Skip to main content
                         जहांगीर और नूरजहां भाग-4 लेकिन तख्‍त पर बैठने के बाद जहांगीर ने उसकी ये गल्‍ती माफ कर दी और उसे बंगाल की जागीर पर बहाल रखा । शेर अफगन के कत्‍ल के बाद उसकी बीवी मेहरून्निसा (नूरजहां) को उसकी बेटी लाडली बेगम के साथ जहांगीर के दरबार में भेज दिया गया। मेहरून्निसा को अकबर की बीवी सलीमा बेगम की खिदमत पर लगा दिया गया । सन् 1611 ई. में जश्‍ने बहार के मौके पर पहली बार इत्तिफाक से नूर जहां को देखा तो उसका दीवाना हो गया और दो माह बाद ही उससे शादी कर ली । जहांगीर ने उसे नूर महल का नाम दिया । अपनी काबिलियत के दम पर नूरजहां बहुत जल्‍द जहांगीर के करीब होती चली गई । उसके बाप को इतिमातुद्दौला का खिताब दिया गया और उसके भाई को तरक्‍की दी गई। शेर अफगन नूरजहां और जहांगीर के बारे में अनगिनत कहानियों ने जन्‍म लिया । कुछ लोगों ने लिखा कि जहांगीर अकबर के जमाने में ही नूरजहां की मोहब्‍बत में गिरफ्तार हो गया था लेकिन उसकी मंगनी शेर अफगन के साथ हो गई थी इसलिये जहांगीर के रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा मुस्किलें पैदा हो ...

Hazrat Nizamuddin Auliya (rh.) part-67

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-67





मर्दे कामिल से अजीमतर मफादात हासिल करने के बजाए इंतिहाई खसारे का सौदा करने लगा फिर इसी कजी ने उवेद के दामन को दोनों जहान की लअनतों से भर दिया

वाक्‍या यूं हुआ कि इसी दौरान एक हिंदू ने हजरत निजामुद्दीन औलिया की खिदमत में हाजिर होकर इस्‍लाम कुबुल कर लिया हजरत महबूब इलाही बड़ी तवज्‍जो से उस नये मुस्लिम की तरबीयत फरमा रहे थे।

एक दिन हजरत शेख ने अपने दस्‍ते मुबारक से दो मिस्‍बाकें अता कीं नये मुस्लिम ने मिस्‍बाकें लेकर हजरत निजामुद्दीन औलिया का शुक्रिया अदा किया और खामोशी से अपनी जगह पर आकर बैठ गया इत्तिफाक से उस नया मुस्लिम शा उवेद शायर के करीब ही बैठा था फिर जब हजरत महबूब इलाही मज्लिस आम से उठकर अपने हुजरे खास में तश्‍रीफ ले गये तो नये मुस्लिम ने उवेद से कहा  मुझमें इतनी जुर्रत नहीं थी कि मैं हजरत शेख से दो मिस्‍बाकें अता करने की वजह पूछता  क्‍या एक मिस्‍बाक काफी नहीं थी ?

एहतराम व अदब के इस नाजुक तरीन मकाम पर भी उवेद अपनी शरारत से बाज न आया उसने नये मुस्लिम को दो मिस्‍बाकों के इस्‍तेमाल का तरीका बताते हुए कहा एक मिस्‍बाक दांतों की सफाई के लिये और दूसरी ना पाकी दूर करने के लिये।

वो सादा लोह शख्‍स उवेद का जवाब सुनकर मुतमइन हो गया और दोनों मिस्‍बाकों को इस फितना अंगेज शायर के बताये हुए तरीके के मुताबि इस्‍तेमाल करने लगा। कुछ दिन बाद इस नये मुस्लिम ने हजरत निजामुद्दीन औलिया की खिदमत में हाजिर होकर अर्ज किया कि   या शेख: एक मिस्‍बाक जिससे में दात साफ करता हूं , उसकी जाहिरी हालत बहुत बेहतर मगर दूसरी जिससे ना पाकी दूर करता हूं उसकी हालत निहायत ही बुरी है और मैं सख्‍त तकलीफ में मुब्तिला हूं फरमाइयें मेरे लिये क्‍या हुक्‍म है?

