर राजा मानसिंह शहजादा सलीम के खिलाफ था और उसकी बजाय वो सलीम के बेटे
और अपने भांजे खुस्रू के लिए काम कर रहा था और अकबर के बाद वो उसे ही हिंदुस्तान
का बादशाह बनाना चाहता था।
दूसरी तरफ जब अकबर को खबर मिली कि राजपूतों के खिलाफ जंग करने की बजाय शहजादा
सलीम इलाहाबाद में ऐश व अय्याशियों में पड़ गया है और उसे दौरे पड़ने लगे हैं कुछ
होश नहीं रहता कि वो क्या कर रहा है। नशे की हालत में उसने अकबर के एक सिपाही को
जिंदा दफन करा दिया क्योंकि उसने अकबर को सलीम की हरकतों की खबर दी थी एक नौकर को
इतना पीटा कि वो मर गया जब ये सारी खबरें अकबर तक पहुंची तब वह सलीम की तरफ एक लश्कर
लेकर रवाना होना चाहता था लेकिन मूसलाधार बारिश शुरू हो गई जिसकी वजह से उसे जाने
में देरी हो गई।
जब वो दोबारा रवाना होने लगा तो 10 सितम्बर को उसकी मां की मौत हो गई दूसरी
तरफ शहजादा सलीम बड़ी तेजी से इलाहाबाद से आगरा पहुंच गया ताकि दादी की मौत पर बाप
के सामने दुख: जाहिर कर सके। कई इतिहासकार के कहते हैं कि सलीम को उसकी दादी की
मौत का कोई असर नहीं था वो तो सिर्फ इसलिए आगरा आया था कि अपनी मां की मौत की वजह
से अकबर बहुत सदमे में होगा जिसकी वजह से उसे हुकूमत संभालने का मौका मिल जायेगा।
सलीम आते हुए अकबर के लिए बहुत कीमत तोहफे भी लाया था लेकिन अकबर उसकी हरकतों से
सख्त नाराज था इसलिए सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया। अकबर ने एक बार बहुत ही गुस्से
की हालत में उसके मुंह पर थप्पड़ भी दे मारा था। उसके बाद उसे ऐसी जगह बंद कर
दिया गया जहां सिर्फ वो अकेला था बल्कि उसे शराब भी न मिल सकती थी इस तरह शहजादा
सलीम वहां दस दिन तक बंद रहा उसके बाद उसे वहां से निकाला गया।
हो सकता है कि अकबर उसे किसी इलाके का हाकिम न बनाता और उसे शाही काम काज से
दूर रखता मगर इसी बीच अकबर को एक और सदमा लगा कि अकबर का दूसरा बेटा दानियाल
दक्षिण में बीमार होकर मगर गया इसलिए उसने सलीम के खिलाफ कार्यवाही का सिलसिला
समझदारी दिखाते हुए बंद कर दिया।
कुछ ही दिन के बाद अकबर को बहुत तेज बुखार हुआ अक्टूबर के महीने में जब सलीम अपने
बाप को देखने के लिए गया तो अकबर की हालत नाजुक थी। कमजोरी की ये हालत थी कि होश
में होने के बावजूद वो कुछ बोल न सकता था।
जब सलीम अकबर के पास जाकर खड़ा हुआ तो अकबर ने उसे इशारे से शाही पगड़ी पहनने
के लिए कहा उसके बाद उसने अपने बेटे सलीम को अपने बाप हुमायुं की तलवार कमर पर
बांधने का हुक्म दिया। सलीम ने उसके हुक्म को माना और अकबर के कहने पर कमरे से
बाहर चला गया। कुछ दिन के बाद 25 व 26 अक्टूबर 1605ई. की रात को अकबर ठीक 63 साल
की उम्र में वफात पा गया। ये भी कहा जाता है कि अकबर ने अपनी मौत से पहले अपने
गुनाहों से तौबा कर ली थी उसने आखिरी वक्त में दोबारा इस्लाम का दामन थाम लिया
था चूंकि कमजोरी की वजह से उसकी जबान काम न करती थी उसके बावजूद बार बार अल्लाह
कहने की कोशिश करता रहा। अकबर के दरबार के
इतिहासकार अबुल फजल और बदायूंनी अकबर की वफात से पहले इस दुनिया से रूखसत हो चुके
थे इसलिए अकबर के नये सिरे से इस्लाम कुबूल करने के वाक्यात लिखे हुए नहीं
मिलते।
बहरहाल अकबर 63 साल की उम्र में फौत हो गया और उसके बाद शहजादा सलीम जहांगीर
के नाम से तख्त पर बैठा अकबर ने अपने बेटे के लिए बहुत बड़ी और मजबूत सल्तनत
छोड़ी थी उसके लिए खजाने में पांच अरब सोने के सिक्के सात मन सोना सत्तर मन
चांदी बाराह हजार घोड़े छ: हजार हाथी एक
हजार हिरण और एक हजार के लगभग चीते थे जो शिकर के लिए इस्तेमाल होते थे । इस तरह
अकबर को दौर खत्म हुआ और जहांगीर हिंदुस्तान का बादशाह बन गया।

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