मुगल बादशाह जहीरूद्दीन बाबर (भाग-3)
बाबर को जब समरकंद के हालात की खबर हुई तो उसने तय कर लिया
कि वो समरकंद को हासिल करने के लिये जान व माल की बाजी लगा देगा। उसने फैसला कर
लिया कि वो अपने मरकजी शहर में हाथ पर हाथ धरे नही बैठेगा। बल्कि अपना लश्कर लेकर
निकलेगा और समरकंद पर हमला करके उस पर कब्जा करेगा और वो तैमूर लंग का वारिस बन जायेगा।
बाबर समरकंद पर हमले की तैयारीयां कर रहा था उस वक्त हालात
उसके लिये ज्यादा फायदेमंद साबित हो गये । वो इस तरह कि समरंकद के हुक्मरां अहमद
के मरने के बाद समरकंद में बहुत से गिरोह आपस में बंट गये थे और आपस में लड़ने लगे
थे उनमें से जिन लोगों को हार का सामना करना पड़ता वो बाबर के पास आ जाते इस तरह
बाबर के लश्कर में फौजियों की बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई थी।
उसके अलावा बाबर को एक और फायदा हुआ कि उसका चाचाजाद भाई
जिसका नाम सुल्तान अली मिर्जा था वो भी समरकंद में शिकस्त खाने के बाद वहां से
भागा और बाबर के पास उसके मरकजी शहर अंदजान में पहुंच गया इस तरह बाबर की फौजी
ताकत में काफी बढ़ोतरी हो गई ।
बाबर ने देख कि उसके पास अब बहुत बड़ा लश्कर हो गया है और
उसने अपने फौजियों की ट्रेनिंग भी खूब कर दी है। तब 1497ई.
में बाबर ने समरकंद पर हमला करने
के लिये अपने मरकजी शहर अंदजान से कूच किया । अपनी नानी और अपनी मां को अंदजान में
ही छोड़ा और अपने भाई जहांगीर को वादी
फरगाना का निगरां बनाया उसके बाद उसने समरकंद का रूख किया था।
समरकंद में जो बहुत से गिरोह आपस में लड़ रहे थे जब उन्हें
खबर हुई कि एक बाबर एक बड़ा लश्कर लेकर समरकंद पर हमला करने के लिये आ रहा है तब
उन्होने बाबर को रोकने के लिये एक बड़ा लश्कर रवाना किया उन लोगों की बदकिस्मती
थी जो लश्कर उन्होंने बाबर को रोकने के लिये भेजा था वो बाबर के साथ मिल गया और
बाबर ने उन फौजियों को अपने लश्कर में शामिल कर लिया और उन्हें खूब इनामात दिये
जिससे बाबर की फौजी ताकत और मजबूत हो गई।
बाबर अब बड़ी तेजी से आगे बढ़ा नदी नालों को पार करते हुए
समरकंद के पास पहुंचा उसने पहाड़ी बागों में अपने लश्कर का पड़ाव डाला जहां से
समरकंद के किले के चमकते हुए गुंबद और खाकी रंग की दीवारें साफ दिखाई दे रही थी।
अब बाबर ने अपने लश्कर के साथ समरकंद के आस पास के इलाके
में कयाम किया यहां रूकने से बाबर को एक और फायदा हुआ जब उसका लश्कर उस शहर के
बाहरी इलाकों पर काबिज हुआ तो उन्हें हरे भरे इलाके से खुराक मिलने लगी जबकि उन
चीजों की समरकंद के शहर में कमी होने लगी इसलिये बाबर के किले को घेरने की वजह से
बाहर की चीजें अंदर नहीं पहुंच पा रही थीं।
इसी वजह से समरकंद
शहर के ताजिर जो बाबर के घेराबंदी की वजह से अपने कारोबार में नुकसान उठा रहे थे
वो शहर से निकलकर बाबर के लश्कर में आने जाने लगे और पड़ाव में आकर चीजों को बदलने लगे इस तरह उन
ताजिरों को बाबर के लश्कर की वजह से फायदा होने लगा वहां बाबर के सिपाहियों को भी
हर चीज मिलने लगी।
एक दिन ऐसा हुआ कि बाबर के सिपाहियों को लालच आ गई और उन्होंने
उन ताजिरों का सारा सामान लूट लिया ताजिरों ने जब उसकी शिकायत बाबर से की तो बाबर
सिपाहियों से सख्ती से पेश आया और सिपाहियों को हुक्म दिया कि सारा सामान जो
लूटा गया है वो समरकंद के ताजिरों को वापस कर दिया जाये बाबर के इस हुक्म से टूटी
हुई सूई से लेकर धागे तक सारा सामान वापस कर दिया गया जिससे ताजिर बाबर के इस
सुलूक से बहुत खुश हुए ।
मुहासरा अब लंबा होने लगा था और सर्दी का मौसम करीब आ रहा