इस कदर बेहूदा बात सुनकर हजरत निजामुद्दीन औलिया के चेहरे का रंग बदल गया आपने खिलाफे आदत तल्‍ख लहजे में उस नये मुस्लिम से पूछा तुझसे ऐसा करने के लिए किसने कहा है?

उवेद शायर ने ‘’ नये मुस्लिम ने किसी झिझक के बगैर जवाब दिया।

उस वक्‍त वो फितना परवर शायर भी मज्लिस में मौजूद था और अपनी इस शरारत से लुत्‍फ अंदोज हो रहा था नये मुस्लिम का जवाब सुनकर हजरत निजामुद्दीन औलिया गुस्‍से में आ गये और आपने उस मुफ्सिद शायर को मुखातिब करते हुए फरमाया ।‘’ उवेद  तू लकड़ी से खेल रहा है।‘’

हजरत महबूब इलाही की जबाने मुबारक से ये सख्‍त अल्‍फाज सुनकर तमाम हाजिरीन लरज गये और उन्‍हें अंदाजा हो गया कि अनकरीब उस गुस्‍ताख  बे अदब शायर को तख्‍ता ए दार पर खींच दिया जाएगा मगर खुद उवेद का ये हाल था उसने हजरत निजामुद्दीन औलिया की तंबीह का एहसास तक नहीं किया उसे अपने उस शर्मनाक काम पर कोई नदामत महसूस हुई और न वो मखदूम की दिल दुखाने पर माफी मांगी बस इंतेहाई बे हसी के साथ बैठा मुस्‍कुराता रहा और फिर अपने कामों मश्‍गूल हो गया।

इस वाक्‍ये के कुछ दिन बाद सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक ने तेलंगाना की जंग के लिए अपने बड़े बेटे शहजादा मोहम्‍मद को एक लश्‍करे जर्रार के साथ रवाना किया शहजादा मोहम्‍मद तुगलक पूरे जाह जलाल के साथ आगे बढ़ा रास्‍ते में चंदेरी, अवध, और कढ़ा के लश्‍कर भी उसके साथ मिल गये। फिर तमाम फौजों ने अरंगल का मुहासरा कर लिया जो सात सौ साल से राय करण महादेव और उसके बाप दादा की राजधानी रहा था   मोहम्‍मद तुगलक के सिपाहियों का हुजूम देखकर राय करन महादेव ने किले के दरवाजे बंद कर लिए और अपने लश्‍कर के साथ महसूर हो गया।  मोहम्‍मद तुगलक ने अपने जां निसारों को हुक्‍म दिया कि वो किले की फसीलों को तोड़ दें  और उस वक्‍त तक जंग जारी रखें जब तक उन्‍हें मुकम्‍मल फतह हासिल न हो जाए  नतीजतन घमासान का रण पड़ा दोनों तरफ खून के दरिया बहने लगे । शहजादा मोहम्‍मद तुगलक के सिपाही भी सर वक्‍फ होकर लड़ रहे थे और राय करण देव की फौजें भी अपनी आजादी बर करार रखने के लिए जान की बाजी लगा रही थीं।

अभी इस जंग का कोई फैसला नहीं हुआ था कि इत्तिफाकन देहली और अरंगल का दर्मियानी रास्‍ता कट  गया शहजादा मोहम्‍मद तुगलक बड़ी बैचेनी से अपने बाप के पैगाम का इंतेजार कर रहा था मगर  रास्‍ते वीरान पड़े थे और किसी कासिद का दूर दूर तक पता नहीं था ये एक फिक्र अंगेज सूरत हाल थी जिससे उवेद शायर ने सियासी मफाद हासिल करने की कोशिश की और ये अफवाह उड़ा दी कि देहली में सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक का इंतेकाल हो गया मलिक तकीन और दूसरे सरदारों ने उस अफवाह को बड़ी हैरत से सुना।

