हजरत निजामुद्दीन औलिया(रह.) भाग-58
हजरत अमीर खुसरू ने अर्ज किया मैं बच्चों की तालीम तरबियत के लिये
एक मुख्तसर किताब तहरीर कर रहा हूं जिसका नाम’ खालिक बारी’ तजवीज किया गया है उस किताब का कुछ हिस्सा सुनाओ हजरत
निजामुद्दीन औलिया ने हजरत अमीर खुसरू को हुक्म दिया हजरत अमीर खुसरू ने अपनी इस
मुनफरिद किताब ‘खालिक
बारी’ के कुछ अश्आर पीरो मुर्शिद को सुनाए हजरत
महबूब इलाही ने उन अश्आर को पसंद करते हुए इर्शाद फरमाया ये बहुत मुफीद चीज है
मगर हिन्दी जबान मैं ऐसे अश्आर भी लिखो जिन्हें लोग गाया करें।
इसके बाद हजरत शेख ने दूसरे लोगों
को मुखातिब करते हुए फरमाया आज कल हमारी फारसी और खुसरू की तुर्क जबान के साथ हिन्दुओं
की बोल चाल के बहुत से अल्फाज मिल गये हैं और अब लोग अपने घरों और महफिलों में
भी हिन्दी अल्फाज इस्तेमाल करने लगे हैं लेकिन बहुत से हजरात ऐसे भी हैं जो
फारसी और तुर्की की जबानों में हिन्दी की मिलावट नहीं होगा कि वो जिद छोड़ दें और
अपना मकसद हासिल करने के लिये हिन्दी बोल चाल को बढ़ावा दें।
महेन्द्र देव के बयान किये हुए इस वाक्ये से अंदाजा किया जा सकता है कि हजरत
निजामुद्दीन औलिया ने न सिर्फ उर्दू जबान की बुनियाद रखी बल्कि इस्लाम की तब्लीग
के लिये भी एक असरदार रास्ता खोल दिया।
महेन्द्र देव मुकम्मल तौर पर
हजरत निजामुद्दीन औलिया की जांनवाज शख्सीयत के जेरे असर आ चुका था वो बड़े बडे
साधूओं और जोगियों से मिला था, उसने अपने हम मजहबों की शख्त तरीन रियाजतें भी देखी
थीं मगर उसे किसी ऋषि या मुनि ने इस कदर
मुताअस्सिर नहीं किया कि वो उनके हल्का ए अकीदत में शामिल हो जाता इसके बरअक्स
महेन्द्र देव हजरत निजामुद्दीन औलिया की एक नजर की भी ताब न ला सका था हजरत अमीर
खुसरूने अपने पीरो मुर्शिद की शान में एक मुन्कबत तहरीर की थी जिसकी गूंज आज भी एशिया
पाक व हिन्द की गली कूचों में सुनाई देती है
(तेरी एक नजर का ये असर है कि तूने
बुत परस्ती के सारे निशानों को मिटा डाला)
हजरत अमीर खुसरू का ये मिस्राअ
महेन्द्र देव पर पूरी तरह सच साबित होता था उसकी जात में बहुत दिनों से एक खौफनाक जंग
जारी थी काबे का तसव्व्ुर महेन्द्र देव को अपनी तरफ खींचता था मगर उसके पैरों
में बुत खाने की जंजीरें पड़ी थीं आखिर महबूब इलाही की निगाहे किमिया असर रंग लाई
और महेन्द्र देव ने अपनी अकीदे की तमाम बंदिशों को तोड़ डाला एक दिन हाजिरीन
मज्लिस के सामने अर्ज करने लगा हजूर ये तो फरमाएं मुसलमान किस तरह बनता है ?
जब तू अल्लाह को एक मान लेगा और
रसूल की रिसालत तस्लीम कर लेगा तो मुसलमान हो जाएगा।
अगर मुस्लिम होना इतना ही आसान है
तो मुझे इसी वक्त मुसलमान कर लिजिये महेन्द्र देव ने हाथ जोड़ते हुए अर्ज किया। हजरत निजामुद्दीन ने ईमान लाने की वजाहत करते
हुए फरमाया मुसलमान करने के लफ्ज से जाहिर होता है कि उस में किसी किस्म का जबर, दबाव,या लालच या जाती गर्ज भी शामिल है
और मुसलमान होना एक अलग बात है अगर तू इस बात का यकीन कर ले कि अल्लाह एक है और
मोहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके
रसूल है तो उस यकीन साथ ही तू मुसलमान हो जायेगा।
महेन्द्र देव पर हजरत निजामुद्दीन
औलिया के इरशाद गिरामी की इस कदर हैबत तारी हुई कि वो घबरा कर कहने लगा मुझे पूरा
यकीन है कि अल्लाह एक है और मोहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके रसूल हैं
हजरत महबूब इलाही ने फरमाया बस तू
मुसलमान है ।
महेन्द्र देव के चेहरे पर खुशी की
एक ऐसी लहर दौड़ गई जैसे उसे गैर मामूली दौलत हासिल हो जब मैं मुसलमान हो चुका तो
फिर मुझे बेयत भी कर लिजिये ।
इरशाद हुआ अभी उसका वक्त नहीं आया
है और न उसकी जरूरत है तुम अपने मुसलमान होने
और अपना नाम बदलने का एलान करो।
महेन्द्र देव हजरत महबूब इलाही के
हुक्म पर अमल करता रहा मगर उसके साथ ही वो हल्का इरादत में शामिल होने के लिये बैचेन रहता था आखिर कुछ दिनों बाद उसने
अर्ज किया हुजूर मुझे बेयत का शर्फ बख्श दीजिये वरना मुझे हमेशा ये खलश बे करार
रखेगी ।
हजरत निजामुद्दीन औलिया ने महेन्द्र
देव की दरख्वास्त को कुबूलियत का एजाज बख्शा। हल्का इरादत में शामिल होने के बाद महेन्द्र
देव ने देवगढ़ जाने की इजाजत मांगी हुजूर मैंने बहुत दिनों से अपने मां बाप को
नहीं देखा है।
तुम अपने वतन जा सकते हो हजरत
निजामुद्दीन औलिया ने महेन्द्र देव को दक्किन जाने की इजाजत देते हुए फरमाया मां बाप इजाजत दें तो दोबारा आ जाना अगर वो
तुम्हारे साथ देहली आना चाहें तो तुम उन्हें भी ला सकते हो।
अभी महेन्द्र देव अपने वतन जाने
की तैयारी कर रहा था कि वो साजिशों के तूफान में घिर गया और उसका सफीना हयात
डगमगाने लगा उस खौफनाक वाक्ये के बारे में खुद महेन्द्र देव तहरीर करता है मैं
देवगढ़ रवाना होने वाला था कि हजरत ख्वाजा मोहम्मद का खुद्दाम मलीह मेरे पास आया
और मुझसे कहने लगा कोतवाल अलाउलमलिक का एक आदमी तुमसे मिलना चाहता है । अलाउलमलिक
हजरत निजामुद्दीन का मुरीद था।
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