था इस वजह से बाबर के सालारों से मश्वरा दिया कि सर्दियां सर पर आ गईं हैं इसलिये
सर्दियां गुजारने के लिये अपने पड़ाव को छोड़कर करीब के पहाड़ी इलाकों में रूका
जाय जहां टूटी फूटी दीवारों पर छत डालकर सिपाहियों के रहने का इंतेजाम किया जाये।
बाबर ने इस बात को मान लिया और सर्दियां गुजारते हुए बाबर
ने समरकंद शहर का मुहासरा जारी रखा कहनो को तो मुहासरा लंबा होता जा रहा था मगर
उसने हिम्मत नहीं हारी ।
दूसरी तरफ समरकंद की हालत भी खराब होती जा रही थी शहर के
अंदर खुराक की वजह से कहत के आसार शुरू हो गये थे सर्दियां सर पर थीं शहर का
इंतेजाम उस वक्त एक शख्स बिलसखर के पास था। मुहासरे की वजह से वो सख्त मुसीबतें
झेल रहा था जब बाबर ने समरकंद के सौदागरों के साथ फैयाजाना सुलूक किया तो शहर के ज्यादातर
लोग बिलसखर को छोड़कर बाबर की तरफ हो गये समरकंद के हाकिम बिलसखर से जब ये ख्याल
किया कि बाबर ने समरकंद का मुहासरा तो कर ही लिया है और समरकंद के लोग भी अगर उसे
छोड़कर बाबर को पसंद करने लगे तो ताजिर खुले तौर उसके खिलाफ हो जायेंगे जब ताजिर
खुले तौर पर बाबर की तरीफें और उसकी बुराई करने लगे तो उसे खतरा महसूस होने लगा
अगर उसने इन हालात में समरकंद के अंदर कयाम किया तो लोग उस पर हमला करके उसको खत्म
कर देंगे इसलिेये अपने कुछ वफादार सिपाहियों के साथ वो समरकंद से निकला और समरकंद
के पहले हुक्मरां अहमद मिर्जा के रिश्तेदारों के यहां चला गया।
समरकंद शहर के हाकिम के शहर से निकलते ही शहर अब बाबर के
लिये बिल्कुल खाली था वहां कोई उसकी मुखालिफत करने वाला नहीं था । जब इन हालात की
खबर बाबर को हुई तो उसने अपना पड़ाव खत्म किया और अपने लश्कर के साथ समरकंद में
पहुंच गया और समरकंद पर बाबर का कब्जा हो
गया था।
समरकंद सिकंदर-ए- आजम ने बसाया था उसका नाम उसने महफूज शहर
रखा था ये शहर दरिया-ए- सेहून के किनारे पर था कुतेबा बिन मुस्लिम के हाथों इसके
फतह होने से पहले समरकंद के रहने वाले लोग यहां हाकिमों को तर खून कहकर बुलाते थे
आखिर लंबे मुहासरे के बाद कुतेबा बिन मुस्लिम से इस शहर को फतह किया इस फतह के बाद
बुखारा शहर के साथ समरकंद भी मुसलमानों की तब्लीग करने का मरकज बन गया इस शहर को सबसे ज्यादा पहचान तैमूर लंग के दौर में मिली
उसके जमाने में ये शहर तिजारत और दूसरे मामलों में अपनी अलग ही पहचान रखता था। समरकंद
की जमीन में पास के दरिया के पास से सिंचाई होती थी और समरकंद के सेब बहुत ही
रसीले माने जाते थे और यहां गहरे रंग का अंगूर भी पसंद किया जाता था। तैमूर लंग ने
अपने दौर में उस शहर के अंदर एक चार मंजिला महल बनवाया था जो नीले महल के नाम से
जाना जाता था साथ ही उसने पत्थर की एक जामा मस्जिद भी बनवाई जिसके दरवाजे पर
कुरआन की आयत लिखवाई गई।
'' रब्बना तकब्बल मिन्नी''
बाबर ने तैमूर लंग के बनाय हुए इसी चार मंजिला महल में कयाम
किया था। बाबर ने अब समरकंद शहर फतह कर
लिया था अब उसकी हुकूमत अंदजान से लेकर समरकंद तक फैल गई थी लेकिन जहां उसे काम्याबीयां मिल रही थीं वहीं
अंदर ही अंदर साजिशों के जाल भी बुने जा रहे थे साजिशों के ये जाल बुनने में दो
आदमी सबसे आगे थे एक का नाम तम्बल और दूसरे का नाम सुल्तान अली था। ये दोनों
अंदर ही अंदर साजिश करने के साथ साथ अपना लश्कर भी तैयार कर रहे थे और किसी भी
वक्त बाबर के लिये ज्वामुखी की तरह फट सकते थे वो ज्यदातर उन लोगों को अपने साथ
मिलाने की कोशिश कर रहे थे जो बाबर के खिलाफ थे ।

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