‘’ अगर वो जिंदा होते तो इस खौफनाक जंगी मुहिम के दौरान खामोश न रहते ‘’ उवेद अपनी फितरती जिहानत से काम लेते हुए मन्‍तिकी दलील पेश की।  देहली का सुकूत जाहिर कर रहा है कि फरिश्‍ता ए अजल ने सुल्‍तान की सांसें गसब कर लीं हैं वर्ना कोई न कोई शाही हुक्‍म जरूर आता मलिक ताकीन और दूसरे उमरा जो खुद भी साजिशी जहन रखने थे उवेद की दलील से मुतमईन नजर आने लगे सुल्‍तान के वफादार उमरा के दिलों में शुकूक व शुबहात पैदा करने के बाद उवेद ने अपनी खबासत-ए- नफ्सी का खुलकर मुजाहिरा किया कुदरत ऐसे मौके बार बार फराहम नहीं करती किस्‍मत अजमाई के लिए इससे बेहतर मौका फिर कभी नहीं आएगा सुल्‍तान अपने अंजाम को पहुंच चुका अब शहजादा मोहम्‍मद तुगलक अकेला है उसे भी आसानी से कत्‍ल किया जा सकता है आम रियाया को गुमान भी न होगा कि शहजादा मोहम्‍मद तुगलक गैर फितरी मौत का शिकार हुआ है अगर किसी किस्‍म की शोरश पैदा हुई तो उसे ये कहकर दबाया जा सकता है कि शहजादा  जंग पर मौजूद था किसी दुश्‍मन का तीर उसके हलक में  पेवस्‍त हो गया और वली अहद सल्‍तनत ने अहले हुनूद से जंग करते हुए जाम-ए- शहादत नोश कर लिया।

शायर उवेद ने बड़ा फितना अंगेज मंसूबा पेश किया था हवस इक्तिदार ने मलिक तकीन और दूसरे सरदारों को अंधा कर दिया फिर वो लोग अपने आका जादे को कत्‍ल करने पर दिल से तैयार हो गये अब ये बागी गिरोह की बद नसीबी थी उन्‍ही के बीच खानदान तुगलक का एक हकीकी नमक ख्‍वार भी मौजूद था उसने बड़ी एहतियात  और राजदारी के साथ शहजादा मोहम्‍मद तुगलक के सामने उस शाजिस को बे नकाब  कर दिया शहजादा एक लम्‍हा जाय किए बगैर अपने पचास जां निसारों के साथ उस इलाके से निकल गया और बड़ी तेज रफ्तारी से अपनी मंजिल तय करता हुआ देहली पहुंच गया फिर जब उसने सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक के रूबरू सारा माजरा बयान किया तो वाली ए हिन्‍दुस्‍तान इस कदर मुश्‍तइल हुआ कि उसने तमाम गद्दार उमरा के कत्‍ल का फरमान जारी कर दिया मलिक ताकीन और दूसरे सरदारों को उस वक्‍त  मौत के घाट उतार दिया गया तब वो जंगलों में छिपने की कोशिश कर रहे थे।


हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-63

हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-64

हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-65

हजरत निजामुद्दीन औलिया भाग-66


Comments

Popular posts from this blog

Hazrat Nizamuddin Auliya (rh.) part-66

हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) पाठ-66   ‘’ मैं किस चीज का हिसाब पेश करूं ? हजरत निजामुद्दीन औलिया ने पुर जलाल लहजे में फरमाया वो सारी रकम बैयतुलमाल का हिस्‍सा थी जो हकदारों को पहुंच गई- मैंने उसमें से एक तुनका भी अपनी जात पर खर्च नहीं किया अगर मैं ऐसा करता तो यकीनन सुल्‍तान को इस रकम का हिसाब पेश कर देता- ‘’ सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक ने हजरत निजामुद्दीन औलिया का जवाब बड़ी हैरत से सुना। फिर अपने कारिन्‍दे से मुखातिब हुआ। कहीं यह तेरी जहनी इख्तिरा तो नहीं ? ये कैसे मुमकिन है कि एक दरवेश   ने खड़े खड़े पांच लाख तिनके दूसरों पर लुटा दिये ? आखिर बाकी दरवेशों ने किस लिये रकम महफूज रखी और वापस मांगने पर क्‍यों लौटा दी ? सुल्‍तान आली कद्र ? कारिन्‍दे ने   झुकते हुए अर्ज किया मै दूसरे दरवेशों के बारे में तो नहीं जानता कि उनका मिजाज क्‍या है मगर हजरत महबूब इलाही की जात गिरामी से जरूर वाकिफ हूं कि आप की सखावत का अंदाज यही है। सुल्‍तान गयासुद्दीन तुगलक खामोश हो गया और फिर उसने अपने भरोसे के   लोगों के जरीये हजरत निजामुद्दीन औलिया के बारे में तहकीकात कराई फिर बड़ी मुश्किल...

CHALAAK NEWALA

चालाक नेवला  आपने बहुत से जानवरों के किस्से और मालूमात सुनी होंगी लेकिन आपको एक अजीब जानवर का हाल सुनाते हैं इससे पहले आपको इसके बाते में कुछ मालूमात भी हो तो बेहतर है - तो सुनिए ! ये चूहों , साँपों , और मगर मच्छो का दुश्मन है - मगर मच्छ अपना मुँह खुला रखता है और उसके मुँह में घुसकर उसके पेट में पहुंच जाता है और उसकी आंते काट देता है और फिर बहार निकल आता है - हां तो फिर आप इंतजार में होंगे आखिर ये कौनसा जानवर है  तो लीजिये ये जानवर नेवला है नेवला बहुत होशियार जानवर है - एक बार एक नेवल एक चूहे का शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़ा , चूहा अपनी जान बचाने के लिए एक दरख़्त पर चढ़ गया - जब उसको भागने का कोई रास्ता न मिला तो वो एक शाख का पत्ता अपने मुँह में दबाकर लटक गया नेवले ने चूहे जब ये चालाकी देखि तो उसने अपनी मादा को आवाज दी - मादा उसकी आवाज सुनकर दरख़्त के निचे आई तो नेवले ने उस शाख को जिस पर चूहा लटक रहा था काट दिया शाख के काटने से चूहा नीचे गिरा गिरते ही मादा ने उसका शिकार कर लिया -  नेवला चोर भी होता है जब उसको सोने चाँदी की कोई च...

Mughal Badshah Aurangzeb Alamgir [part-20]

मुगल बादशाह औरंगजेब आलमगीर (भाग-20) औरंगजेब ने कभी सरकारी खजाने से एक पाई भी न ली उसका मामूल था कि सुबह सवेरे उठकर नमाज अदा करता कुरआन मुकद्दस की तिलावत करता ।उसके बाद कुरआन मुकद्दस के नुस्‍खे अपने हाथ से तैयार करता उसका खाली वक्‍त इबादत में गुजरता उसके साथ औरंगजेब आलमगीर हाफिज कुरआन भी था 24 घंटे में सिर्फ 2 घंटे आराम करता था। शरीअत और हुजुर सललल्‍लाहु अलैहि वसल्‍लम का तरीका उसकी जिंदगी थीं । इतिहासकार लिखते हैं कि शरीअत ही औरंगजेब का लिबास था उसने अपनी पूरी जिंदगी एक दीनदार और पाकबाज इंसान की तरह गुजारी आम बादशाहों के उलट उसका जिंदगी जीने का तरीका ही सबसे अलग था। आखिरी दिनों में उसने अपने बेटे शहजादा आजम को एक खत लिखा जो उसके अच्‍छे किरदार को दिखाता उसने लिखा था। मेरी पैदाईश पर अनगिनत लोगों ने जश्‍न मनाया मगर मैं जब इस दुनिया से जा रहा हूं तो अकेला हूं। जिंदगी के मकसद बड़े होते हैं और मुझे उन लम्‍हों के बेकार जाने का सदमा है जो खुदा की इबादत और उसकी याद के बगैर गुजरे। काश मैं लोगों की खिदमत अपनी मंशा के मुताबिक कर सकता इसलिए कभी कभी एहसास होता है कि मेरी जिंदगी बे मकसद थी जो बेका...